
चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष (2026) बेहद खास संयोगों के साथ शुरू हो रहा है। नवरात्रि का पहला दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
पालकी में होगा मां दुर्गा का आगमन
इस बार नवरात्रि में माता रानी का आगमन पालकी या डोली पर हो रहा है। शास्त्रों में बताया गया है कि मां का डोली में आगमन कुछ विशेष संकेत देता है। इसे प्राकृतिक आपदाओं, मौसम में बदलाव और जनजीवन पर प्रभाव के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। हालांकि श्रद्धालुओं के लिए यह समय मां की भक्ति और आराधना का सर्वोत्तम अवसर होता है।
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। मां का यह स्वरूप स्थिरता, शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कैसे करें पूजा-अर्चना
इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के मंदिर में मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापना कर मां को फूल, फल, अक्षत और घी का दीप अर्पित करें। विशेष रूप से गाय के घी का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश
नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का भी समय है। यह नौ दिनों का पर्व व्यक्ति को अनुशासन, संयम और भक्ति का महत्व सिखाता है। मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना जीवन में शक्ति और संतुलन प्रदान करती है।
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