भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए पश्चिमी यूपी की कमान नोएडा के कद्दावर और वरिष्ठ नेता नवाब सिंह नागर को सौंपी है। नवाब सिंह नागर को पश्चिमी क्षेत्र का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राजनीतिक गलियारों और रणनीतिकारों का मानना है कि नवाब सिंह नागर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़ा गुर्जर कार्ड खेला है। इस क्षेत्र के चुनावी और सामाजिक समीकरणों में गुर्जर बिरादरी की भूमिका बेहद निर्णायक मानी जाती है, जिसे साधने के लिए बीजेपी ने अपने इस सबसे पुराने और भरोसेमंद चेहरे पर दांव लगाया है।
RSS के स्वयंसेवक से क्षेत्रीय अध्यक्ष बनने तक का सफर
नवाब सिंह नागर का सियासी सफर बेहद जमीनी और संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने कॉलेज के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के माध्यम से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी।
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शुरुआती दौर: 1980 के दशक के मध्य में जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ, तभी वे भाजपा में शामिल हो गए। वे नोएडा में पार्टी के पहले मंडल अध्यक्ष भी बनाए गए थे।
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दादरी से विधायक: नवाब सिंह नागर ने महज 21-22 साल की उम्र में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वे वर्ष 1996 से 2007 तक दादरी विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए।
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पहला चुनाव: उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1993 में दादरी सीट से भाजपा के टिकट पर लड़ा था, लेकिन तब उन्हें समीर भाटी से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी वे मैदान में डटे रहे और बाद के चुनावों में लगातार जीत दर्ज की।
सरकार और संगठन में संभाल चुके हैं बड़े पद
नवाब सिंह नागर न सिर्फ एक जमीनी नेता हैं, बल्कि सरकार और संगठन चलाने का उनके पास लंबा अनुभव है। वे उत्तर प्रदेश सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे लाल बहादुर शास्त्री गन्ना विकास बोर्ड के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त) और यूपी बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें बीजेपी किसान मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। वे लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में पार्टी के प्रमुख गुर्जर चेहरा और बड़े रणनीतिकार माने जाते हैं।
पश्चिम यूपी में क्यों अहम है यह ‘गुर्जर कार्ड’?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती है। आगामी चुनावों और विपक्षी गठबंधन के ‘पीडीए’ फार्मूले की काट तैयार करने के लिए बीजेपी को इस क्षेत्र में एक ऐसे मजबूत पिछड़े नेता की जरूरत थी, जिसकी स्वीकार्यता सर्वसमाज में हो। नवाब सिंह नागर की गुर्जर समुदाय के साथ-साथ किसानों और स्थानीय लोगों के बीच गहरी पैठ है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बागपत, मेरठ और बुलंदशहर जैसे जिलों में गुर्जर वोट बैंक सीधे तौर पर हार-जीत तय करता है। नागर की इस नई नियुक्ति से न केवल नोएडा बल्कि पूरे पश्चिमी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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