लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के शहरी परिवहन (अर्बन ट्रांसपोर्ट) को पूरी तरह से हाईटेक और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 प्रमुख शहरों में 1,725 नई वातानुकूलित (एसी) इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के बड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह पूरी परियोजना ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल पर आधारित होगी, जिससे न सिर्फ आम जनता का सफर बेहद आरामदायक और सुगम हो जाएगा, बल्कि शहरों में वायु प्रदूषण से भी बड़ी राहत मिलेगी।
सरकार के इस फैसले के दायरे में प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों वाले शहरों के साथ-साथ हाईटेक सिटी नोएडा को भी शामिल किया गया है। सबसे खास बात यह है कि इन आधुनिक बसों का संचालन जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी किया जाएगा, जिससे हवाई यात्रियों को सीधी और शानदार कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
जानिए कौन-से हैं वो 18 शहर जहां चलेंगी ये आधुनिक ई-बसें
नगर विकास विभाग के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत उत्तर प्रदेश के जिन 18 शहरों की सड़कों पर ये शानदार इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी, उनकी सूची इस प्रकार है:
लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा (जेवर एयरपोर्ट सहित), झांसी, बरेली, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर, फिरोजाबाद, मथुरा-वृंदावन और शाहजहांपुर।
उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में 15 नगर निगम क्षेत्रों में कुल 743 इलेक्ट्रिक बसों का सफल संचालन किया जा रहा है, जिनमें से 700 बसें पहले से ही जीसीसी मॉडल पर चल रही हैं। इसी सफल अनुभव को देखते हुए अब सरकार ने इस योजना का दायरा बहुत बड़े स्तर पर बढ़ाने का फैसला किया है।
निजी ऑपरेटर्स संभालेंगे पूरा जिम्मा, बसों की खरीद पर सरकार देगी भारी सब्सिडी
प्रदेश के नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने इस परियोजना की बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि इन 18 शहरों के अलग-अलग रूटों की जरूरतों के हिसाब से 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1,725 एसी ई-बसों को सड़कों पर उतारा जाएगा। इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार निजी ऑपरेटर्स को भारी वित्तीय सहायता (अनुदान) भी देने जा रही है।
योजना के तहत 12 मीटर की प्रत्येक बड़ी ई-बस की खरीद पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर श्रेणी की प्रत्येक बस पर 35 लाख रुपये तक का सरकारी अनुदान दिया जाएगा। इन बसों के रखरखाव और अत्याधुनिक बस डिपो के निर्माण के लिए संबंधित नगर निगम और नोएडा अथॉरिटी की तरफ से ऑपरेटर्स को बिल्कुल मुफ्त (निःशुल्क) जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ कम होगा और प्राइवेट सेक्टर के आने से यात्रियों को समयबद्धता और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।
क्या है जीसीसी (GCC) मॉडल और कैसे तय होगा बसों का किराया?
ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट यानी जीसीसी मॉडल के तहत नई बसों को खरीदने, उनके लिए आधुनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने, कुशल ड्राइवरों व तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था करने से लेकर बसों के रोजमर्रा के संचालन और मेंटेनेंस (अनुरक्षण) की पूरी जिम्मेदारी निजी ऑपरेटर की होगी। इसके बदले में सरकार पहले से तय किए गए परफॉर्मेंस मानकों के आधार पर ऑपरेटर को संचालन शुल्क का भुगतान करेगी।
इन ऑपरेटर्स का चयन एक बेहद पारदर्शी और खुली निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। यात्रियों की जेब को ध्यान में रखते हुए बसों का किराया और यूजर चार्ज पूरी तरह से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ही नियंत्रित और निर्धारित किया जाएगा, ताकि जनता पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े।
कमर्शियल वाहनों के मालिकों की भी खुली लॉटरी, पुराने बकाए और पेनाल्टी में बंपर छूट
कैबिनेट बैठक में परिवहन विभाग की ओर से एक और बड़ा और लोक-लुभावन फैसला लिया गया है, जिससे प्रदेश के हल्के व्यावसायिक वाहन (लाइट कमर्शियल व्हीकल) मालिकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। राज्य में इन वाहनों पर लंबे समय से करीब 1,852.96 करोड़ रुपये का पुराना टैक्स बकाया चल रहा था, जिसकी वसूली नहीं हो पा रही थी।
इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए योगी सरकार ने एकमुश्त समाधान योजना के तहत पुराने मूल बकाए पर 35 प्रतिशत की सीधी छूट देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, वाहन मालिकों को सबसे बड़ी राहत देते हुए लेट फीस यानी पेनाल्टी (जुर्माने) में 100 प्रतिशत की पूरी छूट प्रदान की गई है। इस फैसले से हजारों छोटे कारोबारियों और ट्रांसपोर्टर्स को कानूनी कार्रवाई के डर से मुक्ति मिलेगी और वे अपना बकाया आसानी से जमा कर सकेंगे।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया