नई दिल्ली/मुंबई: हिंदी सिनेमा की सबसे बोल्ड, खूबसूरत और टैलेंटेड अभिनेत्रियों में शुमार जीनत अमान (Zeenat Aman) आज भी अपने बेबाक बयानों और अनसुने किस्सों के चलते सुर्खियों में बनी रहती हैं। हाल ही में राजधानी में आयोजित एक प्रतिष्ठित सम्मान समारोह ‘इंडियाज अमृत रत्न 2026’ में जीनत अमान को भारतीय सिनेमा में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए ‘अमृत रत्न अवॉर्ड’ से नवाजा गया।
इस इवेंट के दौरान जीनत अमान ने अपने निजी जीवन, अपनी धार्मिक परवरिश और अपने उस गुप्त नाम को लेकर कई ऐसे चौंकाने वाले खुलासे किए, जिन्हें सुनकर उनके फैंस भी हैरान हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि जीनत अमान का एक हिंदू नाम भी है और उनकी परवरिश बेहद धार्मिक माहौल में हुई थी।
मां की तरफ से नाम था ‘ललितेश्वरी’, पिता ने दिया ‘जीनत’
इवेंट में जब जीनत अमान से उनके बैकग्राउंड के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपनी मां के बारे में बात करते हुए कहा, “मेरे पिता की तरफ से मेरा नाम जीनत अमान है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मेरी मां की तरफ से मेरा एक हिंदू नाम भी है और वो नाम है— ललितेश्वरी।”
जीनत ने आगे बताया, “मेरी मां का नाम वर्धिनी था और वह एक बेहद धार्मिक हिंदू महिला थीं। वे नियम से रोज सुबह दो से तीन घंटे भगवान की पूजा-पाठ किया करती थीं। चूंकि मेरे माता-पिता का अलगाव बहुत जल्दी हो गया था, इसलिए मेरी पूरी परवरिश मेरी मां ने ही की है।”
मुस्लिम, हिंदू, कैथोलिक और जर्मन: जीनत ने बताया अपना धर्म
जब जीनत अमान से सीधा सवाल किया गया कि क्या वे खुद भी धार्मिक हैं? तो उन्होंने बड़ी ही संजीदगी से इसका जवाब ‘ना’ में दिया।
जीनत अमान का धर्म पर विचार: “मैं किसी एक पारंपरिक धर्म को नहीं मानती क्योंकि मैंने जिंदगी को बहुत करीब से और बेहद ‘ग्लोबल’ तरीके से देखा है। मेरी मां हिंदू थीं, मेरे पिता मुस्लिम थे, मेरे बच्चों के पिता (मजहर खान) भी मुस्लिम थे। मैंने अपनी पढ़ाई एक कैथोलिक क्रिश्चियन स्कूल में की है और मेरे सौतेले पिता (Stepfather) एक जर्मन थे। जब आपने जीवन के इतने सारे रंग देखे हों, तो आपको किसी एक धर्म से चिपककर रहने की जरूरत महसूस नहीं होती।”
जीनत ने आगे कहा, “दुनिया के सारे धर्म अच्छे हैं और कोई भी धर्म आपको गलत काम करना या नफरत फैलाना नहीं सिखाता। मेरा यकीन मानवता, दया, शांति, लैंगिक समानता, और इंसानों के साथ-साथ जानवरों के प्रति प्यार में है। मेरे लिए ‘मानवता’ ही सबसे बड़ा और सच्चा धर्म है।”
जब जीनत के हिरोइन बनने पर फूट-फूटकर रोई थीं उनकी स्कूल प्रिंसिपल
इस इवेंट में जीनत ने अपनी पढ़ाई-लिखाई और बॉलीवुड में अपने आने के इत्तेफाक पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वे बचपन में पढ़ाई में इतनी होशियार थीं कि स्कूल-कॉलेज में सब मानते थे कि वे भविष्य में देश की एक बड़ी लीडर या अफसर बनेंगी।
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प्रिंसिपल का रोना: जीनत ने हंसते हुए पुराना किस्सा शेयर किया, “जब मेरी स्कूल प्रिंसिपल को यह पता चला कि मैंने फिल्मों में जाने का फैसला किया है, तो वे रोने लगी थीं। वे दुखी होकर बोलीं—’यह लड़की इतनी होशियार है कि यह देश की पॉलिटिक्स में जा सकती थी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे देश को रिप्रेजेंट कर सकती थी, यह फिल्मों में जाकर क्या कर रही है?'”
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फिल्मों में आना था महज एक इत्तेफाक: जीनत ने बताया कि उनका बॉलीवुड में आना कोई सोचा-समझा प्लान नहीं था। यद्यपि उनके पिता (अमानुल्लाह खान) अपने जमाने के एक बहुत जाने-माने स्क्रीनराइटर थे (जिन्होंने ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी फिल्म के डायलॉग लिखे थे), लेकिन माता-पिता के अलग होने के कारण बचपन में जीनत का हिंदी सिनेमा से कोई खास वास्ता नहीं था। वे तो बस परिस्थितियों के साथ आगे बढ़ती गईं और इतिहास रच दिया।
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