पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही हलचल तेज है। तीन बार लगातार सत्ता पर काबिज रही ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी अब विपक्ष में है, लेकिन उनकी मुश्किलें यहीं खत्म होती नहीं दिख रही हैं। अब एक भाजपा सांसद के सनसनीखेज दावे ने बंगाल की सियासत में ‘सियासी भूचाल’ ला दिया है। भाजपा सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि टीएमसी के 50 विधायक और 20 सांसद जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं, जिससे टीएमसी के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
सौमित्र खान का दावा: क्या TMC में होने वाली है बड़ी टूट?
भाजपा सांसद सौमित्र खान के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। खान का कहना है कि पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे करीब 50 विधायक और 20 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और वे जल्द ही टीएमसी से किनारा कर सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सच साबित होता है, तो सत्ता गंवाने के बाद यह ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा सियासी झटका होगा।
महाराष्ट्र जैसा दोहराया जाएगा इतिहास?
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या ममता बनर्जी का हाल महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे जैसा हो सकता है। जून 2022 में महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी थी, जिसके बाद उद्धव ठाकरे न केवल अपनी सरकार और सत्ता गंवा बैठे, बल्कि उन्हें पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी हाथ से निकलवाना पड़ा। अब ममता बनर्जी के सामने भी वैसी ही चुनौती खड़ी दिख रही है। जिस तरह से टीएमसी के पदाधिकारी इस्तीफा दे रहे हैं, वह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
सत्ता गंवाने के बाद चौतरफा घिरीं ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद ममता बनर्जी की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। वर्तमान सरकार ने टीएमसी के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। अभिषेक बनर्जी समेत कई बड़े टीएमसी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुराने मामलों की फाइलें फिर से खुल रही हैं और उनकी जांच तेज हो गई है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि कानूनी कार्रवाई के डर और पार्टी में मची बेचैनी के चलते कई नेता अपनी वफादारी बदलने की फिराक में हैं।
शुभेंदु अधिकारी की रणनीति और टीएमसी की मुश्किलें
ममता बनर्जी के पुराने सहयोगी और अब भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी को टीएमसी की हर कमजोरी का बखूबी अंदाजा है। भाजपा की रणनीति स्पष्ट है—ममता बनर्जी के प्रभाव को खत्म करना और टीएमसी की जड़ों को कमजोर करना। जिस ‘मां, माटी और मानुष’ के नारे पर ममता बनर्जी ने दशकों तक शासन किया, आज उसी पार्टी के नेता भाजपा की राह देख रहे हैं। यदि पार्टी का यह बड़ा धड़ा वाकई पाला बदलता है, तो यह बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है।
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