पंजाब की सियासत में एक बार फिर जबरदस्त भूचाल आ गया है। कभी आम आदमी पार्टी (AAP) में रहते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सबसे करीबी सिपहसालार और रणनीतिकार रहे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब अपनी ही पुरानी पार्टी के मुखिया के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। कुछ समय पहले ही आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाले राघव चड्ढा ने गुरुवार (25 जून) को मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सिखों के पवित्र गुरुओं का अपमान करने और एक वायरल वीडियो को छुपाने के लिए ‘फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट’ तैयार करवाने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। चड्ढा ने मान से तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे और उनके खिलाफ राज्य के नए सख्त बेअदबी कानून के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
“असली बेअदबी छिपाने के लिए बनाई गई 10 लाख की फर्जी रिपोर्ट”
समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से विशेष बातचीत के दौरान भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने भगवंत मान सरकार को आड़े हाथों लिया। चड्ढा ने कहा, “अगर देश या पंजाब में किसी को भी जरा सा भी भ्रम था कि वह बेअदबी वाला वीडियो असली है, नकली है या एआई (AI) द्वारा निर्मित है, तो अब उनका सारा शक दूर हो चुका है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी ने सच को दबाने के लिए सरकारी रसूख का इस्तेमाल कर एक नई फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई। इस शर्मनाक हरकत से पूरा सिख समाज और गुरु नानक नामलेवा समुदाय बेहद आहत और गुस्से में है।”
फर्जी रिपोर्ट के लिए पैसा कहां से आया? मनी लॉन्ड्रिंग जांच की मांग
राघव चड्ढा ने इस पूरे मामले में वित्तीय धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए कई तीखे सवाल दागे। उन्होंने मांग की, “इस बात की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए कि आखिर इस फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट को तैयार करने का आदेश किसने दिया? इसके लिए 10 लाख रुपये की मोटी रकम कहां से आई? क्या इसमें पंजाब की जनता की गाढ़ी कमाई (सरकारी खजाने) का इस्तेमाल हुआ या किसी निजी धन का? इसमें कौन-कौन से बड़े अधिकारी शामिल थे? इस पूरे फर्जीवाड़े की मनी लॉन्ड्रिंग (ED) के एंगल से भी जांच होनी चाहिए।”
क्या है पूरा ‘बेअदबी वीडियो’ विवाद?
यह पूरा विवाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कथित वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शुरू हुआ। इस वीडियो में कथित तौर पर मान शराब के नशे में सिखों के गुरुओं और धार्मिक मर्यादाओं की बेअदबी करते नजर आ रहे थे। वीडियो सामने आते ही सिख समाज की सर्वोच्च संस्था ‘अकाल तख्त’ ने इसका कड़ा संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए।
शुरुआत में मुख्यमंत्री मान और उनकी सरकार ने इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक से बना वीडियो बताकर पल्ला झाड़ लिया। लेकिन जब अकाल तख्त ने स्वतंत्र जांच कराई, तो सामने आया कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है और वह पूरी तरह असली है। इसके बाद ‘आप’ की तरफ से डैमेज कंट्रोल करते हुए नया बयान आया कि वीडियो तो असली है, लेकिन उसमें दिख रहा शख्स भगवंत मान नहीं, बल्कि कोई और है।
गुरुग्राम पुलिस की रेड और गिरफ्तारी से खुली पोल
यह मामला उस वक्त पूरी तरह पलट गया और पंजाब सरकार बैकफुट पर आ गई, जब हरियाणा की गुरुग्राम पुलिस ने इसी वीडियो की एक मनगढ़ंत और फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट (जिसमें वीडियो को फेक बताया गया था) तैयार करने के आरोप में दो जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिसिया पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि पंजाब से आए कुछ रसूखदार अधिकारियों ने उन्हें इस वीडियो को ‘फेक’ प्रमाणित करने के बदले 10 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। गुरुग्राम पुलिस ने अब उन पंजाब के अधिकारियों को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है, जिससे भगवंत मान की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
“मैं बेकसूर हूं, वह मेरी तरह दिखने वाला कोई एक्टर है”— भगवंत मान
चारों तरफ से घिरे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक वीडियो संदेश जारी कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है। उन्होंने विपक्ष पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा, “विपक्ष के पास जब मेरे खिलाफ कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बचता, तो वे मुझे बदनाम करने के लिए धर्म का सहारा लेते हैं और मेरे फर्जी वीडियो वायरल करते हैं। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि उस वीडियो में मैं नहीं हूं, बल्कि वह मेरी ही तरह दिखने वाला (हमशक्ल) कोई अभिनेता है। यह मुझे और मेरी सरकार को अस्थिर करने की एक गहरी साजिश है।”
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