‘लूजर, तानाशाह और स्कूल का गुंडा…’, ट्रंप से सीधे भिड़े कनाडा के डग फोर्ड; 50% टैरिफ विवाद में भड़की आर-पार की जंग

दुनिया की दो सबसे बड़ी और परस्पर जुड़ी अर्थव्यवस्थाओं, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से सुलग रहा व्यापारिक विवाद (Trade War) अब व्यक्तिगत हमलों और खुली धमकियों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कनाडाई ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 50 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद कनाडा के सबसे बड़े प्रांत ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड आगबबूला हो गए हैं। हैमिल्टन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फोर्ड ने ट्रंप के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक रुख अपनाते हुए उन्हें ‘लूजर’, ‘तानाशाह’ और ‘स्कूल का बुली (गुंडा)’ तक कह डाला। इस तीखी बयानबाजी ने दोनों देशों के बीच दशकों पुराने कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को अभूतपूर्व तनाव के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

‘लूजर’, ‘तानाशाह’ और ‘स्कूल का गुंडा’: डग फोर्ड का ट्रंप पर सीधा हमला

प्रेस वार्ता के दौरान डग फोर्ड ने ट्रंप की आर्थिक नीतियों और धमकियों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप एक ऐसे स्कूली गुंडे की तरह हैं जो एक दिन आपका लंच का पैसा छीनता है, अगले दिन टोपी उतार लेता है और फिर आपके जूते तक चुरा लेता है। फोर्ड ने साफ शब्दों में कहा कि वह ट्रंप जैसे किसी तानाशाह या ‘किंग ऑफ बैंकरप्सी’ (दिवालियापन के बादशाह) से कोई सलाह या हुक्म नहीं लेने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति की खुद की जनता और उद्योगपति उनकी नीतियों से तंग आ चुके हैं और आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में उन्हें इसका करारा जवाब मिलेगा। फोर्ड ने यहां तक कह दिया कि ट्रंप अगर यह सोचते हैं कि वे कनाडा को दबा लेंगे, तो यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमी है, क्योंकि कनाडा अपनी संप्रभुता और आर्थिक स्वाभिमान की रक्षा के लिए हर हद पार करने को तैयार है।

ट्रंप की 50% टैरिफ की धमकी और ‘लेक अमेरिका’ का विवादित शिगूफा

इस पूरे विवाद की ताजा चिंगारी तब भड़की जब वाशिंगटन और ओटावा के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता अचानक टूट गई। कनाडाई वार्ताकारों के वापस लौटने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर तीखा पोस्ट करते हुए कनाडा पर अमेरिकी किसानों और कंपनियों को ‘लूटने’ का आरोप लगाया। ट्रंप ने धमकी दी कि 1 जनवरी 2027 से कनाडाई कारों, ट्रकों और स्टील पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लागू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही ट्रंप ने कनाडा के नेतृत्व को ‘लाइन में आने’ की चेतावनी दी। अपनी इस आक्रामकता को और बढ़ाते हुए ट्रंप ने ओंटारियो के प्रीमियर का मजाक उड़ाया और सीमावर्ती ऐतिहासिक झील ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने का विवादित विचार उछाल दिया। ट्रंप के इस अड़ियल रुख ने कनाडाई नेतृत्व और जनता दोनों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

ओंटारियो का आर्थिक महत्व और ऑटो सेक्टर पर गहरा संकट

डग फोर्ड का यह गुस्सा बेवजह नहीं है, क्योंकि ओंटारियो कनाडा के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और ऑटोमोबाइल उद्योग का दिल माना जाता है। जनरल मोटर्स, फोर्ड और स्टेलेंटिस जैसी वैश्विक ऑटो कंपनियों के विशाल संयंत्र ओंटारियो में ही स्थित हैं। उत्तर अमेरिकी ऑटोमोबाइल उद्योग इतना गहराई से आपस में जुड़ा हुआ है कि एक कार को अंतिम रूप से तैयार करने से पहले उसके कलपुर्जे छह से सात बार अमेरिका और कनाडा की सीमा को पार करते हैं। यदि 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू होता है, तो इससे केवल कनाडा के मजदूर ही प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि अमेरिका के डेट्रायट, मिशिगन और ओहियो के ऑटो कारखाने भी कच्चे माल और पार्ट्स की कमी से ठप पड़ जाएंगे। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से दोनों देशों में लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और गाड़ियों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।

‘सब कुछ टेबल पर है’: बिजली और क्रिटिकल मिनरल्स रोकने की सीधी चेतावनी

अमेरिकी धमकियों के सामने झुकने के बजाय डग फोर्ड ने अमेरिका की कमजोर नस पर हाथ रख दिया है। फोर्ड ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ट्रंप ने आर्थिक युद्ध को आगे बढ़ाया, तो ओंटारियो से अमेरिका को होने वाले दुर्लभ खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), निकल, लिथियम और यूरेनियम के निर्यात को पूरी तरह रोक दिया जाएगा। इतना ही नहीं, फोर्ड ने अमेरिका को बिजली आपूर्ति ठप करने का विकल्प भी खुला रखा है। ओंटारियो वर्तमान में अमेरिका के मिशिगन, न्यूयॉर्क और मिनेसोटा राज्यों के लगभग 15 लाख घरों और उद्योगों को स्वच्छ जलविद्युत की आपूर्ति करता है। यदि कनाडा ने बिजली ग्रिड की आपूर्ति रोकी, तो अमेरिकी सीमावर्ती राज्यों में भारी ऊर्जा संकट और ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो सकती है।

कनाडा के 700 अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ और आर्थिक जंग का विस्तार

डग फोर्ड के आक्रामक रुख को कनाडा की संघीय सरकार का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। कनाडाई नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका के किसी भी अनुचित दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेंगे और ‘ईंट का जवाब पत्थर से’ देंगे। कनाडा सरकार ने 700 से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर 15%, 25% और 50% की दर से जवाबी टैरिफ (Counter-Tariffs) लगाने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इनमें अमेरिकी स्टील, एल्युमिनियम, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेयरी उत्पाद, फर्नीचर, वस्त्र और उपभोक्ता सामान शामिल हैं। इसके साथ ही कनाडा ने अपने प्रभावित घरेलू उद्योगों और श्रमिकों को इस आर्थिक झटके से बचाने के लिए 7.5 बिलियन कनाडाई डॉलर (लगभग 5.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के विशेष राहत पैकेज का भी ऐलान किया है।

क्या बातचीत की मेज पर लौटेंगे दोनों पड़ोसी या बढ़ेगा संकट?

तीखी बयानबाजी के बाद हालांकि कूटनीतिक स्तर पर तनाव को थोड़ा कम करने की सुगबुगाहट भी शुरू हुई है। अमेरिकी समाचार चैनलों पर दिए इंटरव्यू में डग फोर्ड ने स्वीकार किया कि चीजें बहुत व्यक्तिगत और गर्म हो गई थीं, लेकिन इसका मकसद दोनों देशों के लोगों के लिए एक निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यापार समझौता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि युद्ध से किसी का भला नहीं होता और दोनों पक्षों को अहंकार छोड़कर दोबारा बातचीत की मेज पर आना चाहिए। बहरहाल, ट्रंप के आक्रामक आर्थिक राष्ट्रवाद और कनाडा के कड़े प्रतिरोध के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों सहयोगी देश किसी समझौते पर पहुंचते हैं या फिर यह टैरिफ वॉर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त करने वाले एक बड़े आर्थिक संकट में तब्दील हो जाता है।

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