दिल्ली के सियासी और प्रशासनिक गलियारों से लेकर महाराष्ट्र के शांत इलाकों तक इस वक्त एक अनोखे आंदोलन को लेकर भारी हलचल मची हुई है। अमेरिका के बोस्टन शहर में रहने वाले 30 वर्षीय अभिजीत दिपके, जो सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं, आगामी 6 जून 2026 को भारत लौट रहे हैं।
अभिजीत ने देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था की खामियों और छात्र हितों को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का बिगुल फूंका है। उन्होंने अपने समर्थकों से सीधे तौर पर अपील की है कि वे “6 जून को उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर मिलें।” लेकिन, भारत भूमि पर कदम रखने से पहले ही उनके इस बड़े ऐलान ने महाराष्ट्र में रहने वाले उनके माता-पिता को गहरी चिंता और सुरक्षा के खौफ में डाल दिया है।
सूना पड़ा है घर, सुरक्षा के लिहाज से खाली मकान पर पुलिस का कड़ा पहरा
अभिजीत दिपके के इस हाई-प्रोफाइल आंदोलन के ऐलान के बाद महाराष्ट्र में उनके परिवार ने सुरक्षा के मद्देनजर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा कदम उठाया है। छत्रपति संभाजी नगर (पुराना नाम औरंगाबाद) के एमआईडीसी वालुज (MIDC Waluj) इलाके में स्थित दिपके परिवार का पैतृक घर इस वक्त पूरी तरह से सूना और खाली पड़ा हुआ है।
पड़ोसियों और खुफिया सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पहले ही अभिजीत के माता-पिता चुपचाप अपनी जरूरी चीजें समेटकर किसी अज्ञात सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट हो गए हैं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस किसी भी अनहोनी या विरोध को रोकने के लिए बेहद मुस्तैद है। भले ही घर के भीतर कोई नहीं है, लेकिन सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए मकान के बाहर दिन-रात पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया है।
रिटायर्ड इंजीनियर पिता का छलका दर्द: ‘अब उसे समझाने का कोई फायदा नहीं’
अभिजीत के पिता भगवानराव दिपके, जो पिछले साल ही महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) से एक सम्मानित इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त (Retire) हुए हैं, अपने इकलौते बेटे के इस आक्रामक रुख से बेहद परेशान और डरे हुए हैं। फोन पर हुई एक संक्षिप्त बातचीत में अपनी चिंता साझा करते हुए उन्होंने कहा:
“एक पिता होने के नाते मेरा चिंतित होना बिल्कुल स्वाभाविक है। शुरुआत में जब उसने इस बड़े अभियान और मार्च की रूपरेखा तैयार की थी, तब मैंने उसे अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए बहुत समझाने की कोशिश की थी। लेकिन, जब कोई युवा कुछ बड़ा करने की ठान लेता है, तो फिर माता-पिता के कहने के लिए बहुत कम बच जाता है। अब इस मोड़ पर हम उसे और कोई सलाह या नसीहत देने का इरादा नहीं रखते।”
हालांकि, भगवानराव ने यह पूरी तरह साफ किया कि उनके परिवार को किसी भी असामाजिक तत्व या संगठन से कोई प्रत्यक्ष धमकी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि एक पैरेंट्स के तौर पर वे सिर्फ माहौल को देखकर चिंतित हैं। अभिजीत को कानून की बहुत अच्छी समझ है और उसने हमें पूरा भरोसा दिलाया है कि वह किसी भी हाल में भारतीय संविधान और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करेगा।
‘सलाखों के पीछे जाने को भी तैयार हैं अभिजीत’, नीट (NEET) के 30 लाख छात्रों के हक की लड़ाई
इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच, महाराष्ट्र के जाने-माने वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता असीम सरोदे ने एक बड़ा खुलासा किया है। सरोदे के मुताबिक, अभिजीत दिपके इस आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा अपनी संभावित गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं। बुधवार को अभिजीत ने बोस्टन से फोन कर सरोदे से इस आंदोलन के लिए कानूनी और नैतिक समर्थन मांगा था।
असीम सरोदे ने बताया, “अभिजीत दिपके ने मुझसे बातचीत में साफ कहा कि वह इस देश के छात्रों के लिए जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनका मानना है कि यह गंभीर मुद्दा केवल नीट (NEET) परीक्षा देने वाले 30 लाख छात्रों के भविष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके माता-पिता के आत्मसम्मान से भी जुड़ा हुआ मामला है। अगर इस पूरे समीकरण को देखें, तो इस व्यवस्था से पीड़ित लोगों की कुल संख्या 70 से 80 लाख के पार पहुंच जाती है।”
सोनम वांगचुक, प्रकाश राज और दिग्गज पत्रकारों को दिल्ली आने का न्योता
दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले इस विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत और धारदार बनाने के लिए अभिजीत दिपके ने देश की कई बड़ी और प्रभावशाली हस्तियों को भी इस मंच पर आमंत्रित किया है।
असीम सरोदे के अनुसार, अभिजीत ने लद्दाख के मशहूर शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, कड़े तेवरों के लिए मशहूर अभिनेता प्रकाश राज, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता विशंभर चौधरी और देश के वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले जैसी दिग्गज हस्तियों को दिल्ली आने का न्योता भेजा है। सरोदे ने अंत में यह स्पष्ट किया कि अभिजीत का फिलहाल कोई नया मुख्यधारा का राजनीतिक दल लॉन्च करने का कोई इरादा नहीं है और उनका यह पूरा मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण और वैधानिक दायरे में ही संपन्न होगा।
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