
गले में मौजूद छोटी सी थायरॉइड ग्रंथि शरीर के पूरे सिस्टम को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों के अनुसार, थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं आज तेजी से बढ़ रही हैं और लोग इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि समय रहते पहचान और सही उपचार से इस बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
थायरॉइड क्या है और क्यों है जरूरी
थायरॉइड एक हार्मोन बनाने वाली ग्रंथि है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। यह तय करती है कि शरीर ऊर्जा को कितनी तेजी से इस्तेमाल करेगा। जब इस ग्रंथि के काम में गड़बड़ी आती है, तो शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई देने लगते हैं।
दो प्रकार की होती है थायरॉइड बीमारी
डॉक्टर बताते हैं कि थायरॉइड मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है—
पहला है हाइपोथायरायडिज्म, जिसमें हार्मोन कम बनने लगता है। इस स्थिति में व्यक्ति का वजन बढ़ने लगता है, थकान बनी रहती है और कब्ज की समस्या हो जाती है।
दूसरा है हाइपरथायरायडिज्म, जिसमें शरीर जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाता है। इसके कारण तेजी से वजन घटना, घबराहट, ज्यादा पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण सामने आते हैं।
नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि थायरॉइड के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, इसलिए लोग इन्हें सामान्य कमजोरी या तनाव समझ लेते हैं। लेकिन समय पर जांच न कराना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।
इलाज और कंट्रोल के आसान तरीके
थायरॉइड को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है। इसके लिए नियमित दवा लेना बेहद जरूरी है। साथ ही संतुलित आहार और रोजाना व्यायाम करने से भी स्थिति में काफी सुधार देखा जाता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा में बदलाव करना खतरनाक साबित हो सकता है।
जीवनशैली में बदलाव है जरूरी
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर थायरॉइड के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय पर सोना, तनाव से दूर रहना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना बेहद जरूरी माना गया है।
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