
अखबारों और सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें बेहद आम हो चुकी हैं कि 30 से 40 वर्ष की आयु का एक पूरी तरह फिट दिखने वाला युवक, जो रोज जिम जाता है और अच्छी डाइट लेता है, उसे अचानक दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ जाता है. इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात तब सामने आती है जब मरीज की लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल मिलती है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अगर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) जमा नहीं था, तो आखिर दिल की धड़कनें अचानक क्यों रुक गईं?
चिकित्सा विशेषज्ञों और कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, इस अदृश्य खतरे के पीछे ‘लिपोप्रोटीन(ए)’ यानी Lp(a) नाम का एक छिपा हुआ आनुवंशिक दुश्मन है. यह एक ऐसा खतरनाक मार्कर है जो हमारे रूटीन ब्लड टेस्ट में कभी पकड़ में नहीं आता और चुपचाप अंदर ही अंदर हृदय रोग की नींव रखता जाता है.
क्या है लिपोप्रोटीन(ए) और यह एलडीएल से कितना अलग है?
सरल शब्दों में कहें तो लिपोप्रोटीन(ए) कोलेस्ट्रॉल का एक बेहद जटिल और गाढ़ा कण है. यह संरचना में हमारे सामान्य खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) जैसा ही होता है, लेकिन इसके ऊपर एक विशेष प्रोटीन की परत चढ़ी होती है, जो इसे एलडीएल से कहीं अधिक चिपचिपा और घातक बना देती है.
इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जहां सामान्य कोलेस्ट्रॉल को हम खराब खानपान और सुस्त जीवनशैली की देन मानते हैं, वहीं एलपी(ए) पूरी तरह से आनुवंशिक (Genetic) होता है. यह जन्म से ही हमारे डीएनए (DNA) में तय हो जाता है. यही वजह है कि बेहतरीन डाइट, योग और नियमित हैवी वर्कआउट करने के बावजूद भी शरीर में इसका स्तर कम नहीं होता. चिकित्सा शोधों के मुताबिक, दुनिया की अन्य आबादी की तुलना में भारतीयों के शरीर में इस जेनेटिक मार्कर का स्तर स्वाभाविक रूप से काफी अधिक पाया जाता है.
भारतीयों को पश्चिमी देशों के मुकाबले 15 साल पहले क्यों आ रहा है हार्ट अटैक?
भारतीय अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड से आ रहे आंकड़े बेहद डराने वाले हैं. भारत में युवाओं को अपने पश्चिमी समकक्षों (Western Countries) की तुलना में लगभग 10 से 15 साल पहले दिल का दौरा पड़ रहा है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) सहित कई वैश्विक शोधों से यह साफ हो चुका है कि युवाओं में बिना किसी पुराने लक्षण के अचानक आने वाले इन गंभीर हार्ट अटैक्स के पीछे बढ़ा हुआ एलपी(ए) स्तर ही सबसे मुख्य कारक है. यह धमनियों में जाकर बहुत तेजी से ब्लॉकेज (Plaque) बनाता है और खून के थक्के (Clots) जमने की रफ्तार को बढ़ा देता है, जिससे खून का दौरा अचानक रुक जाता है.
जब कोई जादुई दवा नहीं, तो इस साइलेंट किलर से खुद को कैसे बचाएं?
कड़वा सच यह है कि वर्तमान चिकित्सा विज्ञान में एलपी(ए) के स्तर को सीधे तौर पर कम करने के लिए कोई अचूक दवा, जादुई गोली या विशेष डाइट चार्ट मौजूद नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इससे बचा नहीं जा सकता. सही समय पर सही जानकारी ही इस बीमारी के खिलाफ आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है.
हृदय रोग विशेषज्ञ इस छिपे हुए खतरे से निपटने के लिए दो मुख्य रणनीतियां सुझाते हैं:
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करवाएं स्पेशल Lp(a) ब्लड टेस्ट: यदि आपके परिवार में (माता-पिता, दादा-दादी, भाई-बहन) किसी को भी 60 वर्ष की उम्र से पहले दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक या दिल से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी हुई है, तो आपको बिना देर किए अपने कार्डियोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए. डॉक्टर की सलाह पर रूटीन लिपिड प्रोफाइल के अलावा विशेष रूप से Lp(a) रक्त परीक्षण करवाएं. यह टेस्ट जीवन में सिर्फ एक बार कराना ही पर्याप्त होता है क्योंकि इसका स्तर उम्र के साथ बदलता नहीं है.
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अन्य रिस्क फैक्टर्स पर कड़ा पहरा: यदि जांच में आपका एलपी(ए) स्तर हाई निकलता है, तो पैनिक होने के बजाय अलर्ट हो जाएं. ऐसी स्थिति में डॉक्टर आपके समग्र जोखिम (Overall Risk) को कम करने के लिए अन्य सभी ट्रिगर्स को सख्ती से नियंत्रित करने की सलाह देंगे. जैसे- अपने सामान्य एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को दवाओं के जरिए बेहद निचले स्तर पर लाना, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज (Uric Acid व शुगर) को पूरी तरह कंट्रोल रखना, वजन को संतुलित करना और धूम्रपान से 100% दूरी बना लेना. जब अन्य सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तो बढ़ा हुआ एलपी(ए) भी दिल को आसानी से नुकसान नहीं पहुंचा पाता.
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