जंतर-मंतर मार्च के दौरान राष्ट्रीय राजधानी बनी छावनी, चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल की तैनाती

देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के विरोध में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर मार्च के चलते दिनभर अभूतपूर्व अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। प्रदर्शन की अनुमति न होने के बावजूद देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और आम नागरिक जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने पूरी राजधानी में धारा 144 लागू करते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। लुटियंस दिल्ली को जोड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग की गई थी और कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार सुरक्षा कारणों से बंद कर दिए गए थे। इसके बावजूद, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का हुजूम अलग-अलग रास्तों से मध्य दिल्ली की तरफ बढ़ने की कोशिश करता रहा, जिससे कई इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम और सड़क पर पुलिसकर्मियों के साथ तीखी झड़प देखने को मिली।

प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बड़े पैमाने पर धरपकड़ अभियान चलाया। मुंबई से दिल्ली पहुंचते ही विमान के भीतर से सीजेपी के शीर्ष नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया। वहीं दूसरी ओर, इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी पुलिस ने दिल्ली की सीमाओं और सड़कों पर ही रोककर पुलिस वैन से अलग-अलग थानों में भेज दिया। केजरीवाल ने जाफरपुर थाने से एक वीडियो संदेश साझा करते हुए सरकार की इस कार्रवाई को तानाशाही करार दिया और कहा कि सरकार की जेलें कम पड़ जाएंगी, लेकिन जनता की आवाज बंद नहीं होगी। इसके अलावा मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी को उनके गुरुग्राम स्थित आवास से उठाया गया और सैकड़ों वकीलों, पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी दिल्ली पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया। पुलिस आंकड़ों के मुताबिक दिनभर में 7,000 से ज्यादा लोगों को अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।

दिल्ली में हुई इस सामूहिक हिरासत की खबर फैलते ही राजनीतिक गलियारों और मानवाधिकार संगठनों में तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। वरिष्ठ अधिवक्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की, जबकि उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप और अनौपचारिक निर्देशों के बाद कई वकीलों और कार्यकर्ताओं को शाम तक राहत दी गई। वहीं दूसरी तरफ, सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के गिरफ्तार होने के तुरंत बाद संगठन ने अपने नए राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे के नाम का ऐलान किया। अजिंक्य शिंदे ने एक वीडियो जारी कर समर्थकों से कहा कि यह तानाशाही सरकार देश की एकजुटता से घबरा गई है। उन्होंने समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया कि जहां भी पुलिस रास्ता रोके, वहीं अपना जंतर-मंतर बनाकर शांतिपूर्ण विरोध जारी रखें।

दिनभर चले इस अभूतपूर्व राजनीतिक ड्रामे के बाद भी विरोध का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। पुलिस प्रशासन द्वारा हिरासत में लिए गए अधिकांश प्रदर्शनकारियों को देर शाम आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद रिहा कर दिया गया, हालांकि सीजेपी के कई मुख्य नेता अभी भी पुलिस नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। इस बीच सीजेपी संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक चुनाव आयोग और सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती। संगठन ने रविवार को फिर से दिल्ली में बड़े स्तर पर मार्च निकालने और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने का ऐलान किया है। इधर सुरक्षा एजेंसियों ने भी नए मार्च के ऐलान को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है और राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर चेकिंग अभियान और अधिक कड़ा कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में दिल्ली में तनाव और बढ़ने के आसार हैं।

Check Also

पनामा में लगातार आए दो भयानक भूकंपीय झटकों से थर्राई धरती और लोगों में मची भारी दहशत

मध्य अमेरिका के प्रमुख देश पनामा में एक के बाद एक आए दो भीषण और …