भारत और पाकिस्तान के बीच जमी बर्फ को पिघलाने और कूटनीतिक रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए एक बड़ी नागरिक पहल शुरू हुई है। दोनों देशों की 100 से अधिक जानी-मानी हस्तियों ने एक साझा मंच पर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को एक संयुक्त पत्र भेजा है। लेकिन इस शांति पहल के बीच, सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर पाकिस्तान के एक अंतरराष्ट्रीय बयान पर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
117 वैश्विक हस्तियों की साझा कूटनीतिक अपील
‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ नामक संगठन की कूटनीतिक पहल पर दोनों देशों के कुल 117 गणमान्य नागरिकों ने एक साझा पत्र पर डिजिटल हस्ताक्षर किए हैं। इस पत्र के जरिए दोनों देशों के नेतृत्व से मांग की गई है कि वे आपसी तनाव को कम कर बातचीत का दौर दोबारा शुरू करें।
पत्र में उठाई गई मुख्य मांगें:
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दिल्ली और इस्लामाबाद में पूर्णकालिक उच्चायुक्तों (High Commissioners) की दोबारा नियुक्ति की जाए।
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आम नागरिकों के लिए वीज़ा सेवाओं को सामान्य बनाया जाए और बंद पड़े हवाई क्षेत्रों (Airspace) को खोला जाए।
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धार्मिक व सांस्कृतिक यात्राओं को बढ़ावा मिले और जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर संवाद बहाल हो।
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साल 2004-2007 के बीच चली व्यापक शांति वार्ता (Composite Dialogue) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
शांति पत्र पर भारत-पाकिस्तान के इन बड़े नामों के दस्तखत
इस साझा शांति पत्र को दोनों देशों के प्रमुख राजनेताओं, पूर्व राजनयिकों और बुद्धिजीवियों का समर्थन मिला है:
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भारत की ओर से (61 हस्ताक्षर): नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला, हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारुक, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, आरजेडी सांसद मनोज झा और हुमायूं कबीर सहित 61 प्रमुख लोग शामिल हैं।
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पाकिस्तान की ओर से (56 हस्ताक्षर): पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व वरिष्ठ राजनयिक अशरफ जहांगीर काज़ी, नेशनल असेंबली के सदस्य इस्फनयार भंडारा और मशहूर परमाणु वैज्ञानिक परवेज़ हूदभॉय समेत 56 हस्तियों ने दस्तखत किए हैं।
‘सिंधु नदी भारत से जाती है…’ – टीएमसी सांसद सौगत रॉय का करारा पलटवार
एक तरफ जहां शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर दिए गए एक बयान पर ममता बनर्जी के करीबी और टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कड़ा और तीखा पलटवार किया है।
सौगत रॉय ने साफ लफ्जों में कहा कि पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक और सैन्य ताकत को हमेशा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। उन्होंने पाकिस्तान को भूगोल याद दिलाते हुए चेतावनी दी कि सिंधु नदी भारत के हिस्से से होकर ही पाकिस्तान में प्रवेश करती है। इसलिए, जब भी पाकिस्तान की तरफ से सीमा पर या कूटनीतिक मंचों पर शत्रुतापूर्ण रवैया दिखाया जाएगा, भारत सिंधु जल के मुद्दे पर कड़े और सख्त कदम उठाने से कभी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की किसी भी गीदड़भभकी से भारत की राष्ट्रीय नीति पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।
दोहरी कूटनीतिक चुनौती के बीच फंसा भारत-पाक रिश्ता
TMC सांसद का यह बयान यह साफ जाहिर करता है कि भारत के भीतर पाकिस्तान को लेकर एक कड़ा राजनीतिक आमसहमति (Political Consensus) का माहौल है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि भले ही दोनों देशों के नागरिक समाज और कुछ कड़े शांति संगठन संबंध सुधारने की वकालत कर रहे हों, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा, जल-बंटवारे और राष्ट्रीय हितों की आती है, तो भारत की राजनीतिक पार्टियां किसी भी कूटनीतिक ढिलाई के मूड में नहीं हैं। सुरक्षा और जल-सतर्कता की यह दोहरी चुनौती भारत-पाकिस्तान संबंधों के भविष्य को तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।
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