
भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी शांत, सौम्य और आध्यात्मिक अदाकारी से करोड़ों दर्शकों के दिलों में भगवान का दर्जा पाने वाले 86 वर्षीय दिग्गज अभिनेता सुधीर दलवी पिछले दिनों जिंदगी और मौत के बीच एक अत्यंत कठिन दौर से गुजरे हैं। साल 1977 में रिलीज हुई मनोज कुमार की ऐतिहासिक फिल्म ‘शिरडी के साईं बाबा’ में साईं बाबा का अमर और जीवंत किरदार निभाकर घर-घर में पूजे जाने वाले सुधीर दलवी को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के चलते मुंबई के एक निजी अस्पताल के सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) में भर्ती कराया गया था। वृद्धावस्था की बीमारियों और संक्रमण के चलते उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। इस गंभीर बीमारी के दौरान उनके परिवार के सामने उस वक्त एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया जब आईसीयू और विशेषज्ञ इलाज का बिल कई लाख रुपये तक पहुंच गया और परिवार के पास उस बिल का भुगतान करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं बची थी।
जब सिनेमा के इस बुजुर्ग फनकार की बदहाली और अस्पताल में फंसे होने की सूचना फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में पहुंची, तो बॉलीवुड के मौजूदा दौर के तीन बड़े सुपरस्टार—अक्षय कुमार, रणबीर कपूर और कार्तिक आर्यन बिना किसी दिखावे या प्रचार के चुपचाप देवदूत बनकर सामने आए। इन तीनों अभिनेताओं ने आगे बढ़कर न केवल अस्पताल के लाखों रुपये के भारी-भरकम मेडिकल बिलों का तुरंत भुगतान सुनिश्चित कराया, बल्कि वरिष्ठ अभिनेता के आगे के उपचार और दवाइयों के लिए भी समुचित आर्थिक सुरक्षा का प्रबंध किया। चकाचौंध से भरी मायानगरी के इस मानवीय चेहरे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भले ही समय के साथ सिनेमा की दुनिया बदल गई हो, लेकिन अपने बुजुर्ग और मार्गदर्शक कलाकारों के सम्मान व रक्षा का जज्बा आज के सितारों में पूरी शिद्दत के साथ जिंदा है।
जब पर्दे पर उतरे ‘साईं बाबा’: सुधीर दलवी का वह किरदार जो अमर हो गया
सिनेमा के इतिहास में ऐसे बहुत कम अभिनेता हुए हैं जिनकी ऑन-स्क्रीन छवि इतनी प्रभावशाली रही हो कि लोग उन्हें वास्तविक जीवन में भी किसी संत या देवदूत की तरह पूजने लगें। सुधीर दलवी ने जब मनोज कुमार द्वारा निर्मित और विजय शर्मा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘शिरडी के साईं बाबा’ में फकीर का चोला ओढ़ा, तो उनके चेहरे का तेज, शांत आंखें और करुणामयी मुस्कान दर्शकों के जेहन में हमेशा के लिए चस्पां हो गई। उस दौर में जब सिनेमाघरों में यह फिल्म चलती थी, तो लोग स्क्रीन पर सिक्के फेंकते थे और हाथ जोड़कर श्रद्धा से खड़े हो जाते थे। सुधीर दलवी ने उस किरदार को महज अभिनय की कसौटियों पर नहीं गढ़ा था, बल्कि उन्होंने अपने संपूर्ण व्यक्तित्व को उस आध्यात्मिक ऊर्जा में विलीन कर दिया था।
सिर्फ साईं बाबा ही नहीं, रामानंद सागर के कालजयी धारावाहिक ‘रामायण’ में प्रभु श्रीराम के कुलगुरु ‘महर्षि वशिष्ठ’ का आदरणीय किरदार निभाकर भी सुधीर दलवी ने भारतीय जनमानस पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। इसके अलावा उन्होंने बी.आर. चोपड़ा की महाभारत, श्याम बेनेगल की ‘भारत एक खोज’, और रामानंद सागर के ही धारावाहिक ‘श्रीकृष्णा’ में भी कई ऐतिहासिक और पौराणिक भूमिकाएं पूरी शालीनता से निभाईं। ‘जुनून’, ‘अर्पण’, और टेलीविजन धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में बापूजी के किरदार तक, उनके करीब पांच दशकों के अभिनय करियर में मर्यादा और शालीनता हमेशा उनके काम का पर्याय बनी रही।
पाई-पाई को मोहताज हुआ परिवार: आईसीयू का बढ़ता बिल बन गया था भारी पहाड़
उम्र के 86वें पड़ाव पर पहुंचे सुधीर दलवी पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय अभिनय से पूरी तरह दूर थे और मुंबई के उपनगरीय इलाके में अपने परिवार के साथ बेहद सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक जमाने में सिनेमा को अपनी पूरी जवानी और प्रतिभा समर्पित करने के बावजूद उस दौर में कलाकारों को आज जैसी मोटी फीस या रॉयल्टी नहीं मिलती थी। वर्षों की जमा-पूंजी और बचत पिछले कई सालों में नियमित दवाइयों और रोजमर्रा के खर्चों में धीरे-धीरे समाप्त हो चुकी थी।
