ब्रुसेल्स/नई दिल्ली। यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति के गलियारे से भारत के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर आ रही है। यूरोपीय संघ (EU) ने रूस की ‘वॉर इकोनॉमी’ (युद्ध अर्थव्यवस्था) की कमर तोड़ने के लिए अपने अब तक के सबसे कड़े 21वें प्रतिबंध पैकेज का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इस नए और सख्त प्रतिबंधों की जद में भारत की कुछ प्रमुख कंपनियां भी आ रही हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कथित तौर पर आर्थिक और रणनीतिक मदद करने के आरोप में यूरोपीय संघ भारत सहित 6 देशों की करीब 50 कंपनियों पर बड़ा निर्यात प्रतिबंध (Export Ban) लगाने की तैयारी कर रहा है।
ब्रुसेल्स का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार, 50 विदेशी कंपनियां निशाने पर
यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष और विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने इन नए प्रतिबंधों का खाका पेश करते हुए कहा कि ब्रुसेल्स पिछले दो सालों में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इसका सीधा मकसद रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे को पंगु बनाना और युद्ध के लिए हो रही फंडिंग को रोकना है। जिन 50 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, उनमें भारत के अलावा चीन, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), किर्गिस्तान और कजाकिस्तान की कंपनियां शामिल हैं। इसके साथ ही, ड्रोन बनाने वाली 30 से अधिक नई रक्षा संस्थाओं को भी इस ब्लैकलिस्ट में जोड़ा गया है।
क्रिप्टोकरेंसी और 90 विदेशी बैंकों की संपत्ति होगी फ्रीज
इस 21वें प्रतिबंध पैकेज का दायरा सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले वैश्विक वित्तीय तंत्र पर भी बड़ा प्रहार किया गया है।
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बैंकों पर ऐक्शन: रूस के मददगार देशों के करीब 90 बैंकों की संपत्ति (Assets) को फ्रीज करने का प्रस्ताव है।
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ट्रांजैक्शन पर रोक: रूस और अन्य देशों के 30 से अधिक बड़े बैंकों के इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर कड़ी पाबंदी और मॉनिटरिंग लागू की जाएगी।
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क्रिप्टो पर सर्जिकल स्ट्राइक: रूस को फंडिंग ट्रांसफर करने वाले 11 बड़े क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स के लेनदेन को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।
इसके अलावा, रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त जहाजी बेड़े) से जुड़े 30 अतिरिक्त जहाजों, 2 रूसी बंदरगाहों और 4 हवाई अड्डों पर भी पूरी तरह बैन लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, इस पैकेज को अंतिम रूप से लागू करने से पहले यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की मंजूरी मिलना बाकी है।
पाकिस्तान का दौरा खत्म कर यूरोप लौटीं काजा कलास
भारतीय कंपनियों पर इस कड़े ऐक्शन के ऐलान के बीच, यूरोपीय संघ की शीर्ष कूटनीतिज्ञ काजा कलास अपनी पाकिस्तान की रणनीतिक यात्रा पूरी कर वापस ब्रुसेल्स लौटी हैं। उनकी इस यात्रा के दौरान यूरोपीय संघ और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों (विशेषकर GSP+ दर्जे), मानवाधिकारों की स्थिति और अफगानिस्तान सीमा जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। पाकिस्तान के लिए यूरोपीय संघ एक बहुत बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, इसलिए कलास का यह दौरा दक्षिण एशिया में यूरोपीय संघ की नई रणनीतिक पैठ के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर मंडराया संकट या भारत का रहेगा दबदबा?
भारतीय कंपनियों पर यह प्रतिबंधात्मक कार्रवाई ऐसे समय में प्रस्तावित की गई है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में एक युगांतरकारी व्यापारिक समझौता हुआ है। जनवरी 2026 में दोनों पक्षों के बीच हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), जिसे यूरोपीय आयोग ने खुद ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (सभी समझौतों की मां) का नाम दिया था, इस वक्त सबसे बड़े टर्निंग पॉइंट पर है।
इस ऐतिहासिक डील के तहत भारत के कपड़ा, समुद्री उत्पाद (सी-फूड), फार्मा और ज्वेलरी जैसे 90% से अधिक उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में शून्य-ड्यूटी (टैक्स-फ्री) एंट्री मिली है। बदले में भारत ने भी यूरोप की लग्जरी कारों पर आयात शुल्क को 110% से घटाकर मात्र 10% कर दिया है। इसके साथ ही, एक बड़ी राहत यह भी है कि ईयू ने अपने कड़े क्वालिटी नियमों के बावजूद सितंबर 2026 के बाद भी भारत से मछली (एक्वाकल्चर), अंडे और शहद के आयात को जारी रखने की मंजूरी दे दी है, जिससे भारत के 1.59 अरब डॉलर के समुद्री निर्यात उद्योग को जीवनदान मिला है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि 21वें प्रतिबंध पैकेज का इस ऐतिहासिक व्यापारिक रिश्ते पर क्या असर पड़ता है।
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