इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज ऑलराउंडर बेन स्टोक्स (Ben Stokes) द्वारा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहे जाने के बाद क्रिकेट जगत में भूचाल आ गया है। स्टोक्स ने न्यूजीलैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज के तीसरे मैच के दौरान अचानक संन्यास का ऐलान कर दिया।
स्टोक्स के इस हैरान करने वाले फैसले और विशेषकर इसकी टाइमिंग (घोषणा के समय) को लेकर इंग्लैंड के ही पूर्व कप्तान और 100 टेस्ट मैच खेलने वाले कद्दावर खिलाड़ी एंड्रयू स्ट्रॉस (Andrew Strauss) बुरी तरह भड़क गए हैं। स्ट्रॉस ने स्टोक्स की आलोचना करते हुए कहा कि जब टीम मैदान पर सीरीज बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी, तब स्टोक्स के इस कदम ने पूरी टीम का ध्यान भटकाने का काम किया।
चाय ब्रेक से 15 मिनट पहले संन्यास, अगले ही दिन शर्मनाक हार
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन चाय के विश्राम (Tea Break) से महज 15 मिनट पहले बेन स्टोक्स ने अचानक इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी।
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सीरीज में करारी हार: कप्तान के इस अचानक फैसले का असर टीम के मनोबल पर साफ देखा गया। इंग्लैंड की टीम मुकाबले के पांचवें दिन सोमवार को 160 रनों से मैच हार गई।
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न्यूजीलैंड ने मारी बाजी: इसी हार के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की यह टेस्ट सीरीज 1-2 से गंवा दी।
“मैच से पहले या बाद में बताते, बीच मैच में ध्यान भटकाया” — एंड्रयू स्ट्रॉस
फॉक्स स्पोर्ट्स पर बात करते हुए इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एंड्रयू स्ट्रॉस ने बेन स्टोक्स के इस फैसले की टाइमिंग पर तीखा हमला बोला।
स्ट्रॉस ने कहा:
“यह सच है कि हर खिलाड़ी को अपनी शर्तों पर क्रिकेट को अलविदा कहने का पूरा हक है। और बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड क्रिकेट के लिए जो किया है, उसकी बदौलत उन्होंने यह हक सबसे ज्यादा कमाया है। लेकिन, संन्यास की घोषणा करने का एक सही तरीका होता है— यह काम या तो मैच शुरू होने से पहले किया जाना चाहिए था या मैच खत्म होने के बाद। जब आप एक लाइव टेस्ट मैच के बीच में होते हैं, तो सिर्फ और सिर्फ टीम का प्रदर्शन मायने रखता है। स्टोक्स के इस फैसले ने उस टीम का ध्यान पूरी तरह भटका दिया, जो सीरीज में हार से बचने के लिए मैदान पर जूझ रही थी। यह समझदारी भरा तरीका नहीं था।”
नाइटक्लब कंट्रोवर्सी और विवादों से घिरे रहे स्टोक्स
35 वर्षीय बेन स्टोक्स का यह संन्यास का फैसला पिछले कुछ हफ्तों में हुई कई विवादित घटनाओं के बाद आया है:
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लॉर्ड्स टेस्ट में जीत: उन्होंने लॉर्ड्स में खेले गए पहले टेस्ट में इंग्लैंड को शानदार जीत दिलाई थी।
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नाइटक्लब विवाद: पहले मैच की जीत के बाद स्टोक्स अपने एक साथी खिलाड़ी के साथ बाहर गए थे, जहां एक नाइटक्लब में कथित तौर पर इंग्लैंड की सुरक्षा टीम के एक सदस्य को रग्बी खिलाड़ी ने पीट दिया था।
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टीम से ड्रॉप: अनुबंध (Contract) की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण स्टोक्स को सजा के तौर पर दूसरे टेस्ट मैच से बाहर बैठना पड़ा था।
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तीसरे मैच में वापसी: जांच पूरी होने के बाद उन्होंने तीसरे टेस्ट में वापसी की। स्टोक्स ने खुद माना कि इन ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ घटनाओं ने उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने के फैसले में एक बड़ी भूमिका निभाई है।
कोच ब्रेंडन मैकुलम ने की थी मनाने की कोशिश
इंग्लैंड के मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम ने स्काई स्पोर्ट्स से बात करते हुए एक बड़ा खुलासा किया। मैकुलम ने बताया कि जब स्टोक्स ने उन्हें संन्यास के फैसले के बारे में बताया, तो उन्होंने स्टोक्स को मनाने और फैसले पर दोबारा विचार करने का काफी आग्रह किया था।
मैकुलम ने कहा, “मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की थी, लेकिन तब तक वह अपना मन पूरी तरह बना चुके थे और अपने फैसले पर अडिग थे। उनके जाने से मैं बेहद उदास हूँ क्योंकि पिछले चार सालों से ‘बैज़बॉल’ (Bazball) के इस रोमांचक सफर में हम दोनों साथ रहे हैं। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे उनके जैसे महान खिलाड़ी के साथ काम करने का मौका मिला, वह मेरे एक सच्चे दोस्त हैं।”
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