नई दिल्ली। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के नाम से ही लोग सिहर जाते हैं। अक्सर इसके इलाज का मतलब होता है— दर्दनाक कीमोथेरेपी, रेडिएशन और बड़ी सर्जरियां। लेकिन चिकित्सा विज्ञान की दुनिया से अब एक ऐसी उम्मीद भरी खबर आई है जो भविष्य में कैंसर उपचार का तरीका पूरी तरह बदल सकती है।
दुनिया की सबसे बड़ी कैंसर कॉन्फ्रेंस, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (ASCO) 2026 में पेश किए गए नए शोधों ने यह साबित कर दिया है कि अब कुछ विशेष दवाओं और हार्मोन थेरेपी के जरिए बिना कीमोथेरेपी के भी कैंसर सेल्स को नियंत्रित किया जा सकेगा। ऑन्कोलॉजिस्ट्स का मानना है कि ये नई दवाएं न केवल इलाज को आसान बनाएंगी, बल्कि मरीजों को कीमोथेरेपी के घातक दुष्प्रभावों (Side-effects) से भी बचाएंगी।
1. GRWD5769: कैंसर सेल्स को फैलने से रोकने वाली ‘जादुई’ गोली
इस साल की कॉन्फ्रेंस में सबसे ज्यादा चर्चा जीआरडब्ल्यूडी-5769 (GRWD5769) नाम की दवा की रही। यह दवा कैंसर सेल्स के उस तंत्र पर हमला करती है जो उन्हें शरीर में फैलने और इम्यून सिस्टम को धोखा देने में मदद करता है।
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असर: क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया कि इस दवा से गर्भाशय, मूत्राशय, फेफड़े, लीवर, आंत और सिर-गर्दन समेत 6 तरह के कैंसर के ट्यूमर 30% तक सिकुड़ गए।
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खासियत: यह उन मरीजों पर भी प्रभावी रही जिन पर पारंपरिक इलाज बेअसर हो चुके थे।
2. लंग कैंसर (Lung Cancer) के लिए आइवोनेसिमैब
फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए आइवोनेसिमैब (Ivonescimab) नाम की दवा एक नई किरण बनकर उभरी है। रिसर्च के अनुसार, जब इसे कीमोथेरेपी के साथ दिया गया, तो मरीजों की जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) में करीब 15% तक की वृद्धि देखी गई। यह दवा उन सेल्स को ब्लॉक कर देती है जिनके जरिए कैंसर प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) से बचकर शरीर में फैलता है।
3. ओजेकिबार्ट: आंत के कैंसर का नया हथियार
आंत (Colon) के कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए ओजेकिबार्ट (Ozekibart) नामक नई दवा पर शोध पेश किए गए। यह दवा कैंसर सेल्स को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है। ट्रायल में देखा गया कि इसने कई मरीजों में ट्यूमर को बढ़ने से रोका और कुछ मामलों में उसे काफी छोटा कर दिया, जिससे सर्जरी की जरूरत कम हो गई।
4. स्तन कैंसर (Breast Cancer): अब नहीं झड़ेंगे बाल
स्तन कैंसर के इलाज में एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन महिलाओं का जीनोमिक स्कोर (Genomic Score) कम है, उन्हें अब कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं होगी।
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विकल्प: ऐसे मरीजों के लिए सिर्फ हार्मोन थेरेपी ही प्रभावी साबित हो सकती है।
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फायदा: इससे महिलाएं कीमोथेरेपी के कारण होने वाले बाल झड़ने, कमजोरी, उल्टी और संक्रमण के खतरों से बच सकेंगी।
विशेषज्ञों की राय: विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का शुरुआती स्टेज पर पता चलना अब भी सबसे जरूरी है। लेकिन इन नई दवाओं के आने से अब इलाज ‘पर्सनलाइज्ड’ (व्यक्तिगत) हो गया है, जिससे मरीजों को लंबा और गुणवत्तापूर्ण जीवन मिल सकेगा।
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