मनोरंजन डेस्क: साल 2007 में आई सुपरस्टार शाहरुख खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘चक दे इंडिया’ (Chak De India) भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन और कल्ट स्पोर्ट्स-ड्रामा फिल्मों में शुमार की जाती है। कबीर खान के किरदार में किंग खान की शानदार एक्टिंग और महिला हॉकी टीम के जज्बे ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। इस फिल्म को आपने भी कई बार देखा होगा और इसके हर एक सीन को बिल्कुल सच माना होगा। लेकिन आज हम आपको इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प और हैरान कर देने वाला सच बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। दरअसल, फिल्म के कई सबसे इम्पैक्टफुल और मुख्य सीन्स असल में ग्राउंड पर शूट ही नहीं हुए थे, बल्कि उन्हें VFX (विजुअल इफेक्ट्स) की मदद से टेबल पर तैयार किया गया था!
1. खचाखच भरा हुआ स्टेडियम असल में था बिल्कुल खाली
फिल्म में जब भारतीय महिला हॉकी टीम वर्ल्ड कप के मैच खेलने मैदान पर उतरती है, तो स्टेडियम में हजारों-लाखों दर्शकों की भारी भीड़ और शोरगुल दिखाया जाता है। लेकिन असलियत यह है कि ये सीन किसी भरी हुई लाइव ऑडियंस के साथ नहीं फिल्माए गए थे। मेकर्स ने खाली ऑडिटोरियम और ग्राउंड के शॉट्स लिए थे और बाद में पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान VFX की मदद से नकली डिजिटल भीड़ (Crowd Multiplication) खड़ी कर दी।
दरअसल, अगर मेकर्स इतने बड़े स्टेडियम को असली जूनियर आर्टिस्ट्स (Extras) से भरने जाते, तो बजट आसमान छू लेता और शूटिंग का मैनेजमेंट करना भी नामुमकिन हो जाता। इसलिए बजट बचाने और सीन को भव्य रूप देने के लिए इस स्मार्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।
2. रोंगटे खड़े कर देने वाले क्लाइमैक्स में ‘हॉकी बॉल’ थी ही नहीं!
फिल्म का सबसे टर्निंग पॉइंट और सबसे ज्यादा थ्रिलिंग सीन इसका क्लाइमैक्स था, जहां आखिरी पेनल्टी स्ट्रोक पर पूरा मैच टिका होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस बॉल को गोल पोस्ट के अंदर जाते देखकर करोड़ों भारतीयों की सांसें थम गई थीं, वह बॉल शूटिंग के वक्त मैदान पर मौजूद ही नहीं थी!
दरअसल, डायरेक्टर उस शॉट को बेहद ड्रमैटिक, क्लोज-अप और इम्पैक्टफुल तरीके से दिखाना चाहते थे। अगर किसी असली प्रोफेशनल हॉकी प्लेयर को बॉडी डबल बनाकर भी शॉट लिया जाता, तो भी असली बॉल के साथ वैसी परफेक्ट टाइमिंग और एंगल मिलना नामुमकिन था, और इसमें सैकड़ों रीटेक हो जाते। इस समस्या से बचने के लिए एक्ट्रेस ने बिना बॉल के ही हॉकी स्टिक घुमाकर शॉट खेलने की एक्टिंग की और बाद में कंप्यूटर ग्राफिक्स (VFX) की मदद से उसमें असली दिखने वाली लेदर बॉल जोड़ी गई। यानी वो ऐतिहासिक गोल भी पूरी तरह डिजिटल था।
3. वर्ल्ड क्लास क्लीन ग्राउंड और स्कोरबोर्ड का सीक्रेट
इसके अलावा, फिल्म में जितने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के चमचमाते और बेहद साफ-सुथरे हॉकी ग्राउंड्स दिखाए गए हैं, उतने परफेक्ट ग्राउंड असलियत में उपलब्ध नहीं थे। वर्ल्ड कप लेवल का इंटरनेशनल टर्फ ग्राउंड तैयार करने के लिए मेकर्स ने ग्राफिक्स का सहारा लेकर मैदान को एकदम क्लीन लुक दिया।
यही नहीं, मैचों के दौरान जो इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड आपको स्क्रीन पर लगातार बदलते हुए नंबर दिखाता है, वह भी डिजिटल था। शूटिंग के वक्त सिर्फ एक ब्लैंक (खाली) स्क्रीन का शॉट लिया गया था और बाद में फिल्म की स्क्रिप्ट और मैच के टर्निंग पॉइंट्स के हिसाब से उस पर गोल के नंबर्स और टाइमर फिट किया गया था।
OTT पर आज भी बरकरार है जलवा
मेकर्स की इस कमाल की विजुअल इंजीनियरिंग और शाहरुख खान के बेहतरीन अभिनय की बदौलत ही यह फिल्म आज 19 साल बाद भी उतनी ही फ्रेश और दमदार लगती है। 8.1 की शानदार IMDb रेटिंग वाली इस सुपरहिट फिल्म को आप जब चाहें ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर देख सकते हैं।
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