नई दिल्ली | हाल ही में प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म’ (Pulmonary Thromboembolism – PTE) बताया गया है। चिकित्सा जगत में इसे एक ‘साइलेंट किलर’ माना जाता है क्योंकि इसमें इलाज में हुई जरा सी भी देरी जानलेवा साबित हो सकती है। क्लीवलैंड क्लिनिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित लगभग एक तिहाई लोगों की मौत लक्षण दिखने के कुछ ही घंटों के भीतर हो जाती है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर यह बीमारी क्या है और इसके संकेतों को कैसे पहचाना जाए।
क्या होता है पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म?
आसान शब्दों में कहें तो पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म वह स्थिति है जब शरीर के किसी हिस्से (आमतौर पर पैरों या पेल्विस एरिया) में खून का थक्का (Clot) बनता है और रक्त वाहिकाओं के जरिए बहकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है। वहां पहुंचकर यह थक्का फेफड़ों की नसों में फंस जाता है और रक्त प्रवाह को बाधित कर देता है। इससे फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है और शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है, जो तत्काल मौत का कारण बन सकता है।
इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म के लक्षण अचानक प्रकट होते हैं और कई बार यह हार्ट अटैक जैसे महसूस हो सकते हैं। यदि आपको नीचे दिए गए संकेतों में से कोई भी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
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सीने में तेज दर्द: गहरी सांस लेने, खांसने या झुकने पर दर्द का बढ़ जाना।
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सांस लेने में तकलीफ: बिना किसी मेहनत के, आराम की स्थिति में भी सांस फूलना।
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खांसी: सूखी खांसी या खांसी के साथ खून आना।
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हृदय गति: दिल का बहुत तेजी से धड़कना या घबराहट होना।
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चक्कर और बेहोशी: अचानक सिर चकराना या बेहोश हो जाना।
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पैरों के संकेत: पैरों में अचानक सूजन, तेज दर्द, लालिमा या उस हिस्से का गर्म महसूस होना (यह डीप वेन थ्रोम्बोसिस के लक्षण हो सकते हैं)।
पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने के मुख्य कारण
फेफड़ों में थक्का जमने की प्रक्रिया अक्सर ‘डीप वेन थ्रोम्बोसिस’ (DVT) से शुरू होती है। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं:
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गतिहीन जीवनशैली: लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना या बिस्तर पर लेटे रहना (जैसे लंबी फ्लाइट या सर्जरी के बाद)।
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सर्जरी या चोट: हड्डियों की सर्जरी या नसों में लगी चोट थक्के बनने का खतरा बढ़ा देती है।
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स्वास्थ्य स्थितियां: कैंसर, हृदय रोग या फेफड़ों की पुरानी बीमारियां।
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धूम्रपान और मोटापा: अधिक वजन और स्मोकिंग से रक्त के थक्के जमने की संभावना बढ़ जाती है।
बचाव और इलाज के रास्ते
इस खतरनाक स्थिति से बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
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सक्रिय रहें: लंबे समय तक बैठने से बचें। हवाई यात्रा या ऑफिस में काम के दौरान बीच-बीच में पैरों को हिलाते रहें और टहलें।
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इमरजेंसी मेडिकल हेल्प: लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाएं।
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रक्त पतला करने वाली दवाएं: डॉक्टर आमतौर पर ‘ब्लड थिनर्स’ (Anticoagulants) देते हैं, जो मौजूदा थक्के को घोलने और नए थक्के बनने से रोकने में मदद करते हैं।
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स्वस्थ जीवनशैली: पर्याप्त पानी पिएं, वजन संतुलित रखें और नियमित व्यायाम करें।
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