
उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित, तेजतर्रार और अपनी जन-सरोकारी कार्यशैली के लिए पहचानी जाने वाली आईएएस (IAS) अधिकारी दिव्या मित्तल के भारतीय प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र (इस्तीफा / वीआरएस) देने की खबरों के बाद प्रशासनिक और सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं। आम तौर पर लोगों को लग रहा है कि यह फैसला अचानक लिया गया है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों और प्रशासनिक हलकों से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह कोई तात्कालिक निर्णय नहीं है। दिव्या मित्तल ने जिलाधिकारी (DM) के पद से हटाए जाने और उसके बाद के घटनाक्रमों के दौरान ही नौकरशाही की औपचारिक सीमाओं से अलग होने का मन बना लिया था।
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर जैसे शीर्ष संस्थानों से शिक्षित दिव्या मित्तल उन गिने-चुने अधिकारियों में रही हैं, जिन्होंने कॉरपोरेट जगत की करोड़ों की नौकरी छोड़कर देश सेवा का रास्ता चुना था। मिर्जापुर में ऐतिहासिक जल परियोजना के जरिए दशकों से प्यासे गांव तक पानी पहुंचाना हो या संतकबीर नगर व बस्ती में जनसुनवाई के जरिए गरीबों की सीधी मदद करना—उनकी कार्यशैली हमेशा से लीक से हटकर रही। लेकिन व्यवस्था के भीतर आने वाले उतार-चढ़ाव, बार-बार के तबादले और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के टकराव ने उनके भीतर एक गहरा भावनात्मक मंथन शुरू कर दिया था।
मिर्जापुर और बस्ती से तबादले के वक्त का घटनाक्रम: जब सोशल मीडिया पर भी छलका था दर्द
दिव्या मित्तल के प्रशासनिक सफर में मिर्जापुर और उसके बाद बस्ती जिले का कार्यकाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में जब आजादी के बाद पहली बार पाइपलाइन से नल का पानी पहुंचा, तो स्थानीय ग्रामीणों ने भावुक होकर उनके ऊपर फूलों की बारिश की थी और ढोल-नगाड़ों के साथ उन्हें विदाई दी थी।
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मिर्जापुर से विदाई और चर्चाएं: मिर्जापुर से जब उनका तबादला बस्ती जिले के लिए किया गया था, तो वह विदाई समारोह पूरे देश में वायरल हो गया था। हालांकि, उस समय भी कुछ ही घंटों के भीतर उनके तबादला आदेश को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था और उन्हें प्रतीक्षारत (वेटिंग) सूची में डाल दिया गया था। इस अचानक हुए फेरबदल ने प्रशासनिक गलियारों में कई सवाल खड़े किए थे।
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सोशल मीडिया पर सांकेतिक संदेश: उस दौर में भी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कई विचारोत्तेजक और दार्शनिक पोस्ट साझा किए थे। उन्होंने कर्म, ईमानदारी, जनसेवा और नियति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए लिखा था कि “पद और कुर्सियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन जनता के दिलों में बनाई गई जगह और अपनी अंतरात्मा की संतुष्टि ही सबसे बड़ी पूंजी है।”
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बस्ती से हटाए जाने के बाद का मोड़: बस्ती में जिलाधिकारी के रूप में शानदार काम करने के बावजूद जब उन्हें अपेक्षाकृत कम प्रभाव वाले पदों (जैसे यूपी जल निगम या अन्य तकनीकी विभागों) पर भेजा गया, तो उन्होंने इसे व्यवस्था की कार्यप्रणाली के हिस्से के रूप में स्वीकार किया, लेकिन साथ ही अपने भविष्य के रास्ते पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया।
करीबियों और पारिवारिक सूत्रों का बड़ा खुलासा: ‘काफी समय से चल रहा था मंथन’
आईएएस दिव्या मित्तल के करीबी दोस्तों, पूर्व सहकर्मियों और पारिवारिक सूत्रों ने अब इस फैसले के पीछे की वास्तविक पृष्ठभूमि पर खुलकर बात की है।
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व्यवस्था में बंधकर काम करने की सीमाएं: करीबियों का कहना है कि दिव्या मित्तल एक अत्यंत स्वतंत्र, नैतिक और विजनरी सोच वाली अधिकारी हैं। जब एक अधिकारी पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ जमीनी बदलाव लाना चाहता है, लेकिन राजनीतिक समीकरणों, रूटीन ट्रांसफर-पोस्टिंग और नौकरशाही की औपचारिकता में उलझ जाता है, तो एक समय के बाद घुटन महसूस होने लगती है।
