
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से शुरू हुआ अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार भीड़-तंत्र को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। इसके बाद, इस साल फरवरी 2026 में जब तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सरकार बनाई, तो हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को पूर्ण सुरक्षा मुहैया कराने का बड़ा वादा किया गया था। खुद तारिक रहमान ने आश्वस्त किया था कि नए बांग्लादेश में सभी धर्मों के लोग सुरक्षित रहेंगे।
हालांकि, एक हालिया जमीनी रिपोर्ट ने इन सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार, सत्ता परिवर्तन के बाद भी बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और डराने-धमकाने का दौर बदस्तूर जारी है।
‘सनातनी फाउंडेशन’ की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
बांग्लादेशी अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ‘सनातनी फाउंडेशन’ द्वारा जारी एक विस्तृत रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नई सरकार के आने के बाद भी हिंदू समुदाय के खिलाफ सुनियोजित हिंसा हो रही है। रिपोर्ट में तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह से लेकर 30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों का सिलसिलेवार विश्लेषण किया गया है, जिसके अनुसार इस छोटी सी अवधि में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कुल 111 गंभीर घटनाएं दर्ज की गई हैं।
हत्या, लूट और जमीन कब्जाने के डरावने आंकड़े
रिपोर्ट के विश्लेषण से साफ है कि नई सरकार भी जमीनी स्तर पर कट्टरपंथियों और उपद्रवियों को रोकने में नाकाम रही है। इन 111 मामलों में हुए अपराधों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
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हत्याएं: हिंदू समुदाय के खिलाफ हुए अपराधों में सबसे बड़ा और डरावना हिस्सा हत्याओं का है। इस दौरान 24 अल्पसंख्यकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
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लूट और चोरी: दर्ज मामलों में से 19 फीसदी मामले डकैती, लूट और चोरी के हैं।
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जमीन कब्जाना: कुल 16 ऐसे मामले सामने आए हैं जहां हिंदू परिवारों की कीमती संपत्तियों और खेती की जमीनों पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है।
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धार्मिक स्थलों पर हमले: हिंसा के दौरान अंधाधुंध फायरिंग के साथ-साथ 3 प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों (मंदिरों) और प्रतीकों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया।
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गंभीर यौन अपराध: महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामलों में 2 रेप केसेस भी सामने आए हैं। हाल ही में एक दिव्यांग हिंदू महिला को कीर्तन कार्यक्रम से अगवा कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वीभत्स घटना ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।
सुनियोजित पैटर्न के तहत हिंदुओं को किया जा रहा टारगेट
सनातनी फाउंडेशन की रिपोर्ट में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि यह हिंसा अब केवल छिटपुट नहीं, बल्कि एक सुनियोजित पैटर्न (Patterned Violence) का रूप ले चुकी है:
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सांप्रदायिक रंग देना: ग्रामीण इलाकों में होने वाले किन्हीं भी सामान्य स्थानीय या व्यक्तिगत विवादों को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दे दिया जाता है, ताकि भीड़ को इकट्ठा कर हिंदू परिवारों को निशाना बनाया जा सके।
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पलायन के लिए मजबूर करना: सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अल्पसंख्यक परिवारों को लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, ताकि वे डर के मारे अपने पुश्तैनी घर और जमीनें छोड़कर पलायन करने पर मजबूर हो जाएं।
भारत का सख्त रुख: “टारगेटेड किलिंग्स छिटपुट घटनाएं नहीं”
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे इन अत्याचारों को लेकर भारत सरकार शुरू से ही बेहद सख्त और संवेदनशील रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अंतरराष्ट्रीय मंचों और द्विपक्षीय बातचीत में इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
भारत ने बांग्लादेश की वर्तमान सरकार को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे बहुसंख्यक भीड़-तंत्र पर लगाम लगाएं और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इससे पहले जब यूनुस सरकार ने इन हमलों को ‘छिटपुट राजनीतिक घटनाएं’ बताकर खारिज करने की कोशिश की थी, तब भी भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोहराया था कि मासूमों की चुन-चुनकर की जा रही हत्याओं (Targeted Killings) को किसी भी सूरत में महज ‘छिटपुट घटना’ का नाम देकर दबाया नहीं जा सकता।
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