अयोध्या में श्री राम मंदिर के दानपात्र से हुई चोरी के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे हैरान कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस और एसआईटी की जांच में सामने आया है कि जिन युवाओं को मंदिर की सेवा में रखा गया था, उन्होंने अपनी मेहनत से नहीं, बल्कि आस्था के इस केंद्र में ‘बेईमानी’ से रातोंरात धनकुबेर बनने का रास्ता चुना। मंदिर के खजाने में नोटों का अंबार देख इन आरोपियों की नीयत डोल गई और देखते ही देखते वे मंदिर के भरोसे का कत्ल करने लगे।
गणना कम, बैंक ले जाते समय हुई सबसे बड़ी ‘सेंधमारी’
जांच में यह बात प्रमुखता से उभरकर आई है कि मंदिर में दान के पैसों की चोरी गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) की तुलना में बैंक ले जाते समय अधिक की गई। सूत्रों के मुताबिक, गणना के दौरान तो हेरफेर की कोशिशें होती थीं, लेकिन बैंक ले जाते समय नोटों के बंडल गायब करने का खेल बड़े पैमाने पर चला। पुलिस अब इसके दस्तावेजी सबूत जुटा रही है कि कैसे इन लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था और लचर सर्विलांस का फायदा उठाकर दान की रकम पर हाथ साफ किया।
कैसे पकड़े गए ‘अचानक लखपति’ बने आरोपी?
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामशंकर यादव (टिन्नू), अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडेय, सुभाष यादव और मनीष यादव जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी का पारिवारिक बैकग्राउंड बेहद सामान्य था।
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रहन-सहन और शौक: मंदिर के काम से जुड़े इन युवाओं का रहन-सहन अचानक बदल गया था। किसी ने महंगी बाइकें खरीदीं, तो किसी ने पत्नी के नाम प्लॉट खरीदे।
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बेहिसाब खर्च: कुछ आरोपियों ने भागवत कथा जैसे आयोजनों में पानी की तरह पैसा बहाया।
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संपत्ति का जखीरा: आरोपी टिन्नू के पास 14 कमरों का हॉस्टल होने जैसी बातें सामने आई हैं, जो उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक हैं।
अयोध्या के स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर परिवार ने समय रहते इन युवाओं के बदलते लाइफस्टाइल और अचानक आए पैसों के स्रोत के बारे में पूछा होता, तो शायद आज ये लोग जेल की सलाखों के पीछे नहीं होते।
चंपत राय के करीबी भी रडार पर
इस पूरे मामले में श्रीराम तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बेहद करीबी माने जाने वाले रामशंकर यादव (टिन्नू) की गिरफ्तारी ने सबको चौंका दिया है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों द्वारा खरीदे गए प्लॉट और उनके आर्थिक लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन संपत्तियों का भुगतान किस माध्यम से किया गया और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
क्या अब भी बाकी हैं ‘बड़े चेहरे’?
पुलिस की रडार पर अब कई और संदिग्ध नाम हैं। मंदिर की सुरक्षा और दानपात्र की निगरानी के सिस्टम में हुई चूक पर भी सवाल उठ रहे हैं। अयोध्या के प्रबुद्ध नागरिक अब मांग कर रहे हैं कि दान की पाई-पाई का हिसाब हो और इस ‘पाप’ में शामिल हर उस चेहरे को बेनकाब किया जाए, जिसने मर्यादा पुरुषोत्तम के दरबार में आस्था के साथ खिलवाड़ किया है।
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