
उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरा पर सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और आध्यात्मिक वैभव का एक अनूठा संगम देखने को मिलने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार प्रदेश की समृद्ध कला, विरासत और प्राचीन परंपराओं को नई पीढ़ी की चेतना से जोड़ने तथा देशभर के स्थापित व नवोदित कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान करने के लिए एक वृहद सांस्कृतिक अभियान शुरू करने जा रही है। इस विशेष कार्ययोजना के तहत उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों—अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी—में तीन भव्य कला कार्यशालाओं एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शिविरों का आयोजन तय किया गया है। राज्य ललित कला अकादमी, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों के जरिए प्रभु श्री राम व रामायण के आदर्शों, सदियों पुरानी लोक चित्रकला शैलियों और मोक्षदायिनी मां गंगा व अविनाशी काशी की अलौकिक आध्यात्मिक धरोहर को कैनवास पर साकार किया जाएगा।
इस सांस्कृतिक श्रृंखला का पहला भव्य पड़ाव मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन जन्मस्थली अयोध्या धाम बनेगी। 22 से 26 अक्टूबर तक डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के सहयोग से अयोध्या के प्रसिद्ध राम की पैड़ी और पवित्र गुप्तार घाट के सुरम्य तटों पर ‘राम, रामायण और अयोध्या’ शीर्षक से एक राष्ट्रीय कार्यशाला एवं अकादमिक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है। इस पांच दिवसीय प्रतिष्ठित आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से 25 मूर्धन्य चित्रकार और 10 प्रमुख कला व संस्कृति विशेषज्ञ शिरकत करेंगे। इस राष्ट्रीय शिविर का मूल ध्येय रामचरित और रामायण कालीन प्रसंगों की सांस्कृतिक महत्ता को आधुनिक कलात्मक दृष्टि से प्रस्तुत करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय युवा पीढ़ी को अयोध्या की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा, त्याग और मर्यादा के दर्शन को कला के माध्यम से गहराई से समझने का अवसर मिल सके।
राजधानी लखनऊ में 18 से 22 नवंबर तक राज्य ललित कला अकादमी परिसर में ‘लोकधारा’ नामक पांच दिवसीय लोक एवं पारंपरिक कला शिविर का भव्य आयोजन होगा। इस विशिष्ट मंच का प्राथमिक उद्देश्य भारत की विलुप्तप्राय लोक कलाओं और जनजातीय शैलियों को एक सक्रिय व जीवंत मंच प्रदान करना है, जहां कला साधक, शोधार्थी और आम कला प्रेमी एक साथ बैठकर पारंपरिक कलाओं के मूल तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास कर सकें। इस शिविर में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शुमार पद्मश्री से अलंकृत दिग्गज कलाकारों, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं समेत लगभग 35 से 40 पारंपरिक लोक कला साधकों की गरिमामयी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही लखनऊ विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय, गोयल इंस्टीट्यूट, टेक्नो इंस्टीट्यूट और वामसी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स एंड डिजाइन के 25 मेधावी कला विद्यार्थियों को इन दिग्गजों के सानिध्य में लाइव काम करने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।
‘लोकधारा’ शिविर में भारत की मिट्टी से जुड़ी पारंपरिक चित्रकला शैलियों जैसे मध्य प्रदेश की गोंड व भील कला, बिहार की विश्वविख्यात मधुबनी व गोदना पेंटिंग, गुजरात-मध्य प्रदेश की पिथौरा, राजस्थान की लघु चित्रकला तथा मिथिला व अवध के कोहबर जैसी समृद्ध विधाओं का लाइव प्रदर्शन किया जाएगा। इस आयोजन में पद्मश्री दुर्गाबाई, पद्मश्री भूरीबाई, पद्मश्री शिवम पासवान, पद्मश्री परेश रावुआ, पद्मश्री महावीर स्वामी और पद्मश्री श्याम शर्मा जैसे प्रतिष्ठित कला गुरु अपने जीवन भर के अनुभवों को युवा कलाकारों के साथ साझा करेंगे। पांच दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा के अनुसार, 18 नवंबर को उद्घाटन व स्टूडियो की शुरुआत के साथ कला निर्माण का आगाज होगा; 19 नवंबर को वरिष्ठ कलाकारों द्वारा लाइव प्रदर्शन और तकनीकी संवाद सत्र आयोजित होंगे; 20 नवंबर को मास्टरक्लास व मार्गदर्शन अभ्यास होगा; 21 नवंबर को पारंपरिक रंगों व तकनीकों के इस्तेमाल पर प्रश्नोत्तर व प्रायोगिक कार्यशाला होगी; और 22 नवंबर को तैयार कृतियों की एक भव्य प्रदर्शनी के साथ शिविर का औपचारिक समापन होगा।
इस सांस्कृतिक त्रिवेणी का तीसरा और अंतिम चरण दिसंबर 2026 के दूसरे सप्ताह में धर्मनगरी वाराणसी में संपन्न होगा। गंगा महासभा और राज्य ललित कला अकादमी के संयुक्त सहयोग से गंगा के पावन घाटों पर चार दिवसीय ‘काशी फ्लो’ अंतरराष्ट्रीय कला शिविर एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय शिविर का मुख्य उद्देश्य काशी की अमर आध्यात्मिक चेतना, अविरल गंगा, घाटों की सांस्कृतिक जीवनशैली और बनारस के जीवंत लोकाचार को वैश्विक कला जगत के सामने दस्तावेजीकृत करना है। इस आयोजन में वाराणसी, वृंदावन, देहरादून, मथुरा, दिल्ली, जयपुर, भोपाल, ओडिशा, लखीमपुर, सिरसा, मऊ और मेरठ समेत देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित कलाकार हिस्सा लेंगे। ‘काशी फ्लो’ के माध्यम से अयोध्या के भव्य राम मंदिर, श्री काशी विश्वनाथ धाम के नव्य स्वरूप और प्रयागराज की महाकुंभ परंपरा जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों को कैनवास पर एक नई दार्शनिक ऊंचाई दी जाएगी।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस वृहद पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की कला और संस्कृति केवल हमारी पहचान नहीं है, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर है। सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कला को केवल संग्रहालयों की चारदीवारी और सरकारी अभिलेखों तक सीमित रखने के बजाय उसे आम जनमानस, युवाओं और विद्यार्थियों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ा जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि अयोध्या, लखनऊ और काशी के ये शिविर वरिष्ठ कलाकारों के अनुभव को नई प्रतिभाओं तक हस्तांतरित करने और यूपी की सांस्कृतिक आभा को विश्व पटल पर स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होंगे। वहीं, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने रेखांकित किया कि इन तीनों आयोजनों का मूल लक्ष्य परंपरा, समकालीन रचनात्मकता और नई पीढ़ी के बीच एक अखंड संवाद स्थापित करना है। ‘लोकधारा’ से जहां युवा कलाकारों को पारंपरिक कला का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा और लोक तकनीकों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण होगा, वहीं इसे भविष्य में एक वार्षिक कैलेंडर उत्सव के रूप में विकसित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि ‘हमारी संस्कृति, हमारी ताकत’ का संदेश पूरे राष्ट्र में गुंजायमान हो सके।
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