आज ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की बेहद पवित्र और दुर्लभ तिथि है, जिसे ‘विभुवन संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है। इस बार की संकष्टी चतुर्थी इसलिए बेहद खास और कल्याणकारी मानी जा रही है क्योंकि आज शुभ और शुक्ल योग का एक बहुत ही सुंदर और दुर्लभ संयोग बन रहा है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, अधिक मास में आने वाली संकष्टी चतुर्थी पर व्रत, दान, जप और विघ्नहर्ता गणेश जी की आराधना करने से भक्तों के जीवन के सभी कष्ट चुटकियों में दूर हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
क्या आज पूजा में विघ्न डालेगी भद्रा? जानिए सच
आज के दिन को लेकर कई लोगों के मन में भद्रा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार, आज सुबह 08:12 बजे से लेकर रात 09:21 बजे तक भद्रा रहने वाली है। लेकिन आपको घबराने या चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार, भद्रा का पृथ्वी पर असर होगा या नहीं, यह चंद्रमा की राशि पर निर्भर करता है। आज चंद्रमा धनु राशि में गोचर कर रहे हैं, जिसके कारण इस भद्रा का वास स्वर्ग या पाताल में रहेगा। पृथ्वी पर इसका कोई प्रभाव नहीं होगा, इसलिए आप बिना किसी डर या संशय के बप्पा की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
आज रात कब होगा चंद्रोदय? नोट करें सटीक समय
संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक रात में चंद्रमा को अर्घ्य न दे दिया जाए। आज यानी 3 जून को चंद्रोदय (Moonrise Time) का समय रात 10:04 बजे रहेगा। चंद्रमा के उदय होने के बाद उन्हें जल, दूध और चंदन मिलाकर अर्घ्य दें, इसके बाद ही अपने व्रत का पारण (व्रत खोलना) करें।
दिन और रात के सबसे श्रेष्ठ पूजा मुहूर्त
आज पूरे दिन कई शुभ चौघड़िया और योग बन रहे हैं, जिनमें पूजा करना सर्वोत्तम रहेगा:
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अमृत (सर्वोत्तम मुहूर्त): सुबह 07:07 ए एम से 08:51 ए एम
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शुभ (उत्तम मुहूर्त): सुबह 10:35 ए एम से 12:19 पी एम
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गोधूलि (संध्या काल): शाम 07:14 पी एम से 07:34 पी एम
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रात का अमृत मुहूर्त: रात 09:47 पी एम से 11:03 पी एम
(नोट: आज दिन में कोई भी अभिजित मुहूर्त नहीं है।)
स्टेप-बाय-स्टेप समझें विभुवन संकष्टी की पूजा विधि
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अभिषेक: सबसे पहले सुबह या शाम के शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा का गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें।
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श्रृंगार: बप्पा को पीले या लाल वस्त्र अर्पित करें। उन्हें पीला चंदन, अक्षत, धूप, दीप और ताजे फूल (संभव हो तो गेंदे के फूल) चढ़ाएं।
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कथा और मंत्र: चौकी के सामने बैठकर विभुवन संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ करें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
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आरती और अर्घ्य: घी का दीपक जलाकर पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की आरती गाएं। रात को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें और अंत में भूलचूक के लिए क्षमा याचना करें।
सुख-समृद्धि के लिए आज जरूर करें यह खास उपाय
यदि आपके जीवन में लगातार परेशानियां आ रही हैं या धन की तंगी बनी हुई है, तो आज विभुवन संकष्टी के मौके पर भगवान गणेश को नारियल के लड्डुओं का भोग अवश्य लगाएं। नारियल को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और लड्डू बप्पा को बेहद प्रिय हैं। आज के दिन इस विशेष चीज का भोग लगाने से गजानन आपके रास्ते में आने वाले सभी विघ्नों को हर लेंगे और आपको अटूट सुख-समृद्धि का वरदान देंगे।
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