
बदलते मौसम और तेज बारिश के इस दौर में जहां एक तरफ तेज बुखार, वायरल और सर्दी-जुकाम जैसी आम बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों से एक खतरनाक बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। इस जानलेवा संक्रमण का नाम चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) है। हाल के दिनों में इसके मामलों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इस संक्रमण की चपेट में आने से कई बच्चों की जान तक जा चुकी है।
सबसे डरावनी बात यह है कि इस वायरस के गंभीर मामले और मौतें लगभग हमेशा बच्चों में ही देखने को मिल रही हैं, खासकर 5 साल से छोटे बच्चों में। ऐसे में हर माता-पिता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह वायरस वयस्कों के मुकाबले सिर्फ बच्चों को ही अपना निशाना क्यों बना रहा है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी मेडिकल सच्चाई।
बच्चों को क्यों अपना शिकार बनाता है चांदीपुरा वायरस?
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदीपुरा वायरस जानबूझकर या चुनकर बच्चों को अपना निशाना नहीं बनाता, बल्कि इसके पीछे बच्चों का शारीरिक और जैविक विकास जिम्मेदार होता है।
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कमजोर ब्लड-ब्रेन बैरियर (Blood-Brain Barrier): पांच साल से कम उम्र के बच्चों का दिमाग और नर्वस सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित हो रहा होता है। उनके शरीर में ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ (दिमाग की सुरक्षा करने वाली एक प्राकृतिक परत) अभी पूरी तरह मजबूत नहीं होती। यह परत आम तौर पर हानिकारक तत्वों और वायरस को दिमाग तक पहुंचने से रोकती है, लेकिन बच्चों में कमजोर होने के कारण वायरस आसानी से दिमाग तक पहुंच जाता है और गंभीर सूजन का कारण बनता है।
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मस्तिष्क का तेजी से विकास: इस नाजुक उम्र में बच्चों का दिमाग बहुत तेजी से बढ़ रहा होता है। ऐसे में वायरस के कारण होने वाली कोई भी गंभीर सूजन उनके सामान्य विकास—जैसे चलने-फिरने, बोलने और सीखने की क्षमता—को बुरी तरह और स्थाई रूप से प्रभावित कर सकती है।
चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
यदि समय रहते इस संक्रमण की पहचान न की जाए, तो स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:
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अचानक तेज बुखार आना
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सिर में तेज दर्द और सुस्ती महसूस होना
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अचानक से दौरे (Seizures) पड़ना
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मानसिक स्थिति में बदलाव या बेहोशी की हालत
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उल्टी आना और शरीर में अत्यधिक कमजोरी
बचाव और सावधानी
चूंकि चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से मक्खियों, मच्छरों या अन्य कीटों (Vectors) के काटने से फैलता है, इसलिए एहतियात बरतना बेहद जरूरी है:
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बच्चों को मच्छरों और कीटों के काटने से बचाएं।
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घर के आसपास साफ-सफाई रखें और पानी जमा न होने दें।
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यदि बच्चे को अचानक तेज बुखार आए या सुस्ती दिखे, तो बिना देर किए तुरंत किसी अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या अस्पताल से संपर्क करें।
समय पर की गई पहचान और मेडिकल केयर ही इस खतरनाक वायरस से बच्चों की जान बचाने का एकमात्र सबसे प्रभावी तरीका है।
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