नई दिल्ली, “कोमल है कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है…” ये पंक्तियाँ आज भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सच साबित हो रही हैं। 8 मार्च को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो महिला सशक्तिकरण की नई गाथा लिख रही है। कभी पुरुषों का गढ़ माने जाने वाले नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर अब महिलाएं न केवल मोर्चा संभाल रही हैं, बल्कि अपनी कार्यकुशलता से सबको हैरान कर रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देश भर के 1140 से अधिक टोल प्लाजा पर 5100 से अधिक महिलाएं दिन की शिफ्ट में मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रही हैं।
जोखिम भरे काम में दिखाई हिम्मत: हजारों गाड़ियों के बीच निभा रहीं जिम्मेदारी
टोल प्लाजा पर नौकरी करना कोई आसान काम नहीं है। हर रोज गुजरने वाली हजारों गाड़ियों का शोर, प्रदूषण और कभी-कभी यात्रियों का उग्र व्यवहार—इन सबके बीच अपनी जिम्मेदारी निभाना एक बड़ी चुनौती है। NHAI ने स्पष्ट किया है कि टोल संचालन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य ‘जेंडर इंक्लूसिविटी’ (लैंगिक समावेशिता) और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। फ्रंटलाइन भूमिकाओं में महिलाओं के आने से न केवल टोल संचालन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि यात्रियों के अनुभव में भी सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है।
मंत्रालय की बड़ी पहल: ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह ऐतिहासिक निर्णय विभिन्न हितधारकों जैसे नेशनल हाईवे बिल्डर फेडरेशन (NHBF) और हाईवे ऑपरेटर्स एसोसिएशन (HOAI) के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि सभी टोल ऑपरेटर अब दिन की पाली (Day Shift) में महिला कर्मचारियों की तैनाती के लिए सहमत हो गए हैं। आने वाले समय में यह संख्या और भी बढ़ेगी। खास बात यह है कि NHAI अब तैनात महिला कर्मचारियों, विशेषकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाओं के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित करेगा, ताकि वे तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बन सकें।
IT सेक्टर से लेकर हाईवे तक: हर क्षेत्र में नारी शक्ति का लोहा
आज के दौर में खेल का मैदान हो या अंतरिक्ष की उड़ान, महिलाएं हर जगह अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। टोल प्लाजा पर उनकी बढ़ती मौजूदगी यह बताती है कि वे अब पारंपरिक नौकरियों से बाहर निकलकर जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण कार्यों को चुनने से नहीं कतरा रही हैं। पीआईबी (PIB) द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, सरकार का लक्ष्य टोल संचालन को पूरी तरह से सुरक्षित और समावेशी बनाना है, जहां महिलाएं आत्मविश्वास के साथ काम कर सकें।
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