श्रीलंका के समुद्र में छिपा अरबों डॉलर का खजाना! 3 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस और भारी तेल भंडार के संकेत, एशिया को मिल सकती बड़ी राहत

कोलंबो। भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए बड़ी आर्थिक खुशखबरी सामने आई है। देश के समुद्री क्षेत्र में विशाल प्राकृतिक संसाधनों के भंडार मिलने की संभावना जताई जा रही है। ताजा आकलनों के मुताबिक श्रीलंका के ऑफशोर इलाकों में करीब तीन ट्रिलियन क्यूबिक फीट तक प्राकृतिक गैस और समुद्र तल के नीचे कई अरब बैरल कच्चे तेल के भंडार मौजूद हो सकते हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो श्रीलंका की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है और क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार में भी हलचल मच सकती है।

समुद्र के नीचे छिपा ऊर्जा का विशाल भंडार

श्रीलंका के पेट्रोलियम विकास प्राधिकरण के चेयरमैन सलिया विक्रमसूर्या के हवाले से यह दावा किया गया है कि देश के क्षेत्रीय जल और विशेष आर्थिक क्षेत्र में ऊर्जा संसाधनों की भारी संभावनाएं मौजूद हैं। हाल के वर्षों में किए गए बेसिन मॉडलिंग और भूकंपीय सर्वेक्षणों के आधार पर विशेषज्ञों ने इस निष्कर्ष तक पहुंचने का दावा किया है।

इन अध्ययनों से यह संकेत मिला है कि श्रीलंका के समुद्री क्षेत्रों में न केवल गैस बल्कि बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के भंडार भी हो सकते हैं। इससे देश को अरबों डॉलर की आय होने की संभावना जताई जा रही है।

भारत समेत पड़ोसी देशों को होगा फायदा

यदि श्रीलंका इन संसाधनों का सफलतापूर्वक दोहन कर पाता है, तो इसका सीधा फायदा भारत सहित अन्य एशियाई देशों को भी मिल सकता है। सस्ते गैस और तेल की आपूर्ति से क्षेत्रीय ऊर्जा लागत कम हो सकती है। इससे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों को राहत मिलने की उम्मीद है।

अभी लंबा है व्यावसायिक उत्पादन का रास्ता

हालांकि, इन संभावनाओं के बावजूद फिलहाल इन संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग में समय लग सकता है। रिपोर्ट के अनुसार निकट भविष्य में गैस या तेल का उत्पादन शुरू होने की संभावना कम है। फिलहाल सरकार निवेशकों को आकर्षित करने और अन्वेषण लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है।

निवेश बढ़ाने के लिए नया कानून लागू

श्रीलंका सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 2021 का पेट्रोलियम संसाधन अधिनियम लागू किया है। इसके तहत ओपन लाइसेंसिंग सिस्टम शुरू किया गया है, जिसमें ऑफशोर क्षेत्रों को छोटे-छोटे ब्लॉकों में बांटा गया है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करना है।

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी उम्मीदें

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया के कई हिस्से ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव और समुद्री व्यापार में बाधाओं के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में श्रीलंका में संभावित ऊर्जा भंडार एशियाई देशों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरे हैं।

अगर आने वाले समय में इन संसाधनों की पुष्टि होती है और उत्पादन शुरू होता है, तो श्रीलंका न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा संतुलन में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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