‘हारे का सहारा’ कहे जाने वाले बाबा खाटू श्याम के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद खास है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर (Khatu Shyam Mandir) में निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर दो दिवसीय भव्य मेले की शुरुआत हो चुकी है। देश-दुनिया से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शनों के लिए खाटू धाम पहुंच रहे हैं।
भक्तों की इस अपार भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने व्यापक स्तर पर विशेष इंतजाम किए हैं।
24 घंटे खुले रहेंगे बाबा के कपाट, रींगस रूट पर वाहनों की नो-एंट्री
निर्जला एकादशी मेले के दौरान सबसे बड़ी सहूलियत यह दी गई है कि इन दो दिनों में बाबा श्याम के दर्शन 24 घंटे चालू रहेंगे, ताकि कोई भी भक्त बिना दर्शन के न लौटे।
प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के लिए ये कदम उठाए गए हैं:
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रूट डायवर्जन: पैदल यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर रींगस से खाटू धाम आने वाले मार्ग पर किसी भी प्रकार के वाहनों (Vehicles) की एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
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फाल्गुन मेले जैसी सुरक्षा: इस मेले की व्यवस्था ठीक वैसी ही की गई है जैसी फाल्गुन मास में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध ‘लक्खी मेले’ (रंगभरी एकादशी) के दौरान की जाती है। चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल और वालंटियर्स तैनात हैं।
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विशेष अलौकिक श्रृंगार: निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम का बेहद खास और आकर्षक श्रृंगार किया जा रहा है। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों से विशेष फूल और ड्राई फ्रूट्स (मेवे) मंगवाए गए हैं।
995 साल पुराना है श्याम कुंड का इतिहास
धार्मिक मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, आज से लगभग 995 वर्ष पहले एकादशी (ग्यारस) के दिन ही बाबा श्याम का पवित्र शीश प्रसिद्ध ‘श्यामकुंड’ से प्रकट हुआ था। इसके बाद देवशयनी एकादशी के दिन यहां मंदिर की स्थापना कर शीश को सुशोभित किया गया था। श्याम कुंड के समीप स्थित ऐतिहासिक पीपल का पेड़ आज भी श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र बना हुआ है।
अनेक भक्त एकादशी का कठिन निर्जला व्रत रखकर खाटू धाम पहुंचते हैं और द्वादशी के दिन बाबा के दर्शन व पारण के बाद ही अपनी यात्रा पूर्ण करते हैं।
कौन हैं बाबा खाटू श्याम? जानें उनकी महिमा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, खाटू श्याम जी महाभारत काल के महान योद्धा और भीम के पौत्र (घटोत्कच के पुत्र) बर्बरीक (Barbarik) हैं।
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सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर: उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धरों में से एक माना जाता है, जिनसे ऊपर केवल मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का स्थान आता है। उनके पास ऐसे तीन बाण थे जिनसे वे पूरी सृष्टि का अंत कर सकते थे।
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हारे का सहारा: महाभारत युद्ध के समय उनकी माता ने उन्हें सीख दी थी कि ‘जो पक्ष हार रहा हो, तुम उसका साथ देना’।
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शीश का दानी: युद्ध का परिणाम न बदले, इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धरकर बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक के इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में तुम्हें मेरे ही नाम ‘श्याम’ से पूजा जाएगा और तुम ‘हारे का सहारा’ कहलाओगे।
विशेष: जहां निर्जला एकादशी पर उनका शीश प्रकट होने का उत्सव मनाया जाता है, वहीं खाटू श्याम बाबा का मुख्य जन्मोत्सव हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी को बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
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