नई दिल्ली : हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई-लिखाई में अव्वल आए और उसका मन हमेशा नई चीजें सीखने में लगे। इसके लिए वे अच्छे से अच्छे स्कूल और ट्यूशन का इंतजाम भी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार कड़ी मेहनत और सुख-सुविधाओं के बावजूद बच्चों का मन पढ़ाई से उचटने लगता है?
वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण बच्चों के स्कूल बैग में मौजूद वास्तु दोष हो सकता है। स्कूल बैग में अनजाने में रखी गई कुछ गलत और नकारात्मक चीजें सीधे तौर पर बच्चे की एकाग्रता (Concentration) और पॉजिटिव एनर्जी को प्रभावित करती हैं, जिससे उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता और वे मानसिक रूप से उलझे रहते हैं। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार बच्चों के स्कूल बैग में कौन सी 5 चीजें भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए।
बच्चों के स्कूल बैग से तुरंत हटा दें ये 5 चीजें
1. टूटे हुए पेन और पेंसिल
अक्सर बच्चे कटी-फटी या छोटी हो चुकी पेंसिल और बिना ढक्कन के टूटे हुए पेन बैग में ही छोड़ देते हैं। वास्तु नियमों के अनुसार, टूटे हुए लेखन उपकरण बैग में रखने से बच्चों की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और उनका मन पढ़ाई करते समय बार-बार भटकता है। इसलिए बैग में हमेशा सही और चालू हालत के पेन-पेंसिल ही रखें।
2. फटी हुई कॉपियां और पुराने रद्दी कागज
कई बार बच्चे पुरानी क्लास के नोट्स, फटे हुए पन्ने या स्कूल से मिले रद्दी सर्कुलर बैग के कोनों में दबाकर रख देते हैं। वास्तु शास्त्र कहता है कि फटी हुई किताबें-कॉपियां और बिना वजह के कागज जमा होने से बैग में राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है, जिससे बच्चे के दिमाग में उलझन और तनाव पैदा होता है।
3. खुली हुई नुकीली चीजें (कटर और कंपास)
स्कूल प्रोजेक्ट या गणित के लिए बच्चे अक्सर कटर, कैंची या कंपास (डिवाइडर) का इस्तेमाल करते हैं। इन नुकीली चीजों को कभी भी बैग में खुला नहीं छोड़ना चाहिए। वास्तु के अनुसार, खुली हुई नुकीली वस्तुएं सीधे तौर पर एग्रेसन (गुस्से) और नकारात्मक ऊर्जा को जन्म देती हैं। इन्हें हमेशा एक सुरक्षित पेंसिल बॉक्स या पाउच के अंदर ही बंद करके रखें।
4. टॉफी-चिप्स के खाली रैपर्स और कचरा
बच्चे अक्सर स्कूल में लंच के समय खाई गई चीजों जैसे चिप्स, बिस्किट या टॉफी के खाली रैपर्स डस्टबिन में फेंकने के बजाय बैग की जेब में डाल लेते हैं। बैग के अंदर इस तरह का कचरा और गंदगी जमा होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह पूरी तरह रुक जाता है, जो बच्चे की सेहत और बुद्धिमत्ता दोनों के लिए नुकसानदेह है।
5. डरावने चित्र और अजीबोगरीब डिजाइन वाले स्टिकर्स
आजकल बाजार में कार्टून के नाम पर कई तरह के भूतिया, डरावने या हिंसक चित्रों वाले पेंसिल बॉक्स, बैग और स्टिकर्स मिलते हैं। वास्तु के अनुसार, बच्चों की चीजों पर ऐसे डार्क और हिंसक डिजाइन उनके अवचेतन मन (Subconscious Mind) पर गहरा और बुरा असर डालते हैं। बच्चों के लिए हमेशा चमकीले, शांत और पॉजिटिव डिजाइन वाली स्टेशनरी का ही चुनाव करें।
एकाग्रता और बुद्धिमत्ता बढ़ाने के लिए करें ये 2 आसान वास्तु उपाय
यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे का मन पढ़ाई में लगे और उसकी याददाश्त तेज हो, तो वास्तु शास्त्र में बताए गए ये सरल उपाय जरूर आजमाएं:
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मोरपंख का जादुई असर: बच्चे के स्कूल बैग की मुख्य जेब में एक साफ और सुंदर मोरपंख रख दें। मोरपंख को मां सरस्वती का प्रतीक माना जाता है, जो बच्चों के आसपास से हर तरह की नजर दोष और नकारात्मकता को दूर रखता है।
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चंदन का टुकड़ा: बच्चे के पेंसिल बॉक्स में चंदन की लकड़ी का एक छोटा सा टुकड़ा रख दें। चंदन की सुगंध से बच्चे का मानसिक तनाव कम होता है, दिमाग शांत रहता है और पढ़ाई के प्रति उसकी रुचि बढ़ती है।
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