‘होर्मुज से सभी बारूदी सुरंगें साफ, नई बिछाईं तो जहाज तुरंत तबाह होंगे…’, ईरान को डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनी; स्पेस फोर्स से हर इंच की निगरानी

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम बिंदु पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बड़ा और रणनीतिक ऐलान करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को सुरक्षित रूप से निकाल लिया है अथवा उन्हें नियंत्रित विस्फोटों के जरिए पूरी तरह नष्ट कर दिया है। इसके साथ ही ट्रंप ने तेहरान के सैन्य नेतृत्व को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान या उसकी किसी भी प्रॉक्सी ने इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में दोबारा बारूदी सुरंगें बिछाने की जुर्रत की, तो उन जहाजों या नौकाओं को अमेरिकी सेना तुरंत और योजनाबद्ध तरीके से समुद्र में ही नेस्तनाबूद कर देगी।

‘स्पेस फोर्स से हर इंच पर नजर’: सैटेलाइट निगरानी और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वाशिंगटन इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं है और वहां ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पूरी कठोरता के साथ लागू है। उन्होंने खुलासा किया कि अमेरिकी स्पेस फोर्स (US Space Force) और उन्नत सैन्य उपग्रहों के माध्यम से होर्मुज जलडमरूमध्य के एक-एक वर्ग इंच क्षेत्र की चौबीसों घंटे लाइव निगरानी की जा रही है। अंतरिक्ष से होने वाली इस हाई-टेक मॉनिटरिंग के चलते समुद्र में होने वाली छोटी से छोटी नाव की हलचल भी तुरंत अमेरिकी कमांड सेंटर के रडार पर आ जाती है। इस उन्नत निगरानी तंत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी ईरानी गश्ती पोत या मिनलेयर पोत बिना पकड़े गए अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में विस्फोटक न बिछा सके।

पिकएक्स माउंटेन और ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी रडार

होर्मुज के समुद्री क्षेत्र के साथ-साथ ट्रंप ने ईरान के भीतर स्थित अत्यंत संवेदनशील परमाणु ठिकानों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी निगरानी तंत्र ‘पिकएक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) और पहले ही हमले में तबाह किए जा चुके तीन अन्य प्रमुख परमाणु ठिकानों पर लगातार नजर रखे हुए है। पिकएक्स माउंटेन को आधिकारिक तौर पर ‘कुह-ए कोलंग गाज ला’ के नाम से जाना जाता है, जो ईरान के प्रमुख नतांज परमाणु परिसर के पास एक मजबूत पहाड़ी के भीतर गहराई में स्थित एक निर्माणाधीन भूमिगत परमाणु स्थल है। ट्रंप का यह बयान साफ दर्शाता है कि अमेरिका का ध्यान केवल समुद्री व्यापारिक मार्गों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह ईरान के यूरेनियम संवर्धन और भूमिगत सैन्य ढांचों की हर गतिविधि को भी सीधे निशाने पर रखे हुए है।

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, तेल संकट और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है। सामान्य दिनों में दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत यानी प्रतिदिन दो करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। हालांकि, हाल के हफ्तों में बढ़े सैन्य टकराव, मिसाइल हमलों और बारूदी सुरंगों के खतरे के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने अपने टैंकरों के मार्ग बदल दिए हैं। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस मार्ग से तेल का प्रवाह घटकर प्रतिदिन महज 50 लाख बैरल के करीब पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के आंकड़ों के मुताबिक, हालिया तनाव के दौरान क्षेत्र में लगभग 68 समुद्री सुरक्षा घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 20 नाविकों और बंदरगाह कर्मियों की जान गई है। ऐसे में बारूदी सुरंगों के हटाए जाने की अमेरिकी घोषणा का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार और वाणिज्यिक जहाजों में विश्वास बहाल करना है।

‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ और अमेरिका का बढ़ता कूटनीतिक शिकंजा

सैन्य दबाव के समानांतर, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ (Operation Economic Outcast) शुरू किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) का दायरा बढ़ाते हुए उन सभी वैश्विक नेटवर्क, वित्तीय संस्थाओं और शिपिंग कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है जो ईरानी तेल की गुप्त बिक्री या डिजिटल संपत्तियों के जरिए धन जुटाने में मदद कर रही हैं। वाशिंगटन ने ईरान के सामने दो ही रास्ते रखे हैं—या तो वह अपनी आक्रामक नीतियों को त्यागकर सामान्य अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में लौटे या फिर पूर्ण आर्थिक तबाही और वैश्विक अलगाव का सामना करे।

ईरान का पलटवार और मध्य पूर्व में गहराता महायुद्ध का खतरा

अमेरिका के कड़े रुख और प्रतिबंधों के बावजूद तेहरान झुकने को तैयार नजर नहीं आ रहा है। ईरानी अधिकारियों और मंत्रियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज करते हुए इसे वाशिंगटन की ‘एक और नाकामी’ करार दिया है और दावा किया है कि उनके पास किसी भी तरह के आर्थिक दबाव से निपटने की दीर्घकालिक योजना मौजूद है। हालांकि, होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र पर ट्रंप का यह खुला अल्टीमेटम और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति इस बात का संकेत है कि समुद्र में किसी भी छोटी सी चूक या झड़प से दोनों देशों के बीच सीधा और विनाशकारी सैन्य टकराव भड़क सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।

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