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पति गगनदीप सिंह का पूर्व अनुभव: दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह (जो खुद पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं) ने भी कुछ वर्ष पहले पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर अपना स्वतंत्र रास्ता चुना था। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच इस बात को लेकर एक साझा समझ थी कि वास्तविक जनसेवा और समाज निर्माण केवल लाल बत्ती या सरकारी पद के दायरे में रहकर ही नहीं किया जा सकता।
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स्वाभिमान और मानसिक शांति पहली प्राथमिकता: करीबियों ने बताया कि जब उन्हें बार-बार फील्ड से हटाकर अन्य भूमिकाओं में भेजा गया, तो उन्होंने इसे किसी पद के नुकसान के रूप में नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान और जीवन के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा। वे किसी पद की लालसा में समझौते करने वाली शख्सियत नहीं रही हैं।
लंदन की करोड़ों की नौकरी छोड़कर आई थीं भारत: व्यवस्था और आदर्शों का टकराव
दिव्या मित्तल का पूरा शैक्षणिक और पेशेवर बैकग्राउंड बेहद असाधारण रहा है:
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आईआईटी-आईआईएम की मेधावी छात्रा: उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बी.टेक और आईआईएम बैंगलोर से एमबीए किया था।
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लंदन में इनवेस्टमेंट बैंकिंग: सिविल सेवा में आने से पहले वे लंदन की शीर्ष वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में लाखों के पैकेज पर कार्यरत थीं।
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आदर्शवाद बनाम जमीनी हकीकत: कॉरपोरेट की ऐशो-आराम भरी जिंदगी छोड़कर भारत लौटने के पीछे उनका एकमात्र सपना था—भारत के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना। लेकिन जब नौकरशाही के जटिल तंत्र में प्रशासनिक प्राथमिकताओं का टकराव योग्यता और जनसेवा के बीच होने लगता है, तो ऐसे अधिकारी अक्सर व्यवस्था से बाहर निकलकर काम करने का साहसिक कदम उठाते हैं।
क्या होगा आईएएस दिव्या मित्तल का अगला कदम? शिक्षा, मेंटरशिप और सामाजिक बदलाव की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय प्रशासनिक सेवा से अलग होने के बाद भी दिव्या मित्तल जनसेवा और समाज से पूरी तरह जुड़ी रहेंगी।
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युवाओं और यूपीएससी अभ्यर्थियों की मेंटरशिप: दिव्या मित्तल सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाखों युवाओं को पढ़ाई, टाइम मैनेजमेंट और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर मार्गदर्शन देती रही हैं। भविष्य में वे बड़े स्तर पर मेंटरशिप और शिक्षा के क्षेत्र में काम कर सकती हैं।
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स्वतंत्र सामाजिक प्रोजेक्ट्स: ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और जल संरक्षण जैसे विषयों पर वे गैर-सरकारी और स्वतंत्र थिंक-टैंक मॉडल के जरिए अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा सकती हैं।
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उद्यमिता और नीतिगत परामर्श (Policy Consulting): अपनी मजबूत मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि का उपयोग करते हुए वे नीति निर्माण, टेक्नोलॉजी फॉर सोशल गुड और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में भी कदम रख सकती हैं।
दिव्या मित्तल का यह फैसला एक बार फिर देश की शीर्ष नौकरशाही में काम करने वाले ईमानदार और मेधावी अधिकारियों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके व्यक्तिगत संघर्षों को उजागर करता है। उनके समर्थकों और करीबियों का मानना है कि प्रशासनिक सेवा छूटे या रहे, दिव्या मित्तल की पहचान एक सच्चे ‘जनसेवक’ के रूप में हमेशा बनी रहेगी।
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