कौन हैं 3 नेशनल अवॉर्ड्स जीत चुकीं डायरेक्टर गीतू मोहनदास? 50 लाख की फिल्म से ऑस्कर तक पहुंचीं, अब यश की 500 करोड़ी ‘टॉक्सिक’ से हिलाएंगी बॉक्स ऑफिस

भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी किसी 500 करोड़ी महा-बजट और हाई-ऑक्टेन गैंगस्टर एक्शन फिल्म की कल्पना की जाती है, तो आम तौर पर दिमाग में बड़े कमर्शियल और मसाला फिल्मों के पुरुष निर्देशकों के नाम आते हैं। लेकिन ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ की ऐतिहासिक सफलता के बाद पूरे चार साल का लंबा ब्रेक लेकर जब ‘रॉकिंग स्टार’ यश ने अपने अगले प्रोजेक्ट ‘टॉक्सिक: अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ (Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups) का ऐलान किया, तो उन्होंने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया। यश ने अपनी इस सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्म की कमान किसी रूढ़िवादी एक्शन डायरेक्टर को नहीं, बल्कि स्वतंत्र, विचारोत्तेजक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त लेडी फिल्ममेकर गीतू मोहनदास (Geetu Mohandas) के हाथों में सौंपी। अपनी पहली ही फीचर फिल्म से ऑस्कर तक का सफर तय करने और तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) बटोरने वाली इस निर्देशिका की यात्रा किसी फिल्मी पटकथा से कम रोमांचक नहीं है।

5 साल की उम्र में कैमरे का सामना: चाइल्ड आर्टिस्ट से टॉप एक्ट्रेस बनने का सफर

गीतू मोहनदास का असली नाम गायत्री दास है। उनका सिनेमाई सफर महज 5 साल की उम्र में तब शुरू हुआ था जब उन्होंने 1986 में मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार मोहनलाल की फिल्म ‘ओन्नु मुथल पूज्यम वरे’ (Onnu Muthal Poojyam Vare) में एक बाल कलाकार के रूप में अभिनय की दुनिया में कदम रखा। अपनी पहली ही फिल्म में उनके मासूम और प्रभावी अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया और उन्हें ‘बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट’ का केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड मिला। इसके बाद उन्होंने तमिल फिल्म ‘एन बोम्मुकुट्टी अम्मावुक्कु’ सहित कई फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया।

बड़े होने के बाद उन्होंने साल 2000 में मोहनलाल के साथ ही फिल्म ‘लाइफ इज ब्यूटीफुल’ से बतौर मुख्य अभिनेत्री डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ‘थेनकासी पट्टनम’, ‘वालकन्नाडी’, ‘नम्मल थम्मिल’ और ‘शेषम’ जैसी कई यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। साल 2004 में आई श्यामप्रसाद निर्देशित फिल्म ‘अकले’ (Akale) में उनके बेहतरीन और संवेदनशील अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का ‘केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड’ और ‘फिल्मफेयर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। हालांकि, अभिनय के शिखर पर होने के बावजूद उनका दिल हमेशा कैमरे के पीछे रहकर अपनी खुद की कहानियां कहने के लिए मचल रहा था।

शॉर्ट फिल्म से नेशनल अवॉर्ड और ‘लायर्स डाइस’ का ऑस्कर तक ऐतिहासिक सफर

अभिनय को अलविदा कहकर गीतू मोहनदास ने साल 2009 में अपने प्रोडक्शन हाउस ‘अनप्लग्ड’ के बैनर तले निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। उनका पहला प्रोजेक्ट एक छोटी सी फिक्शन फिल्म थी, जिसका शीर्षक था ‘केलकुन्नुन्दो’ (Kelkkunnundo – क्या आप सुन रहे हैं?)। एक अंधी बच्ची के नजरिए से दुनिया को देखने वाली इस दिल छू लेने वाली शॉर्ट फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचा दिया। रॉटरडैम इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर होने के बाद इस फिल्म ने 3 बड़े अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और भारत सरकार का ‘नेशनल फिल्म अवॉर्ड’ अपने नाम किया। यह फिल्म इतनी प्रभावशाली थी कि केरल सरकार ने इसे 12वीं कक्षा के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया।

इसके बाद साल 2013 में गीतू मोहनदास ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी और गीतांजलि थापा को लेकर अपनी पहली हिंदी फीचर फिल्म ‘लायर्स डाइस’ (Liar’s Dice) बनाई। महज 50 लाख रुपये के बेहद सीमित बजट में बनी हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बैकड्रॉप वाली इस सामाजिक-राजनीतिक ड्रामा फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पटल पर इतिहास रच दिया। ‘लायर्स डाइस’ ने संडांस फिल्म फेस्टिवल में धूम मचाई, छह बड़े अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते और भारत के प्रतिष्ठित 61वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में दो नेशनल अवॉर्ड्स (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी) अपने नाम किए। इतना ही नहीं, भारत सरकार द्वारा ‘लायर्स डाइस’ को 87वें ऑस्कर अवॉर्ड्स (Academy Awards) के लिए देश की आधिकारिक प्रविष्टि (India’s Official Entry) के रूप में भेजा गया था।

