अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ऐतिहासिक तीन दिवसीय चीन यात्रा संपन्न होने के तुरंत बाद वाशिंगटन और बीजिंग के गलियारों से बड़ी कूटनीतिक बयानबाजी सामने आई है। ईरान के साथ जारी भीषण तनाव और युद्ध के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बेहद कड़ा और दोटूक बयान जारी किया है। विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट किया है कि ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका को चीन की किसी भी प्रकार की सहायता या मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने उन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि बीजिंग में हुई हाई-लेवल मीटिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से इस संकट से निपटने के लिए कोई मदद मांगी है।
‘ईरान भ्रम में न रहे, किसी भी कीमत पर नहीं मिलेगी कोई छूट’
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेहरान का नेतृत्व यह सोच रहा है कि मौजूदा सैन्य संकट के बीच अमेरिका किसी भी प्रकार के समझौते के लिए उन्हें कोई छूट (रिलैक्सेशन) देने वाला है, तो यह उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल होगी। रुबियो ने अमेरिका के पुराने और कड़े रुख को दोहराते हुए कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने दिया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के वैश्विक संकट पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ईरान को इस मुगालते या भ्रम में बिल्कुल नहीं रहना चाहिए कि वह अपनी सैन्य ताकत के बल पर होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापारिक जलमार्ग पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लेगा। विदेश मंत्री ने साफ किया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, लेकिन अमेरिका राष्ट्रीय हितों और वैश्विक सुरक्षा को दांव पर लगाकर ईरान के साथ कोई भी कमजोर या खराब डील (Bad Deal) नहीं करेगा।
चीनी राष्ट्रपति से क्या हुई बात? डोनाल्ड ट्रंप ने खुद किया खुलासा
इस कड़े बयान से ठीक पहले खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अपनी उच्च स्तरीय वार्ता के कुछ अंश साझा किए थे। ट्रंप ने बताया था कि उनकी शी जिनपिंग के साथ सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई है, जिसमें चीन इस बात पर सहमत हुआ है कि वह इस युद्ध के दौरान ईरान को किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सैन्य सहायता (Military Support) मुहैया नहीं कराएगा।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलमार्ग को लेकर ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति भी इस अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन को पूरी तरह से खुला और सुरक्षित देखना पसंद करेंगे, क्योंकि चीन का अपना व्यापार भी इसी मार्ग पर निर्भर है। ट्रंप ने भरोसा दिलाया कि यदि इस वैश्विक संकट को सुलझाने और समुद्री मार्ग को सुरक्षित बहाल करने में अमेरिका कोई रचनात्मक भूमिका निभा सकता है, तो वह इसके लिए जरूर आगे आएगा। वहीं दूसरी तरफ, चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में भी वैश्विक समुदाय के हित का हवाला देते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन्स को जल्द से जल्द पूरी तरह से खोले जाने की वकालत की गई है।
झोंगनानहाई में हुई गोपनीय बैठक, 9 साल बाद हुआ यह ऐतिहासिक दौरा
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को चीन की अपनी बेहद संवेदनशील और तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पूरी कर बीजिंग से वाशिंगटन के लिए रवाना हो गए। लगभग 9 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का यह पहला चीन दौरा था। इससे पहले साल 2017 में भी खुद डोनाल्ड ट्रंप ही चीन की यात्रा करने वाले आखिरी अमेरिकी राष्ट्रपति थे।
बीजिंग से उड़ान भरने से ठीक पहले दोनों वैश्विक महाशक्तियों के नेताओं ने कड़ी सुरक्षा वाले चीनी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास ‘झोंगनानहाई’ (Zhongnanhai) के भीतर एक अत्यंत गोपनीय और लंबी निजी बैठक की थी। इस कूटनीतिक यात्रा के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ईरान युद्ध, मध्य पूर्व के हालात, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और दोनों देशों के बीच जारी व्यापार असंतुलन सहित कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कई दौर की गहन समीक्षा वार्ता हुई।
आपसी विश्वास बढ़ाने पर सहमति, पर अविश्वास की खाई अभी भी गहरी
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अनुसार, इस महामुलाकात के दौरान चीन और अमेरिका कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी संचार (Communication) बनाए रखने और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं। चीनी नेता ने आधिकारिक मंच से कहा कि यह हाई-प्रोफाइल यात्रा दोनों महाशक्तियों के बीच आपसी समझ को विकसित करने, पारस्परिक विश्वास को गहरा करने और दोनों देशों के नागरिकों के कल्याण में सुधार लाने के दृष्टिकोण से बेहद लाभदायक सिद्ध होगी।
वाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस निजी बैठक के दौरान शी जिनपिंग से कहा कि वह भविष्य में भी दोनों देशों के बीच इसी प्रकार का ईमानदार, सीधा और गहन संवाद बनाए रखने के इच्छुक हैं। उन्होंने झोंगनानहाई परिसर में मिले विशेष निमंत्रण और भव्य स्वागत के लिए चीनी नेतृत्व का आभार भी प्रकट किया। हालांकि, यात्रा समाप्त होते ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय के तीखे तेवरों से साफ है कि कूटनीतिक शिष्टाचार के पीछे दोनों देशों के बीच ईरान और सुरक्षा रणनीतियों को लेकर अविश्वास की खाई अभी भी उतनी ही गहरी है।
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