हाल ही में जब उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ, फेफड़ों में संक्रमण और मल्टी-ऑर्गन कमजोरी के चलते आपातकालीन स्थिति में अस्पताल के आईसीयू में दाखिल कराया गया, तो जांच, वेंटिलेटर सपोर्ट, विशेष इंजेक्शन और दैनिक बेड चार्ज के चलते बिल तेजी से लाखों रुपये के पार पहुंच गया। अस्पताल प्रशासन द्वारा बकाया चुकाने के तकादों के बीच परिवार पूरी तरह लाचार हो चुका था। परिवार ने अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किए, रिश्तेदारों से संपर्क साधा, लेकिन आईसीयू के भारी खर्च के सामने सब कुछ नाकाफी साबित हो रहा था। स्थिति यह आ गई थी कि यदि तुरंत बिल की व्यवस्था न होती, तो आगे का क्रिटिकल केयर ट्रीटमेंट बाधित होने का खतरा मंडराने लगा था।
अक्षय, रणबीर और कार्तिक की मूक दरियादिली: बिना शोर किए संभाला पूरा जिम्मा
इस विकट संकट की घड़ी में जब सुधीर दलवी की गंभीर हालत और आर्थिक तंगी की जानकारी फिल्म इंडस्ट्री के आंतरिक संपर्कों और कुछ वरिष्ठ सहयोगियों के माध्यम से बाहर आई, तो अक्षय कुमार को सबसे पहले इस बात की भनक लगी। हमेशा मुसीबत में फंसे लोगों और बुजुर्ग तकनीशियनों व कलाकारों की मदद के लिए सबसे आगे रहने वाले अक्षय कुमार ने बिना एक पल गंवाए सीधे अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया और बिल का एक बड़ा हिस्सा तुरंत क्लियर कराया।
अक्षय कुमार की इस पहल के साथ ही युवा पीढ़ी के सुपरस्टार रणबीर कपूर और कार्तिक आर्यन भी इस नेक मिशन में कूद पड़े। रणबीर कपूर और कार्तिक आर्यन ने परिवार से अत्यंत आदरपूर्वक संपर्क कर उन्हें ढांढस बंधाया और अस्पताल के शेष बिलों व आगामी उपचार की राशि को सीधे अपने खातों से ट्रांसफर करवा दिया। इन तीनों ही अभिनेताओं की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि उन्होंने इस पूरी मदद को पूरी तरह गोपनीय और मूक बनाए रखा। किसी ने भी अपनी पीआर टीम के जरिए इसका कोई प्रचार नहीं किया और न ही सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट डाली। यह मदद विशुद्ध रूप से एक वरिष्ठ फनकार के प्रति कृतज्ञता और मानवीय संवेदना के तहत की गई थी।
बुजुर्ग कलाकारों की बदहाली और सुरक्षा का सवाल: बॉलीवुड के सामने आई कड़वी सच्चाई
सुधीर दलवी की इस स्थिति ने एक बार फिर मनोरंजन जगत के उस काले सच को उजागर कर दिया है, जिससे हर कुछ महीनों बाद कोई न कोई दिग्गज कलाकार जूझता नजर आता है। जब तक कोई सितारा पर्दे पर चमकता है, तब तक उसके इर्द-गिर्द मेला लगा रहता है, लेकिन जैसे ही उम्र ढलती है और कैमरे की रोशनी मद्धम पड़ती है, व्यवस्था उन्हें लावारिस छोड़ देती है।
सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) और अन्य संबंधित संस्थाएं लगातार यह मांग उठाती रही हैं कि फिल्म उद्योग में एक ऐसा अनिवार्य पेंशन, मेडिकल इंश्योरेंस और रॉयल्टी फंड बनाया जाना चाहिए, जो उन सभी कलाकारों को आजीवन स्वास्थ्य सुरक्षा दे सके जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दर्शकों के मनोरंजन में खपा दी। हॉलीवुड और यूरोपीय सिनेमा में वरिष्ठ कलाकारों के लिए व्यापक रॉयल्टी और रिटायरमेंट हेल्थकेयर सिस्टम अनिवार्य होता है, लेकिन भारतीय सिनेमा में आज भी बुजुर्ग कलाकार अपनी अंतिम सांसों के समय निजी दान या साथी कलाकारों की व्यक्तिगत दया पर निर्भर रहने को विवश हैं।
सेहत में सुधार और परिवार ने जताया आभार: दुआओं का असर आया नजर
अक्षय कुमार, रणबीर कपूर और कार्तिक आर्यन की समय पर मिली इस बड़ी वित्तीय मदद और डॉक्टरों की निरंतर देखभाल के चलते सुधीर दलवी के स्वास्थ्य में अब उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। डॉक्टरों ने उन्हें क्रिटिकल स्टेज से बाहर आने के बाद आईसीयू से निकालकर सामान्य निगरानी वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। संक्रमण की स्थिति काफी हद तक नियंत्रित है और वे धीरे-धीरे बातचीत करने की स्थिति में आ रहे हैं।
वरिष्ठ अभिनेता के परिजनों ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से उन तीनों अभिनेताओं के प्रति अपनी असीम कृतज्ञता व्यक्त की है। परिवार का कहना है कि जिस समय उनके चारों तरफ केवल अंधेरा और लाचारी नजर आ रही थी, उस समय इन सितारों ने जिस विनम्रता और तत्परता से अपनी बाहें फैलाईं, उसे वे जीवनभर नहीं भूल सकते। देश भर में फैले सुधीर दलवी के लाखों चाहने वाले और साईं भक्त भी सोशल मीडिया पर अपने प्रिय अभिनेता के दीर्घायु होने की प्रार्थना कर रहे हैं और बॉलीवुड के इन तीनों नायकों की दरियादिली की खुले दिल से सराहना कर रहे हैं।
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