डीके शिवकुमार का कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने का सफर महज एक राजनीतिक पदोन्नति नहीं है, बल्कि यह उनकी उस रणनीति और फ्लोर मैनेजमेंट की जीत है, जिसने उन्हें कांग्रेस पार्टी का सबसे भरोसेमंद ‘पैन-इंडिया ट्रबलशूटर’ बनाया है। आज जब कर्नाटक की कमान उनके हाथों में आने वाली है, तो कांग्रेस के उन तमाम मौकों को याद करना जरूरी है, जहां डीके शिवकुमार ने पार्टी को बिखरने से बचाया।
2017 गुजरात: जब अमित शाह के ‘चक्रव्यूह’ को रिजॉर्ट पॉलिटिक्स से तोड़ा
साल 2017 का राज्यसभा चुनाव डीके शिवकुमार के करियर का सबसे बड़ा ‘टर्निनंग पॉइंट’ माना जाता है। कांग्रेस के दिग्गज अहमद पटेल को राज्यसभा भेजने की चुनौती थी, जबकि भाजपा ने अपनी पूरी ताकत उन्हें हराने में झोंक दी थी। छह विधायकों के इस्तीफा देने और बगावत के बाद, डीके शिवकुमार ने 44 विधायकों को गुजरात से निकालकर बेंगलुरु के ईगलटन रिजॉर्ट में सुरक्षित रखा। आईटी रेड के बावजूद, शिवकुमार ने न केवल विधायकों को एकजुट रखा, बल्कि वोटिंग के दिन उन्हें वापस लाकर अहमद पटेल की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की।
2019 महाराष्ट्र: गठबंधन की सरकार का ‘आर्किटेक्ट’
महाराष्ट्र में जब 2019 के चुनाव के बाद सत्ता के समीकरण बदल रहे थे, तब डीके शिवकुमार ने विधायकों को टूट से बचाने में पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने न केवल विधायकों को राजस्थान शिफ्ट करने में मदद की, बल्कि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के बीच उस गठबंधन को आकार देने में ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाई, जिसने उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया।
2024 हिमाचल प्रदेश: सुक्खू सरकार के ‘तारणहार’
हिमाचल प्रदेश में जब सुक्खू सरकार गिरने के कगार पर थी और राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग से कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली थी, तब आलाकमान की पहली कॉल डीके शिवकुमार को ही गई। उन्होंने वहां पहुंचकर प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह जैसे नाराज नेताओं के साथ समन्वय स्थापित किया और एक ‘समन्वय समिति’ (Coordination Committee) का गठन कर सरकार को गिरने से बचा लिया।
क्यों कांग्रेस के लिए ‘अविभाज्य’ हैं डीके शिवकुमार?
डीके शिवकुमार की कार्यशैली को ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है:
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रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के उस्ताद: विधायकों को सुरक्षित रखना और बाहरी दुनिया से उनका संपर्क कट करना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा है।
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संकट प्रबंधन: विपरीत परिस्थितियों में घबराए बिना त्वरित निर्णय लेने की क्षमता उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।
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सोनिया गांधी के भरोसेमंद: मुश्किल समय में पार्टी के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों ने उन्हें गांधी परिवार का सबसे विश्वासपात्र सिपहसालार बना दिया है।
डीके शिवकुमार का अब कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी ने उन्हें उनकी निस्वार्थ सेवा और रणनीतिक कौशल का ‘इनाम’ दिया है। एक छात्र नेता के रूप में शुरुआत करने वाले डीके आज न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे भारत की कांग्रेस राजनीति का केंद्र बन चुके हैं।
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