‘मूथॉन’ से ग्लोबल पहचान और यश का अटूट भरोसा

साल 2019 में गीतू मोहनदास ने अपनी दूसरी फीचर फिल्म ‘मूथॉन’ (The Elder One) का निर्देशन किया, जिसमें निवीन पॉली और शशांक अरोड़ा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इस फिल्म की कहानी लक्षद्वीप से मुंबई के अंडरवर्ल्ड और कमाठीपुरा की अंधेरी गलियों तक एक बच्चे के अपने बड़े भाई को ढूंढने के भावनात्मक सफर पर आधारित थी। फिल्म की स्क्रिप्ट को संडांस फिल्म लैब में ग्लोबल फिल्ममेकिंग अवॉर्ड मिला और इसका वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में हुआ। ‘मूथॉन’ के जरिए गीतू ने यह साबित कर दिया कि वे इंसानी जज्बातों की गहराई के साथ-साथ मुंबई के अपराध जगत और रॉ एक्शन को भी बेहद यथार्थवादी और स्टाइलिश अंदाज में पर्दे पर उतारने में माहिर हैं।

यही वह फिल्म थी जिसने कन्नड़ सुपरस्टार यश का ध्यान अपनी ओर खींचा। ‘केजीएफ 2’ के बाद जब हर निर्देशक यश को उसी तरह का लाउड मसाला एक्शन ऑफर कर रहा था, तब गीतू मोहनदास एक ऐसी डार्क, इमोशनल और अनोखी गैंगस्टर कहानी लेकर पहुंचीं जिसने यश को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। एक प्री-रिलीज इवेंट में खुद गीतू मोहनदास ने भावुक होते हुए कहा था कि जब वे 50 लाख की फिल्म बनाकर ऑस्कर पहुंची थीं, तब भी कोई बड़ा प्रोड्यूसर उन पर भरोसा नहीं कर रहा था, लेकिन जब यश ने उनके विजन और कहानी पर विश्वास जताया, तो पूरी दुनिया उनके पीछे खड़ी हो गई।

‘टॉक्सिक: अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ – 500 करोड़ का महा-बजट और नया सिनेमाई दौर

केवीएन प्रोडक्शंस और यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के बैनर तले बनी फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी और भव्य फिल्मों में से एक है, जिसका अनुमानित बजट 500 करोड़ रुपये है। फिल्म की पृष्ठभूमि स्वतंत्रता के बाद के गोवा और ड्रग-हथियारों के वैश्विक सिंडिकेट पर आधारित है। फिल्म में यश ‘राया’ और उसके बेटे ‘रूमी उर्फ टिकट’ के दोहरे किरदार में नजर आ रहे हैं।

फिल्म की स्टारकास्ट भी बेहद दमदार है, जिसमें कियारा आडवाणी (नादिया के किरदार में), नयनतारा (गंगा के रूप में), हुमा कुरैशी (एलिजाबेथ), तारा सुतारिया (रेबेका) और रुक्मिणी वसंत (मेलिसा) जैसी शीर्ष अभिनेत्रियां शामिल हैं। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को बिना किसी दृश्य कटौती के ‘A’ (एडल्ट्स ओनली) सर्टिफिकेट और 3 घंटे 14 मिनट (194 मिनट) के विशाल रनटाइम के साथ पास किया है, जो यह दर्शाता है कि गीतू ने इस फिल्म में रॉ, बिना किसी समझौते वाला और अंतरराष्ट्रीय स्तर का वायलेंट गैंगस्टर ड्रामा तैयार किया है।

स्वतंत्र सिनेमा से 500 करोड़ के महायुद्ध तक: भारतीय सिनेमा का नया इतिहास

गीतू मोहनदास का यह सफर केवल एक निर्देशक की निजी कामयाबी नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा में महिला फिल्ममेकर्स के लिए एक नया मील का पत्थर है। अब तक भारतीय सिनेमा में महिला निर्देशकों को अक्सर पारिवारिक ड्रामा, रोमांस या आर्ट-हाउस फिल्मों तक सीमित माना जाता था। लेकिन 500 करोड़ के कैनवास पर हॉलीवुड एक्शन कोरियोग्राफर जे.जे. पेरी, अनबरीव और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सिनेमैटोग्राफर राजीव रवि की टीम के साथ मिलकर गीतू मोहनदास ने उस सोच को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। बॉक्स ऑफिस पर एडवांस बुकिंग के रिकॉर्ड तोड़ते हुए यश की ‘टॉक्सिक’ यह साबित करने के लिए तैयार है कि जब कंटेंट-ओरिएंटेड सिनेमा का गहरा विजन और मास सुपरस्टार का स्टारडम एक साथ मिलते हैं, तो सिनेमाघरों में केवल गदर नहीं बल्कि इतिहास रचता है।

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