ईरान में ‘ज्वालामुखी’ बना Gen Z: युद्ध की आहट के बीच खामेनेई के खिलाफ सड़कों पर छात्र, ‘तानाशाह की मौत’ के नारों से दहला तेहरान

तेहरान: मिडिल ईस्ट में मचे भारी घमासान के बीच ईरान एक बार फिर आंतरिक विद्रोह की आग में झुलस रहा है। एक तरफ सीमा पर अमेरिकी हमले का साया मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान की युवा पीढ़ी (Gen Z) ने अयातुल्लाह अली खामेनेई की सत्ता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिसंबर की हिंसक क्रांति के 40 दिन बाद, शनिवार से तेहरान और मशहद समेत कई प्रमुख शहरों में छात्रों का सैलाब उमड़ पड़ा है। ‘शरीफ टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी’ से लेकर ‘अमीर कबीर यूनिवर्सिटी’ तक, हर तरफ ‘तानाशाह की मौत’ और ‘आजादी’ के नारे गूंज रहे हैं।

शोक सभाएं बनीं विरोध का मंच, सुरक्षाबलों से सीधी भिड़ंत

विरोध प्रदर्शनों का यह नया दौर जनवरी में हुई घातक हिंसा के 40 दिन पूरे होने पर आयोजित शोक सभाओं के बाद भड़का है। बता दें कि पिछली हिंसा में करीब 3100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर थी। इन शहीदों को याद करने जुटे छात्र देखते ही देखते उग्र हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छात्र सुरक्षाबलों के सामने ‘बी शराफ’ (शर्मनाक) के नारे लगाते दिख रहे हैं। तेहरान की सड़कों पर सरकार समर्थकों और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हिंसक झड़पें भी हुई हैं, जिससे हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं।

अमेरिका की सैन्य घेराबंदी और परमाणु विवाद ने बढ़ाई बेचैनी

ईरान में यह अशांति ऐसे समय में पैदा हुई है जब क्षेत्र में युद्ध के बादल घने हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सीमा के पास दो विशाल विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers) तैनात कर दिए हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगले 10 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ईरान के साथ समझौता होगा या अमेरिका ‘सीमित सैन्य हमला’ करेगा। अमेरिका और यूरोपीय देशों को अंदेशा है कि ईरान गोपनीय तरीके से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। इसी बाहरी हमले के खौफ और आर्थिक बदहाली ने ईरानी युवाओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

यूनिवर्सिटी कैंपस बने विद्रोह के केंद्र, मशहद से तेहरान तक ललकार

ईरान के नॉर्थ-ईस्ट शहर मशहद में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहाँ छात्रों ने ‘स्टूडेंट्स, अपने अधिकारों के लिए चिल्लाओ’ के नारों के साथ बड़ी रैलियां निकालीं। शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी में छात्रों ने धरना दे दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार बाहरी खतरे का डर दिखाकर घरेलू आवाजों को दबाना चाहती है। हालांकि, ईरानी प्रशासन ने अभी तक गिरफ्तारियों का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं।

दोहरी चुनौती में फंसी खामेनेई सरकार

ईरान सरकार इस वक्त दोहरी चुनौती से जूझ रही है। एक ओर उसे परमाणु समझौते को बचाने और अमेरिकी हमले को टालने की कूटनीतिक जंग लड़नी है, तो दूसरी ओर घर के भीतर भड़के इस युवा विद्रोह को शांत करना है। जानकारों का मानना है कि यदि रविवार को प्रस्तावित रैलियां और बड़ी होती हैं, तो ईरान में सत्ता के खिलाफ यह अब तक का सबसे बड़ा नागरिक आंदोलन बन सकता है।

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