
भारतीय सिनेमा के मौजूदा दौर में जब बॉक्स ऑफिस के आंकड़े, ओपनिंग डे के रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया पर फैंस के बीच नंबर-1 बनने की होड़ मची रहती है, तब किसी बड़े सुपरस्टार के मुंह से विनम्रता और आत्म-मंथन की बातें सुनना दुर्लभ सा लगता है। ‘केजीएफ’ फ्रेंचाइजी की ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता के बाद पूरे भारत के दिलों पर राज करने वाले कन्नड़ सिनेमा के ‘रॉकिंग स्टार’ यश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल पर्दे पर ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी एक सच्चे और परिपक्व महानायक हैं। बॉलीवुड के ‘बादशाह’ यानी शाहरुख खान को लेकर यश ने जो बेबाक और दिल छू लेने वाला बयान दिया है, उसने सिनेमा प्रेमियों के बीच एक नई बहस और सम्मान की लहर पैदा कर दी है। यश ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि कोई कलाकार कुछ ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर खुद को शाहरुख खान जैसे लीजेंड से बड़ा समझने की भूल करने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि उसके पतन का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।
‘उस दिन मेरा पतन शुरू हो जाएगा’: यश का दिल छू लेने वाला बेबाक बयान
एक साक्षात्कार और मीडिया संवाद के दौरान जब रॉकिंग स्टार यश से उनके पैन-इंडिया स्टारडम, केजीएफ के ऐतिहासिक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और बॉलीवुड के स्थापित दिग्गजों से उनकी तुलना को लेकर सवाल पूछा गया, तो यश ने बेहद शालीनता और गंभीरता से इसका उत्तर दिया। यश ने कहा कि एक या दो बड़ी सफलताओं के बाद हवा में उड़ना और खुद को उस मुकाम पर देखना जहां पहुंचने में लोगों को अपनी पूरी जिंदगी लग जाती है, सबसे बड़ा भ्रम है।
यश ने विशेष रूप से शाहरुख खान का नाम लेते हुए कहा, “शाहरुख खान सिर्फ एक अभिनेता या स्टार नहीं हैं, वे भारतीय सिनेमा की एक संस्था और वैश्विक पहचान हैं। उन्होंने पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक लगातार अपने दम पर सिनेमाई दुनिया पर राज किया है। जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तब से वे देश और दुनिया को अपने अभिनय से दीवाना बना रहे हैं। अगर मैं बॉक्स ऑफिस के कुछ आंकड़ों या कुछ फिल्मों की कमाई को देखकर यह गुमान करने लगूं कि मैं शाहरुख खान से बड़ा हो गया हूं, तो वह दिन मेरे करियर और मेरी इंसानियत के खात्मे का पहला दिन होगा। जिस दिन यह अहंकार मेरे भीतर आ जाएगा, उसी दिन से मेरा पतन निश्चित है।” यश के इस परिपक्व और जमीनी सोच ने लाखों फैंस का दिल जीत लिया है।
2018 का वो ऐतिहासिक बॉक्स ऑफिस क्लैश: ‘जीरो’ बनाम ‘केजीएफ 1’ की दास्तान
यश और शाहरुख खान के समीकरणों को समझने के लिए साल 2018 के उस बहुचर्चित बॉक्स ऑफिस क्लैश को याद करना जरूरी है। 21 दिसंबर 2018 को जब एक तरफ शाहरुख खान की बड़े बजट की मेगा फिल्म ‘जीरो’ रिलीज हुई थी, उसी दिन कन्नड़ सिनेमा से निकलकर हिंदी बेल्ट में पहली बार ‘केजीएफ: चैप्टर 1’ ने दस्तक दी थी। उस समय उत्तर भारत के दर्शक यश के नाम से पूरी तरह वाकिफ नहीं थे और कई ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना था कि किंग खान के सामने एक डब फिल्म ज्यादा दिन टिक नहीं पाएगी।
लेकिन जब फिल्में पर्दे पर उतरीं, तो इतिहास ने एक नया मोड़ ले लिया। ‘केजीएफ 1’ ने अपनी दमदार कहानी, रोंगटे खड़े कर देने वाले बैकग्राउंड स्कोर और यश के रॉ एटीट्यूड के दम पर पूरे देश में तहलका मचा दिया। इसके बाद 2022 में आई ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ ने तो दुनिया भर में 1200 करोड़ से अधिक की कमाई कर भारतीय सिनेमा के तमाम पुराने रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया। इसके बावजूद यश ने कभी भी शाहरुख खान के खिलाफ किसी तरह का अहंकार या तुलनात्मक रवैया नहीं दिखाया। यश ने हमेशा यह माना कि उस क्लैश में किसी की हार-जीत नहीं थी, बल्कि वह भारतीय सिनेमा के विस्तार का एक खूबसूरत मोड़ था।
30 साल की विरासत और किंग खान का वैश्विक रुतबा: यश ने क्यों बताया शाहरुख को अजेय
यश ने अपने विश्लेषण में इस बात को बहुत खूबसूरती से समझाया कि सुपरस्टारडम केवल पहले वीकेंड के कलेक्शन या चंद रिकॉर्ड्स से तय नहीं होता। असली स्टारडम वह होता है जो पीढ़ियों को पार कर जाए और दशकों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहे। शाहरुख खान ने 90 के दशक के ‘दीवाना’, ‘डर’, ‘बाजीगर’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ से लेकर आज के दौर की ‘पठान’, ‘जवान’ और ‘डंकी’ तक जो सफर तय किया है, वह दुनिया के किसी भी अभिनेता के लिए एक सपना है।
