नई दिल्ली/ज्योतिष डेस्क: ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से 11 मई 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दिन ग्रहों के सेनापति मंगल अपनी स्वराशि मेष में प्रवेश करेंगे, जहां वे 21 जून तक विराजमान रहेंगे। मंगल का यह गोचर साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि करने वाला माना जा रहा है। हालांकि, इसी समय राहु और केतु की विशेष स्थिति के कारण ‘कालसर्प योग’ का निर्माण भी हो रहा है, जो कुछ राशियों के लिए चुनौतियों का अंबार लगा सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों के लिए यह समय वरदान है और किन्हें संभलकर रहने की जरूरत है।
इन 3 राशियों पर मेहरबान रहेंगे ‘भूमिपुत्र’ मंगल
मंगल का अपनी ही राशि मेष में आना ऊर्जा का संचार करेगा, जिसका सीधा लाभ इन राशियों को मिलेगा:
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मेष राशि: आपकी ही राशि के प्रथम भाव में मंगल का गोचर पुराने आर्थिक नुकसान की भरपाई कराएगा। आपकी मेहनत अब रंग लाने वाली है। यदि आप नया घर या वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय सबसे अनुकूल है।
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वृश्चिक राशि: आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि होगी, जिससे आप व्यापार में सटीक निर्णय ले पाएंगे। आय के नए स्रोत बनेंगे और धन का आगमन सुगम होगा।
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सिंह राशि: पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझेंगे और वहां से बड़ा लाभ होने के योग हैं। जो लोग घर बनाने का सपना देख रहे हैं, मंगल देव उनकी मुराद पूरी कर सकते हैं।
कालसर्प योग का साया: इन 3 राशियों की बढ़ेगी मुश्किलें
11 मई से राहु के कुंभ और केतु के सिंह राशि में होने से सभी ग्रह इनके बीच आ जाएंगे, जिससे कालसर्प योग बनेगा। यह स्थिति इन राशियों के लिए तनावपूर्ण हो सकती है:
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कुंभ राशि: आपको किसी अनजाने भय या मानसिक बेचैनी का अनुभव हो सकता है। मानसिक अशांति के कारण बनते हुए काम बिगड़ सकते हैं, इसलिए धैर्य बनाए रखें।
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सिंह राशि: आर्थिक मामलों में आपको विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। कोई भी बड़ा निवेश या धन का लेन-देन बिना सोचे-समझे न करें, वरना नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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धनु राशि: आपकी लव लाइफ और निजी रिश्तों में खटास आ सकती है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ने की आशंका है, इसलिए बातचीत में संयम रखें।
मेष राशि में मंगल के प्रभाव का ज्योतिषीय विश्लेषण
जब मंगल मेष राशि के प्रथम भाव में होता है, तो जातक शारीरिक रूप से बलवान और साहसी बनता है। चूंकि मंगल आठवें भाव का स्वामी भी है, इसलिए यह लंबी आयु तो देता है लेकिन बीच-बीच में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी खड़ी कर सकता है। इसकी सातवीं दृष्टि शुक्र की राशि वाले सप्तम भाव पर पड़ने के कारण वैवाहिक जीवन और साझेदारी के व्यवसाय में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
उपाय और सावधानी
इस दौरान कालसर्प योग के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव की आराधना करना श्रेष्ठ रहेगा। साथ ही, 15 मई से सूर्य के वृषभ राशि में जाने के बाद स्थितियों में कुछ बदलाव आएगा, लेकिन तब तक निवेश और बड़े फैसलों में सावधानी बरतनी अनिवार्य है।
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