आज से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ, 23 जुलाई तक 10 महाविद्याओं की होगी महासाधना, गृहस्थ ऐसे उठाएं लाभ

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में सालभर में कुल चार नवरात्रि आते हैं, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि को सामान्य रूप से सभी गृहस्थ धूमधाम से मनाते हैं। वहीं, माघ और आषाढ़ मास में आने वाले नवरात्रि को ‘गुप्त नवरात्रि’ कहा जाता है, जिसका आध्यात्मिक और तांत्रिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आज 15 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन महापर्व का समापन महानवमी के साथ होगा। तांत्रिक ग्रंथों, जैसे ‘मेरु तंत्र’ और ‘डामर तंत्र’ में इन नौ दिनों को विशेष गुप्त सिद्धियों और साधना के लिए सबसे उत्तम समय बताया गया है।

तांत्रिकों और साधकों के लिए क्यों बेहद खास है गुप्त नवरात्रि?

सामान्य नवरात्रि में जहां मां दुर्गा के नौ सौम्य स्वरूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी आदि) की सार्वजनिक पूजा-अर्चना की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि के दौरान ब्रह्मांड की सर्वोच्च दस शक्तियों यानी ‘दस महाविद्याओं’ की आराधना का विधान है। यह समय मुख्य रूप से तंत्र-मंत्र और अघोर साधना से जुड़े तांत्रिक साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान की जाने वाली साधना को पूरी तरह गोपनीय (गुप्त) रखा जाता है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। हालांकि, आम गृहस्थ भी नियम, संयम और अटूट श्रद्धा के साथ मां की सामान्य पूजा और यज्ञ-हवन कर आध्यात्मिक लाभ उठा सकते हैं।

कौन सी हैं मां दुर्गा की 10 महाविद्याएं?

गुप्त नवरात्रि में जिन दस महाशक्तियों की गुप्त रूप से साधना की जाती है, उनके नाम नीचे दी गई तालिका में क्रमबद्ध हैं:

क्रम दस महाविद्याओं के नाम धार्मिक व तांत्रिक मान्यता
1. मां काली शत्रुओं के नाश और काल से रक्षा करने वाली आदि शक्ति
2. तारा देवी घोर संकटों से तारने वाली और वाक-सिद्धि देने वाली देवी
3. षोडषी (त्रिपुर सुंदरी) परम सौंदर्य, आनंद और मोक्ष प्रदान करने वाली महाशक्ति
4. भुवनेश्वरी पूरे ब्रह्मांड और सृष्टि का संचालन करने वाली जगन्माता
5. भैरवी भय का नाश करने वाली और साधक को निडर बनाने वाली मां
6. छिन्नमस्ता तीव्र चेतना और इच्छाशक्ति की प्रतीक तांत्रिक देवी
7. धूमावती संकटों, दरिद्रता और दुखों को हरने वाला स्वरूप
8. बगलामुखी वाक-शक्ति देने वाली और विरोधियों को परास्त करने वाली शक्ति
9. मातंगी कला, संगीत, बुद्धि और गृहस्थ सुख की प्रदाता देवी
10. कमला देवी धन, ऐश्वर्य, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री महालक्ष्मी

आम गृहस्थ भक्त इन नौ दिनों में कैसे करें पूजा?

यदि आप तांत्रिक साधना नहीं करते हैं, तो आपको कठिन नियमों में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। सामान्य भक्तों को इन नौ दिनों में मां दुर्गा के पारंपरिक नौ स्वरूपों (मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) की ही भक्ति करनी चाहिए। गुप्त नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम मां के सामने घी का दीपक जलाएं, लाल फूल अर्पित करें और नियमित रूप से ‘दुर्गा सप्तशती’ या ‘दुर्गा चालीसा’ का पाठ करें। कई भक्त इन नौ दिनों का उपवास (व्रत) भी रखते हैं, जिससे शारीरिक शुद्धि और मानसिक शांति मिलती है।

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