
संक्रामक बीमारियों में टाइफाइड (मियादी बुखार) एक गंभीर बीमारी मानी जाती है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और संक्रमित भोजन के जरिए फैलती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के संक्रमण से होती है। यदि समय रहते इसका सही इलाज न कराया जाए तो यह मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए इसके लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
दूषित पानी और भोजन से तेजी से फैलता संक्रमण
डॉक्टरों के मुताबिक टाइफाइड का संक्रमण अधिकतर उन जगहों पर तेजी से फैलता है जहां स्वच्छता का अभाव होता है। संक्रमित व्यक्ति के मल या मूत्र के संपर्क में आए पानी या भोजन के सेवन से यह बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाता है। यही कारण है कि गंदे पानी, खुले में रखे खाद्य पदार्थ या ठीक से न पकाए गए भोजन का सेवन करने से इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
104°F तक बुखार और लगातार कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण
टाइफाइड के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बीमारी में मरीज को लंबे समय तक तेज बुखार हो सकता है, जो कई मामलों में 104°F तक पहुंच जाता है। इसके अलावा सिरदर्द, पेट में दर्द, भूख कम लगना, अत्यधिक थकान और शरीर में कमजोरी भी आम लक्षण माने जाते हैं। कई मरीजों में उल्टी, दस्त या कब्ज की समस्या भी देखी जा सकती है।
समय पर एंटीबायोटिक इलाज से संभव है ठीक होना
चिकित्सकों का कहना है कि टाइफाइड का इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। यदि मरीज को शुरुआती चरण में ही उपचार मिल जाए तो कुछ दिनों में संक्रमण पर काबू पाया जा सकता है। लेकिन इलाज में देरी होने पर यह बीमारी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है और कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है।
बचाव के लिए स्वच्छता और सुरक्षित पानी जरूरी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टाइफाइड से बचने के लिए साफ पानी पीना, भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाना और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बाहर का खुला या असुरक्षित भोजन खाने से बचना भी संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
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