
सनातन परंपरा में किसी भी नए कार्य की शुरुआत, मांगलिक अनुष्ठान, पूजन-अर्चन और यात्रा से पहले दैनिक पंचांग का अवलोकन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। पंचांग के पांच प्रमुख अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण मनुष्य के जीवन में ऊर्जा के सही संतुलन और शुभ फलों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होते हैं। आज 21 अगस्त, वार शुक्रवार है। शुक्रवार का दिन धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी एवं दैत्यगुरु शुक्राचार्य को समर्पित माना जाता है। इस दिन शास्त्रोक्त विधि-विधान से किए गए अनुष्ठान और शुभ मुहूर्त में प्रारंभ किए गए कार्य जीवन में सकारात्मक परिणाम लेकर आते हैं।
21 अगस्त का पंचांगीय विवरण
पंचांगीय गणना के अनुसार आज सूर्योदय और चंद्रोदय के समय ग्रहों की स्थितियां विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रही हैं। किसी भी जातक को अपने महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले दिन की तिथि, नक्षत्र और योग का भलीभांति अध्ययन करना चाहिए ताकि कार्यों में किसी प्रकार का विघ्न उत्पन्न न हो।
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वार: शुक्रवार (Friday)
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संवत: विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948
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मास: भाद्रपद (पूर्णिमांत / अमानंत गणना के अनुसार)
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पक्ष: शुक्ल / कृष्ण पक्षीय गणना
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सूर्योदय: प्रातः 05:54 बजे
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सूर्यास्त: सायं 06:54 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर/सायंकाल के समयानुसार
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चंद्रास्त: प्रातः काल समयानुसार
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सूर्य राशि: सिंह (Sun in Leo)
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चंद्र राशि: वृश्चिक / धनु (दिनमान गणना अनुसार गोचर)
आज के अत्यंत शुभ और मंगलकारी मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्तों में किए गए कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न होते हैं और जातक को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। गृह प्रवेश, व्यापारिक लेन-देन, नवीन अनुबंध, मुंडन, विद्यारंभ और मांगलिक खरीदारी के लिए आज के शुभ समय इस प्रकार हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:26 बजे से प्रातः 05:10 बजे तक (यह समय ईश्वरीय साधना, योग, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।)
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प्रातः सन्ध्या: प्रातः 04:48 बजे से प्रातः 05:54 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक (यह मुहूर्त समस्त प्रकार के दोषों का शमन करने वाला और बिना पंचांग शुद्धि के भी अत्यंत प्रभावी माना जाता है।)
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 बजे से दोपहर 03:26 बजे तक (मुकदमेबाजी, प्रतिस्पर्धा, परीक्षा और विजय प्राप्ति के संकल्पों के लिए उत्तम।)
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:54 बजे से सायं 07:16 बजे तक (माता लक्ष्मी की पूजा और संध्या वंदन के लिए प्रशस्त समय।)
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सायाह्न सन्ध्या: सायं 06:54 बजे से रात्रि 08:02 बजे तक
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अमृत काल: रात्रि/अपराह्न विशेष समयानुसार
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निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:02 बजे से रात्रि 12:47 बजे तक (तांत्रिक साधना और भगवती आराधना के लिए उपयुक्त।)
अशुभ समय और वर्जित कालखंड
ज्योतिष शास्त्र में जिस प्रकार शुभ मुहूर्त का महत्व है, उसी प्रकार अशुभ कालखंडों से बचना भी आवश्यक बताया गया है। अशुभ समय में शुरू किए गए कार्यों में अनावश्यक विलंब, मानसिक तनाव और आर्थिक हानि की आशंका बनी रहती है।
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राहुकाल: प्रातः 10:47 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक (राहुकाल में कोई भी नया कार्य, लेन-देन या महत्वपूर्ण यात्रा आरंभ न करें।)
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यमगण्ड काल: दोपहर 03:39 बजे से सायं 05:17 बजे तक (इस समय में शुरू किए गए कार्यों में विफलता का जोखिम रहता है।)
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गुलिक काल: प्रातः 07:31 बजे से प्रातः 09:09 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: प्रातः 08:30 बजे से प्रातः 09:22 बजे तक एवं दोपहर 12:50 बजे से दोपहर 01:42 बजे तक
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वर्ज्यम काल: दोपहर/रात्रि काल के विशेष चरण अनुसार
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दिशाशूल: पश्चिम दिशा (शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है। यदि यात्रा अत्यंत अनिवार्य हो तो घर से दही या जौ खाकर ही प्रस्थान करें।)
शुक्रवार की विशेष पूजा विधि और धार्मिक महत्व
आज शुक्रवार का दिन होने के कारण माता महालक्ष्मी, मां संतोषी और मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष रूप से फलदायी है। आर्थिक संकटों से मुक्ति पाने और दांपत्य जीवन में मधुरता लाने के लिए आज के दिन लाल या श्वेत वस्त्र धारण करके भगवती की उपासना करनी चाहिए।
श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र और महालक्ष्मी चालीसा का पाठ आज के दिन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मां लक्ष्मी को श्वेत पुष्प, कमल, मखाने की खीर और बताशे का भोग लगाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का स्थायी वास होता है। इसके साथ ही शुक्र ग्रह की शांति के लिए श्वेत वस्तुओं जैसे दूध, दही, चावल, श्वेत वस्त्र और चीनी का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करना शुभ परिणाम देता है।
दैनिक जीवन के लिए पंचांग का सटीक उपयोग
दैनिक पंचांग केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यावहारिक जीवन के प्रबंधन में भी मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। यदि आप आज कोई बड़ा वित्तीय निवेश करने जा रहे हैं, नया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं या किसी नए प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, तो अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त का चयन करें। वहीं राहुकाल के समय किसी भी प्रकार के विवाद से बचें और शांत रहकर अपने नित्य कार्यों को पूरा करें। सही समय पर किया गया सही कर्म व्यक्ति को जीवन में निरंतर प्रगति और स्थायित्व प्रदान करता है।
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