अगस्त या सितंबर कब है कौशिकी अमावस्या? जानें व्रत की सटीक तारीख, स्नान-दान का महामुहूर्त और 3 अचूक उपाय

नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या को ‘कौशिकी अमावस्या’ (Kaushiki Amavasya) कहा जाता है। इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में कुशोत्पाटिनी अमावस्या, कुशग्रहणी अमावस्या, पिठोरी अमावस्या या भाद्रपद अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन तिथि पर पूरे वर्ष के धार्मिक एवं मांगलिक कार्यों के लिए पवित्र ‘कुश’ (एक विशेष घास) को उखाड़कर संचित करने की परंपरा है। तंत्र साधना की दृष्टि से पश्चिम बंगाल के बीरभूम स्थित विश्व प्रसिद्ध तारापीठ मंदिर में इस दिन मां तारा की महापूजा का विशेष विधान है। आइए जानते हैं इस साल कौशिकी अमावस्या अगस्त में है या सितंबर में, और क्या हैं इसके शुभ मुहूर्त।

कौशिकी (भाद्रपद) अमावस्या 2026 की सटीक तारीख

साल 2026 में कौशिकी अमावस्या सितंबर के महीने में पड़ रही है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026, गुरुवार को सुबह 07 बजकर 03 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो अगले दिन यानी 11 सितंबर 2026 को सुबह 05 बजकर 26 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। शास्त्रों में वर्णित उदया तिथि और प्रदोष काल की धार्मिक मान्यताओं के आधार पर कौशिकी अमावस्या का मुख्य व्रत, स्नान-दान और पूजन 10 सितंबर 2026, गुरुवार को ही किया जाएगा।

सिद्ध और साध्य योग के महासंयोग में स्नान-दान के शुभ मुहूर्त

इस बार भाद्रपद अमावस्या पर ‘सिद्ध योग’ और ‘साध्य योग’ का एक अत्यंत दुर्लभ और कल्याणकारी संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों योगों को बेहद शुभ माना गया है, जिनमें किए गए तर्पण, स्नान और दान का फल कभी नष्ट नहीं होता। इस दिन पूजन और पवित्र स्नान के प्रमुख मुहूर्त नीचे दिए गए हैं:

  • स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05 बजकर 51 मिनट से सुबह 06 बजकर 36 मिनट तक। (पवित्र नदी स्नान के लिए सर्वोत्तम)

  • अमृत काल (विशेष शुभ समय): सुबह 08 बजकर 17 मिनट से सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक।

  • अभिजित मुहूर्त (महामुहूर्त): दोपहर 01 बजकर 21 मिनट से दोपहर 02 बजकर 13 मिनट तक।

  • पिठोरी अमावस्या व्रत प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: रात 08 बजकर 14 मिनट से रात 10 बजकर 28 मिनट तक। (कुल अवधि: 2 घंटे 13 मिनट)

कौशिकी अमावस्या व्रत के लाभ और नियम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक भाद्रपद अमावस्या का विधि-विधान से व्रत रखते हैं, उन्हें गंभीर मानसिक तनाव और अज्ञात भय से परमानेंट मुक्ति मिलती है। इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कृत्यों का विवरण और उनके लाभ नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट हैं:

धार्मिक कृत्य और नियम प्राप्त होने वाला फल व महत्व
पवित्र नदी में स्नान और तर्पण कुंडली में मौजूद भयंकर पितृ दोष दूर होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है तथा अन्न के भंडार भरे रहते हैं।
प्रदोष काल में लक्ष्मी-नारायण पूजन आर्थिक तंगहाली और कंगाली दूर होती है तथा व्यापार में बड़ा मुनाफा होता है।

पितृ दोष मुक्ति और धन लाभ के लिए अवश्य करें ये 3 उपाय

यदि आपके बनते हुए काम बार-बार बिगड़ जाते हैं या घर में हमेशा कलह का माहौल रहता है, तो कौशिकी अमावस्या के दिन ये ज्योतिषीय उपाय जरूर अपनाएं:

  • पीपल वृक्ष की पूजा: अमावस्या के दिन सुबह के समय पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और काले तिल मिलाकर अर्पित करें। शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं, इससे पितर बेहद प्रसन्न होते हैं।

  • ब्राह्मण भोज और दान: अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किसी योग्य ब्राह्मण या असहाय व्यक्ति को आदरपूर्वक सात्विक भोजन कराएं और सामर्थ्य के अनुसार सफेद रंग की वस्तुओं (जैसे चावल, चीनी, वस्त्र) का दान करें।

  • ईशान कोण में घी का दीपक: शाम के समय अपने घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में गाय के शुद्ध घी का एक मुखी दीपक जलाएं। दीपक की बत्ती में रुई की जगह लाल कलावा (मौली) का प्रयोग करें। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी आकर्षित होती हैं और घर में धन का आगमन तेजी से होता है।

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