
भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने युवा तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा के खेल में आए जबरदस्त बदलाव और उनकी निरंतरता की दिल खोलकर तारीफ की है। मोर्कल का मानना है कि लंबे समय तक चोटों से जूझने के बाद जिस अनुशासन, धैर्य और आक्रामकता के साथ प्रसिद्ध कृष्णा ने लाल गेंद के प्रारूप में अपनी जगह बनाई है, वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के लिए प्रेरणादायक है। मोर्कल ने कहा कि प्रसिद्ध कृष्णा को एक उभरते हुए गेंदबाज से पूरी तरह परिपक्व और ‘वर्ल्ड क्लास’ तेज गेंदबाज के रूप में विकसित होते देखना एक गेंदबाजी कोच के तौर पर बेहद सुखद और संतोषजनक अनुभव है।
चोटों के लंबे दौर से उबरकर विश्वस्तरीय बनने का संघर्ष
प्रसिद्ध कृष्णा की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट यात्रा उतार-चढ़ावों से भरी रही है। पीठ की स्ट्रेस फ्रैक्चर और पैर की गंभीर चोटों के कारण उन्हें कई महीनों तक क्रिकेट के मैदान से दूर रहना पड़ा था। किसी भी तेज गेंदबाज के लिए लंबे रिहैबिलिटेशन से गुजरकर उसी रफ्तार और लय के साथ वापसी करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। नेशनल क्रिकेट एकेडमी में लंबे समय तक पसीना बहाने के बाद जब कृष्णा ने घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए के लिए वापसी की, तो उनकी गेंदबाजी में पहले से कहीं अधिक परिपक्वता और शारीरिक मजबूती देखने को मिली। मोर्कल ने उनके इसी जुझारूपन की सराहना करते हुए कहा कि जब कोई खिलाड़ी अपनी फिटनेस और तकनीक पर इतनी मेहनत करता है, तो मैदान पर उसके नतीजे साफ नजर आते हैं।
हाई-आर्म एक्शन और हिट-द-डेक: प्रसिद्ध कृष्णा का सबसे घातक हथियार
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज मोर्ने मोर्कल खुद अपनी लंबाई, हाई-आर्म रिलीज और पिच से तीखा उछाल हासिल करने के लिए जाने जाते थे। शायद यही कारण है कि वे प्रसिद्ध कृष्णा की गेंदबाजी शैली और उनकी प्राकृतिक क्षमताओं को सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं। कृष्णा का ऊंचा कद और गेंद को पिच पर जोर से पटकने (हिट-द-डेक) की क्षमता उन्हें सपाट पिचों पर भी बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द बना देती है। मोर्कल के अनुसार, कृष्णा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे पुरानी गेंद से भी लगातार 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद को सीम पर गिरा सकते हैं, जिससे बल्लेबाजों को बैकफुट पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण में नई गहराई और संतुलन
जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी दिग्गजों की मौजूदगी में भारतीय तेज गेंदबाजी विभाग इस समय दुनिया का सबसे संतुलित और घातक आक्रमण माना जाता है। इस कड़े कॉम्पिटिशन के बीच प्रसिद्ध कृष्णा का खुद को एक भरोसेमंद टेस्ट गेंदबाज के रूप में स्थापित करना भारतीय टीम प्रबंधन के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। मोर्कल ने बताया कि कृष्णा का टीम में होना कप्तान को एक ऐसा विकल्प देता है जो बीच के ओवरों में आकर साझेदारी तोड़ने की क्षमता रखता है। टेस्ट क्रिकेट में जब विरोधी बल्लेबाज क्रीज पर जम चुके होते हैं, तब कृष्णा का आक्रामक बाउंसर और तीखा इन-स्विंगर खेल का रुख पलटने का काम करता है।
विदेशी परिस्थितियों में मैच विनर बनने की क्षमता
ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड (SENA देश) की तेज और उछाल भरी पिचों पर प्रसिद्ध कृष्णा की गेंदबाजी शैली और भी ज्यादा खतरनाक साबित होती है। मोर्कल का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में सफलता सिर्फ गति से नहीं मिलती, बल्कि एक ही टप्पे पर लगातार कई ओवर तक गेंद फेंकने की मानसिक दृढ़ता से मिलती है। कृष्णा ने अपने स्पेल में रन रोकने के साथ-साथ सही लाइन-लेंथ पर दबाव बनाने की कला सीख ली है। आगामी टेस्ट दौरों और आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के कड़े चक्र को देखते हुए कृष्णा का यह बदला हुआ रूप भारतीय टीम के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकता है।
भविष्य के बड़े मुकाबलों के लिए तैयार है यह युवा सितारा
मोर्ने मोर्कल के मार्गदर्शन में प्रसिद्ध कृष्णा अपनी गेंदबाजी के तकनीकी पहलुओं, जैसे कलाई की स्थिति और रन-अप के संतुलन पर लगातार काम कर रहे हैं। गेंदबाजी कोच ने भरोसा जताया है कि कृष्णा का यह शानदार प्रदर्शन केवल शुरुआत है और आने वाले समय में वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों के सामने सबसे कठिन चुनौती बनकर उभरेंगे। लाल गेंद के साथ-साथ सीमित ओवरों के क्रिकेट में भी उनकी यह सटीकता टीम इंडिया को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मददगार बनेगी।
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