यश का मानना है कि शाहरुख खान ने उस दौर में भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जब विदेशों में भारतीय फिल्मों का कोई बड़ा बाजार नहीं था। अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, खाड़ी देशों से लेकर रूस और अफ्रीका तक शाहरुख खान के नाम का जो डंका बजता है, वह रातों-रात हासिल नहीं हुआ है। यश ने कहा कि एक युवा कलाकार के रूप में वे शाहरुख खान के इस अथक परिश्रम, लगन और सिनेमा के प्रति उनके समर्पण का दिल से सम्मान करते हैं। ऐसे दिग्गजों से मुकाबला करने की सोचने के बजाय उनसे सीखना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
शोहरत के नशे से दूर ज़मीन पर टिके रहने का हुनर: यश की विनम्रता बनी मिसाल
कर्नाटक के हासन जिले के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले यश (नवीन कुमार गौड़ा) का निजी सफर खुद किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। एक बस ड्राइवर के बेटे के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने वाले यश ने थिएटर की दुनिया में बैकस्टेज काम करने और छोटे-मोटे टीवी सीरियल्स में अभिनय से अपनी शुरुआत की थी। कई सालों के संघर्ष, तिरस्कार और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और अपनी पहचान बनाई।
शायद यही वजह है कि यश को अपनी जड़ों और संघर्ष की कीमत अच्छी तरह मालूम है। वे जानते हैं कि शोहरत और स्टारडम कभी भी स्थायी नहीं होते, इंसान के साथ सिर्फ उसका व्यवहार, काम के प्रति ईमानदारी और विनम्रता ही रहती है। आज देश के सबसे महंगे और डिमांडिंग सितारों में शामिल होने के बाद भी यश का अपने से वरिष्ठ कलाकारों के प्रति यह आदर भाव यह साबित करता है कि वे सफलता के नशे में चूर होने वाले सितारों में से नहीं हैं।
उत्तर और दक्षिण का टकराव नहीं, एकजुटता की नई परिभाषा: भारतीय सिनेमा का नया युग
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर अक्सर ‘बॉलीवुड बनाम साउथ’ की एक गैर-जरूरी और जहरीली बहस देखने को मिलती रही है। फैंस के गुट एक-दूसरे के कलाकारों को नीचा दिखाने और अपनी इंडस्ट्री को श्रेष्ठ साबित करने में जुटे रहते हैं। ऐसे माहौल में यश का यह बयान दोनों ही सिनेमाई दुनिया के बीच एक मजबूत पुल का काम करता है।
यश ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि अब समय आ गया है जब हम कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम या हिंदी सिनेमा की सीमाओं को तोड़कर खुद को केवल ‘भारतीय सिनेमा’ के रूप में देखें। जब कोई साउथ की फिल्म पूरे देश में पसंद की जाती है तो वह भारतीय सिनेमा की जीत होती है, और जब कोई हिंदी फिल्म विश्व पटल पर झंडे गाड़ती है तो वह भी पूरे देश का गौरव बढ़ाती है। यश और शाहरुख खान जैसे दिग्गज सितारों का आपसी सम्मान इस बात का स्पष्ट संदेश है कि सिनेमाई दुनिया में कोई विभाजन नहीं है, बल्कि यह एक परिवार है जो मिलकर विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहा है।
‘टॉक्सिक’ और ‘रामायण’ के बीच सुपरस्टारडम की नई परिभाषा
रॉकिंग स्टार यश इन दिनों अपनी आगामी मेगा-बजट और बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की तैयारियों और शूटिंग में व्यस्त हैं। इसके अलावा नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी महाकाव्य फिल्म ‘रामायण’ में भी उनके जुड़ने की चर्चाओं ने वैश्विक स्तर पर उत्साह पैदा कर दिया है। इतनी बड़ी परियोजनाओं का केंद्र होने के बावजूद यश का यह स्पष्ट दृष्टिकोण उनके आने वाले करियर को और भी मजबूत आधार देता है।
क्रिकेट हो या सिनेमा, इतिहास गवाह है कि जो खिलाड़ी या कलाकार सफलता के चरम पर पहुंचकर भी अपनी विनम्रता बनाए रखता है, वही अमर होता है। यश का यह कहना कि ‘शाहरुख खान से खुद को बड़ा समझना पतन की शुरुआत है’, केवल एक बयान नहीं बल्कि हर उस उभरते हुए कलाकार के लिए जीवन का एक महान सबक है जो शोहरत के शुरुआती दौर में अपना संतुलन खो बैठता है। यश की यह सादगी और किंग खान के प्रति उनका यह गहरा आदर निश्चित रूप से उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे महान और सम्मानित नायकों की अग्रिम पंक्ति में हमेशा बनाए रखेगा।
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