नई दिल्ली/अध्यात्म डेस्क: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे ‘अपरा एकादशी’ या ‘अचला एकादशी’ के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष 13 मई 2026 को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि यह न केवल अनजाने में हुए पापों का नाश करती है, बल्कि अपार धन और कीर्ति की प्राप्ति भी कराती है। इस दिन भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी जी की विशेष पूजा का विधान है, जिससे दरिद्रता को हमेशा के लिए घर से निकाला जा सकता है।
अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 मई 2026 को दोपहर 2:52 बजे होगा और इसका समापन 13 मई 2026 को दोपहर 1:29 बजे होगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत और पूजन 13 मई को ही करना शास्त्र सम्मत है। इस दिन तुलसी पूजन से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
तुलसी पूजन की प्रामाणिक विधि
अपरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। श्री हरि के भोग के लिए तुलसी दल (पत्ते) का प्रयोग अवश्य करें, लेकिन ध्यान रहे कि ये पत्ते एकादशी को नहीं, बल्कि एक दिन पहले (दशमी) को ही तोड़ लिए जाएं।
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तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक जलाएं।
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तुलसी की 5, 7 या 11 बार परिक्रमा करें।
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परिक्रमा के दौरान ‘ॐ तुलस्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।
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अंत में आरती उतारकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
आर्थिक तंगी दूर करने का ‘केसर’ वाला गुप्त उपाय
यदि आप लंबे समय से पैसों की तंगी या कर्ज से परेशान हैं, तो अपरा एकादशी पर एक छोटा सा उपाय जरूर करें। इस दिन तुलसी के पौधे में थोड़ा सा केसर अर्पित करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, केसर मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। तुलसी में केसर चढ़ाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और आय के नए स्रोत खुलते हैं। इसके साथ ही ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
भूलकर भी न करें ये गलतियां, लग सकता है दोष
एकादशी के दिन तुलसी पूजन के कुछ सख्त नियम हैं, जिनका पालन न करने पर पुण्य के बजाय पाप लग सकता है:
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जल न चढ़ाएं: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी माता स्वयं भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उन्हें जल अर्पित न करें।
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पत्ते न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना महापाप माना गया है।
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शुद्धता का रखें ध्यान: तुलसी के पास गंदगी, जूते-चप्पल या जूठे बर्तन न रखें।
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वस्त्रों का चुनाव: पूजा के समय काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
अपरा एकादशी व्रत का फल
अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को ब्रह्म हत्या, परनिंदा और झूठ बोलने जैसे घोर पापों से मुक्ति मिलती है। जो भक्त इस दिन तुलसी जी की सेवा और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उन्हें मृत्यु के पश्चात उत्तम लोक की प्राप्ति होती है और पृथ्वी पर रहते हुए वे सुख-साधन और वैभव से परिपूर्ण रहते हैं।
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