
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के मुद्दे पर केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और विपक्षी दलों के गठबंधन ‘INDIA’ के बीच चल रही तकरार अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। संसद भवन से निर्वाचन सदन तक प्रदर्शन करने के बाद विपक्षी गठबंधन ने अपनी लड़ाई का रुख सीधे देश की शीर्ष अदालत की ओर कर दिया है। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में 23 से अधिक विपक्षी दलों के सांसद, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता आज सुप्रीम कोर्ट तक महामार्च निकाल रहे हैं। विपक्ष का साफ आरोप है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था के रूप में काम करने के बजाय सत्ताधारी दल के इशारे पर लाखों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट रहा है। विपक्ष का प्रतिनिधिमंडल इस मार्च के जरिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर चुनाव आयोग के कामकाज में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप, SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग करेगा।
विपक्षी दलों के इस अभूतपूर्व आक्रोश के पीछे चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया और वोटर रजिस्ट्रेशन नियमों में किए गए हालिया बदलाव हैं:
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फॉर्म 6 में एकतरफा बदलाव का आरोप: वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम और अन्य विपक्षी सांसदों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण वाले ‘फॉर्म 6’ में मनमाने तरीके से ऐसे सवाल जोड़ दिए हैं, जिनमें माता-पिता के वोटर होने का प्रमाण मांगा जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि संसद की मंजूरी के बिना नियमों में किया गया यह बदलाव असंवैधानिक है और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं व हाशिए पर मौजूद वर्गों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश है।
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लाखों वोटों के नाम हटाने (Deletions) का मामला: INDIA गठबंधन का दावा है कि SIR की आड़ में पूरे देश के विभिन्न राज्यों में विशेष समुदायों और विपक्षी समर्थकों के वैध वोट थोक के भाव में वोटर लिस्ट से गायब किए जा रहे हैं।
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आयोग में एकतरफा फैसलों का आरोप: विपक्ष का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अन्य चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर मनमाने और एकतरफा आदेश पारित कर रहे हैं, जिससे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और साख पर गहरा बट्टा लगा है।
संसद परिसर और जंतर-मंतर पर लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने आयोग पर तीखे हमले बोले हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर संवैधानिक संस्थाओं की इस मनमानी को नहीं रोका गया, तो देश में लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा और अधिनायकवादी शासन कायम होगा। वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे प्रकरण को ‘वोट चोरी’ और जनादेश का अपहरण करार देते हुए सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और वामपंथी दलों के नेताओं ने भी एक सुर में कहा है कि देश का अवाम अब मूकदर्शक बनकर अपने वोट के अधिकार को छिनते हुए नहीं देख सकता।
सड़कों पर प्रदर्शन के समानांतर यह मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच चुका है। शीर्ष अदालत में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को प्राप्त कानूनी संरक्षण का दुरुपयोग किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड्स की जांच करने की बात कही है। इसके अलावा, वर्ष 2024 में नए मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया की वैधानिकता और सर्च कमेटी के नियमों के उल्लंघन को लेकर भी एक नई याचिका कोर्ट में विचाराधीन है। विपक्ष अब सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर यह मांग कर रहा है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं हो जाती, तब तक विवादित फैसलों पर पूर्ण रोक लगाई जाए।
INDIA गठबंधन के इस बड़े मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CRPF/RAF) ने राजधानी के लुटियंस जोन को किले में तब्दील कर दिया है।
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बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा: कनॉट प्लेस, बाराखंभा रोड, मंडी हाउस, जंतर-मंतर और सुप्रीम कोर्ट की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है।
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यातायात और मेट्रो पर असर: कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली मेट्रो के कई प्रमुख स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों को आंशिक रूप से बंद या नियंत्रित किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए मध्य दिल्ली के प्रमुख रास्तों से बचने की सलाह दी है।
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धारा 144 और हिरासत की चेतावनी: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से संसद और सुप्रीम कोर्ट के आसपास संवेदनशील क्षेत्रों में बिना अनुमति किसी भी बड़े जुलूस या मार्च को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास में यह दुर्लभ अवसर है जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ समूचा विपक्ष एक सुर में इस्तीफे की मांग को लेकर इस तरह सड़कों पर उतर आया है। आगामी विधानसभा चुनावों और आम चुनावों की निष्पक्षता को लेकर उठे इस सियासी बवंडर ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर जबरदस्त दबाव बना दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस संवैधानिक गतिरोध पर क्या रुख अपनाता है और सड़कों पर उतरा यह आक्रोश आने वाले दिनों में देश की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।
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