
नई दिल्ली: दिल्ली में नीट (NEET) और छात्र आंदोलनों की अगुवाई को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच छिड़ी राजनीतिक खींचतान पर समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का बड़ा बयान सामने आया है। गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सामने आ रही दूरी पर सपा प्रमुख ने स्वीकार किया कि विपक्षी दलों के बीच आपसी तालमेल बनाना और उसे बेहतर रखना इस समय सबसे बड़ी चुनौती है।
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के तेज दौर में नेताओं के बयान तुरंत वायरल हो जाते हैं, जिन्हें बाद में सुधारना कठिन होता है। ऐसे में ‘इंडिया’ गठबंधन के घटकों को संयम और समन्वय के साथ काम करने की जरूरत है।
‘निजी हित अलग हो सकते हैं, लेकिन मुद्दे एक हैं’
विपक्ष के भीतर कड़वाहट की खबरों को खारिज करते हुए अखिलेश यादव ने गठबंधन की एकजुटता का दावा किया:
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राजनीतिक हित बनाम साझा मुद्दे: सपा प्रमुख ने कहा, “अलग-अलग राजनीतिक दलों के व्यक्तिगत या क्षेत्रीय हित भिन्न हो सकते हैं, लेकिन देश की जनता से जुड़े मुद्दे एक ही हैं। बेरोजगारी, महंगाई, किसान, NEET परीक्षा और युवाओं का भविष्य हमारे साझे मुद्दे हैं।”
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सपा-कांग्रेस में कोई तल्खी नहीं: कांग्रेस के साथ मतभेदों की अटकलों को दरकिनार करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों के बीच कोई स्थायी कड़वाहट नहीं है। दिल्ली प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर उन्होंने बताया कि जानकारी मिलते ही वे अपने सभी कार्यक्रम छोड़कर विरोध स्थल पर पहुंचे थे।
‘PM बाहर बयान दे सकते हैं, तो लोकसभा में क्यों नहीं बोलते?’
संसद परिसर और लोकसभा के भीतर सरकार पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब की मांग की:
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सदन में बयान की मांग: “पेपर लीक कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है। अगर प्रधानमंत्री जी संसद के बाहर इस विषय पर बोल सकते हैं, तो लोकसभा के भीतर आकर अपना आधिकारिक बयान क्यों नहीं दे रहे?”
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संसद में बोलने की इजाजत पर नाराजगी: लोकसभा में सपा को बोलने का अवसर मिलने में हुई देरी पर अखिलेश ने अध्यक्ष के समक्ष कड़ा विरोध जताया और कहा कि केवल सत्तापक्ष और मुख्य विपक्षी दल के बीच की बातचीत काफी नहीं है, अन्य विपक्षी दलों की बात भी सुनी जानी चाहिए।
स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि इतने वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद भी अगर सरकारें एक मेडिकल कॉलेज का सही से संचालन नहीं कर पा रही हैं, तो वे छात्रों और अभ्यर्थियों को सुरक्षा व पारदर्शिता का क्या भरोसा दिलाएंगी।
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