चारों सीटों पर बीजेपी-जेडीएस गठबंधन की प्रचंड जीत, मल्लिकार्जुन खरगे के गढ़ में भी खिसकी जमीन

दक्षिण भारत की राजनीति और कर्नाटक के चुनावी गलियारों से इस वक्त कांग्रेस पार्टी के लिए एक बहुत ही बुरी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। कर्नाटक विधान परिषद (MLC) के लिए हाल ही में संपन्न हुए द्विवार्षिक चुनावों के परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित कर दिए गए हैं। इन चुनावों में राज्य की सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी का पूरी तरह से सूपड़ा साफ हो गया है और वह अपना खाता खोलने तक में नाकाम साबित हुई है। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) यानी एनडीए (NDA) गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चुनाव में उतरी सभी चारों सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली है। कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास में इसे सत्ताधारी दल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कर्नाटक विधान परिषद के इन चुनावों में किस तरह के समीकरण बने और किस पार्टी के उम्मीदवार ने बाजी मारी है।

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: NDA गठबंधन की एकजुटता ने दी कांग्रेस को मात

गत 23 अक्टूबर को कर्नाटक की चार महत्वपूर्ण शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों (Teacher and Graduate Constituencies) के लिए मतदान कराए गए थे। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर के बीच के जमीनी तालमेल और आपसी सहयोग की एक बहुत बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था। परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि दोनों दलों का यह गठबंधन धरातल पर पूरी तरह सफल रहा है और वे 100 प्रतिशत अंकों के साथ इस इम्तिहान में पास हुए हैं।

राज्य के शिक्षकों और स्नातकों के पढ़े-लिखे वर्ग के बीच कांग्रेस पार्टी अपनी नीतियों और अपने जनाधार का भरोसा कायम रखने में पूरी तरह विफल साबित हुई। इसके विपरीत, एनडीए गठबंधन ने अपनी रणनीति को बेहद पुख्ता तरीके से लागू करते हुए चारों सीटों पर भगवा और सेक्युलर दलों का परचम लहरा दिया। चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक के बुद्धिजीवी वर्ग में सत्ताधारी कांग्रेस के खिलाफ किस स्तर पर नाराजगी या अविश्वास का माहौल पनप रहा है।

भाजपा और जेडीएस ने किन-किन सीटों पर दर्ज की शानदार जीत

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों और परिणामों के अनुसार, भाजपा और जेडीएस गठबंधन ने आपसी बांट के तहत सभी सीटों पर अपने मजबूत उम्मीदवार उतारे थे, जिन्हें शानदार सफलता मिली है:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रदर्शन: भाजपा ने अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए कुल तीन महत्वपूर्ण सीटों पर कब्जा जमाया है। पार्टी ने उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपने प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताया है।

  • जनता दल सेक्युलर (JD-S) का प्रदर्शन: एनडीए गठबंधन के सहयोगी दल जेडीएस ने भी अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर बहुत ही शानदार जीत दर्ज की है।

मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र कलबुर्गी में भी कांग्रेस को धूल, शशील जी. नमोशी की पांचवीं जीत

इन चारों सीटों के परिणामों में सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (North-East Teachers Constituency) की हो रही है, जहां भाजपा के कद्दावर नेता और मौजूदा विधान परिषद सदस्य शशील जी. नमोशी (Shashil G. Namoshi) ने एक बार फिर से अपनी जीत का परचम लहराया है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को करारी शिकस्त दी है।

खास बात यह है कि इस निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत कलबुर्गी (Gulbarga) जिला भी आता है, जो देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) का गृह क्षेत्र माना जाता है। अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के गृह जिले और गृह क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी का इस तरह चुनाव हार जाना पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी आत्ममुग्धता तोड़ने वाला बड़ा संकेत है। शशील जी. नमोशी की इस सीट पर यह रिकॉर्ड पांचवीं जीत है, जो उनके मजबूत स्थानीय प्रभाव को दर्शाती है।

इसके अलावा, दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर भाजपा के के.एम. सुरेश ने कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मुट्ट को पराजित किया, जबकि पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के एस.वी. संकानूर ने कांग्रेस के मोहन लिम्बिकाई को मात देकर अपनी सीट सुरक्षित कर ली।

क्या इन नतीजों से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर आएगा कोई संकट

भले ही इन विधान परिषद चुनावों के परिणामों से कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर कोई तत्काल संवैधानिक खतरा मंडराने की संभावना नहीं है, क्योंकि विधानसभा में पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का यह मानना है कि विधान परिषद (Upper House) में विपक्षी गठबंधन का यह मजबूत और आक्रामक प्रदर्शन आने वाले दिनों में सरकार को घेरने का बड़ा राजनीतिक हथियार बन जाएगा।

वर्तमान में कर्नाटक की 75 सदस्यीय विधान परिषद के गणित को देखें तो कांग्रेस के पास 38 सदस्य हैं, भाजपा के पास 24, जेडीएस के पास 6, एक निर्दलीय और एक सभापति हैं, जबकि राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाने वाली कुछ सीटें खाली हैं। इन नतीजों के बाद राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा और जेडीएस का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया है। वे इन चुनावों को जनता के मूड का ट्रेलर बताते हुए कांग्रेस सरकार की विफलताओं के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक जोरदार हमला बोलने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले समय में कर्नाटक की राजनीति में इस हार के बाद कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह और अधिक बढ़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।

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