
नई दिल्ली: हरियाणा के पानीपत से एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ऑनलाइन चर्चाओं में सुर्खियां बटोर रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अब कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। पानीपत के एक वकील ने निर्वाचन आयोग में आवेदन देकर इस पार्टी को अपने नाम से रजिस्टर करने की मांग की है। खास बात यह है कि यह दावा अमेरिका में रहने वाले इसके कथित संस्थापक अभिजीत दिपके से अलग हटकर किया गया है।
निर्वाचन आयोग में दाखिल की गई अर्जी
मिली जानकारी के अनुसार, खुद को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का राष्ट्रीय संयोजक बताने वाले सुधीर जाखड़ ने निर्वाचन सचिव के समक्ष जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29A के तहत पार्टी के पंजीकरण के लिए आवेदन सौंपा है। इस आवेदन में पार्टी का ‘कॉकरोच’ चुनाव चिन्ह जैसा लोगो भी शामिल किया गया है। साथ ही जाखड़ ने अपने नाम के आगे अधिवक्ता का पदनाम भी दर्ज कराया है।
सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी हो सकता है दावा
सूत्रों के मुताबिक यदि निर्वाचन आयोग द्वारा सुधीर जाखड़ के नाम पर CJP को पंजीकरण मिल जाता है, तो वह पार्टी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी अपना अधिकार जता सकते हैं। माना जा रहा है कि यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर नई बहस छेड़ दी है।
ऑनलाइन ग्रुप से राजनीतिक पहचान तक का सफर
बताया जा रहा है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ शुरुआत में एक ऑनलाइन ग्रुप और डिजिटल कम्युनिटी के रूप में चर्चा में आई थी। सोशल मीडिया पर इसके नाम और कंटेंट ने युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल की। अब इसके राजनीतिक पंजीकरण की कोशिशों ने इसे एक अलग पहचान दे दी है।
कानूनी और राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह पार्टी आधिकारिक रूप से पंजीकृत होती है, तो यह देश की सबसे अनोखे नाम वाली राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो सकती है। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि निर्वाचन आयोग आवेदन की वैधता, संगठन की संरचना और दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही कोई फैसला लेगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड करने लगी। कई यूजर्स ने इसे मजाकिया अंदाज में लिया, जबकि कुछ लोगों ने इसे डिजिटल युग की नई राजनीतिक रणनीति बताया।
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