राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी का मामला अब एक बड़ा जन-आंदोलन बनता जा रहा है। अयोध्या में फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सोमवार को एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला लेते हुए घोषणा की है कि उनका कोई भी सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिवक्ता ने आरोपियों का केस लड़ने की कोशिश की, तो उस पर पांच लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने का फरमान
बार एसोसिएशन के तेवर इस मामले में बेहद तल्ख हैं। वकीलों ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने मांग की है कि इन तीनों पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अयोध्या छोड़ देना चाहिए। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि ये तीनों अगले तीन दिनों के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरी अयोध्या की घेराबंदी कर दी जाएगी और किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित सुनवाई से किया इनकार
इस बीच, राम मंदिर मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस पर ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद यानी 13 जुलाई के आसपास सुनवाई की जाएगी। पीठ ने टिप्पणी की कि “आसमान नहीं टूट पड़ेगा,” जिसके बाद याचिकाकर्ताओं को अब अगली तारीख का इंतजार करना होगा।
विपक्ष का भाजपा पर बड़ा हमला
राम मंदिर दान विवाद ने अब सियासी रूप ले लिया है। विपक्ष ने भाजपा को घेरते हुए आरोपों की बौछार कर दी है।
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अखिलेश यादव: सपा अध्यक्ष ने ‘सच्चे सनातनियों’ से अपील की है कि वे भाजपा का बहिष्कार करें और उन्हें वोट न दें। उन्होंने इसे भगवान राम के साथ धोखा करार दिया है।
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कपिल सिब्बल: राज्यसभा सांसद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी दल ने देश को तो लूटा ही है, अब भगवान राम के दान को भी नहीं बख्शा।
कानूनी प्रक्रिया: आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में
दान की हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भ्रष्टाचार रोधी अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के सामने पेश किया गया। सरकारी वकील उमेश दुबे ने जानकारी दी कि पुलिस द्वारा फिलहाल हिरासत की मांग न किए जाने पर अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि वे सीबीआई जांच की मांग को लेकर अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
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