मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर महेश भट्ट और अध्यात्मिक गुरु ओशो (रजनीश) का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में एक पॉडकास्ट में पूजा भट्ट ने अपने पिता और ओशो के बीच हुए उस भयानक टकराव का खुलासा किया है, जिसके बाद उनके पूरे परिवार को जान बचाकर भागना पड़ा था। पूजा भट्ट ने बताया कि एक वक्त ऐसा आया था जब उनके पिता का ओशो से मोहभंग हो गया और उन्होंने गुस्से में आकर ओशो की दी हुई पवित्र माला को अपने गले से खींचा और सीधे टॉयलेट में फ्लश कर दिया।
‘भगवान नाराज हैं…’ विनोद खन्ना ने दी थी चेतावनी
पूजा भट्ट ने साइरस ब्रोचा के पॉडकास्ट में पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया, “जब पिता ने माला फ्लश की, तो उन्हें ओशो कल्ट से बैन कर दिया गया। वह एक भगोड़े बन चुके थे। मुझे अच्छी तरह याद है कि तब सुपरस्टार विनोद खन्ना ने मेरी मां को एक डरावना मैसेज भेजा था, जिसमें लिखा था— ‘भगवान बहुत नाराज हैं। भगवान महेश को बर्बाद कर देंगे।’ ओशो का गुस्सा एक जुनूनी प्रेमी जैसा था, उन्हें अपने लोगों का दूर जाना बर्दाश्त नहीं था।”
आधी रात को पुणे के सेफ हाउस में शिफ्ट हुआ परिवार
माला फ्लश करने के बाद भट्ट परिवार में इस कदर खौफ फैल गया था कि बच्चों (पूजा भट्ट और उनके भाई-बहन) को आधी रात को ही पुणे के एक गुप्त और सुरक्षित घर (सेफ हाउस) में शिफ्ट करना पड़ा। पूजा ने ओशो आश्रम के कड़े नियमों का जिक्र करते हुए बताया, “मैं जब बच्ची थी, तब ओशो के पैर छूती थी। आश्रम में किसी को भी शैम्पू या परफ्यूम लगाने की इजाजत नहीं थी, क्योंकि ओशो को बाहरी महक पसंद नहीं थी। वह सूंघकर मुंह बना लेते थे क्योंकि उनका मानना था कि इससे उनका ऑरा प्रभावित होता है।”
आखिर क्यों भड़क गए थे महेश भट्ट?
1974 से 1977 के बीच लगातार फिल्में फ्लॉप होने के बाद मानसिक शांति के लिए महेश भट्ट पुणे के ओशो आश्रम पहुंचे थे। वहां वह संन्यासी चोगा पहनते थे और दिन में पांच बार मेडिटेशन करते थे। खुद महेश भट्ट ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक दिन प्रवचन के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि ओशो के मन में भी ईर्ष्या और सांसारिक बुराइयां हैं। उन्हें लगा कि वह खुद से और दुनिया से झूठ बोल रहे हैं। इसी पाखंड से चिढ़कर उन्होंने ओशो का साथ हमेशा के लिए छोड़ दिया था।
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