
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और क्रांति की भूमि कहे जाने वाले मेरठ जिले से इस वक्त प्रशासन के होश उड़ा देने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भाकियू (भारतीय किसान यूनियन) और विभिन्न किसान संगठनों के बैनर तले हजारों की संख्या में आक्रोशित किसान मेरठ कलेक्ट्रेट परिसर में धावा बोल दिया है। किसानों का गुस्सा इतना सातवें आसमान पर था कि उन्होंने सुरक्षा में लगाए गए पुलिस के लोहे के बैरियरों को बलपूर्वक गिरा दिया और भारी नारेबाजी करते हुए सीधे डीएम कार्यालय के मुख्य द्वार तक पहुंच गए। किसानों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला मजिस्ट्रेट (DM) मौके पर आकर उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं करते हैं, तो वे किसी भी अधिकारी को उनके दफ्तर में नहीं बैठने देंगे और अनिश्चितकालीन ताला जड़ देंगे। इस उग्र प्रदर्शन के बाद से मेरठ कलेक्ट्रेट और आसपास के प्रशासनिक इलाकों में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है और हड़कंप मचा हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले कई हफ्तों से मेरठ और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसान गन्ने के बकाए भुगतान, बिजली के बढ़े हुए दरों, ट्यूबवेल के कनेक्शन, आवारा पशुओं की समस्या और अधिग्रहित जमीनों के उचित मुआवजे जैसी विभिन्न मांगों को लेकर स्थानीय अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे। किसानों का आरोप है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारी उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय केवल झूठे आश्वासन दे रहे हैं। कई बार प्रशासनिक बैठकों में ज्ञापन सौंपने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किसानों का सब्र टूट गया और उन्होंने पंचायत के बाद सीधे मेरठ कलेक्ट्रेट पर हल्ला बोलने का ऐतिहासिक फैसला किया। अन्नदाताओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन किसानों की अनदेखी कर रही है, जिसे अब और अधिक सहन नहीं किया जाएगा।
आज सुबह से ही मेरठ के विभिन्न गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बाइकों पर सवार होकर हजारों किसान कलेक्ट्रेट की तरफ कूच करने लगे थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के चारों तरफ भारी पुलिस बल, पीएसी (PAC) के जवान और कई जगहों पर लोहे के मजबूत बैरियर लगाए हुए थे। जैसे ही किसानों का जत्था कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर पहुंचा, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। गुस्साई भीड़ ने पुलिस के सभी अवरोधकों और बैरियरों को मिट्टी में मिलाते हुए उन्हें गिरा दिया और बैरिकेडिंग तोड़कर सीधे कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर प्रवेश कर गए। इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी नजर आई क्योंकि किसानों की संख्या इतनी भारी थी कि उन्हें रोकना मुमकिन नहीं था।
कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर घुसने के बाद किसानों ने मैदान में ही धरना शुरू कर दिया और जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। किसानों के प्रमुख नेताओं ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि वे इस बार सिर्फ कागजी आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि जिला जिलाधिकारी (DM) महोदय खुद आकर किसानों का ज्ञापन नहीं लेते हैं और मांगों पर तुरंत फैसला नहीं करते हैं, तो किसान कलेक्ट्रेट के सभी कमरों और अधिकारियों के दफ्तरों को बंद कर देंगे और किसी भी बाबू या अधिकारी को अंदर नहीं घुसने देंगे। किसानों के इस तेवर को देखकर प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लगातार आपातकालीन बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद मेरठ के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे हैं और किसान नेताओं को शांत कराने तथा बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, किसान नेता अपनी मांगों पर पूरी तरह अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक लिखित में और मौके पर समाधान नहीं होगा, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के इस प्रमुख जिले में किसानों के इस उग्र आंदोलन ने सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। आने वाले कुछ घंटों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन किसानों के इस दबाव से निपटने के लिए क्या कड़े कदम उठाता है और कौन सा नया समझौता सामने आता है।
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