कोलकाता : पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत के बाद अब सबकी नजरें इस सवाल पर टिकी हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, नंदीग्राम और भवानीपुर के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा ने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए शुक्रवार को कोलकाता में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
शुक्रवार को होगी विधायक दल की बड़ी बैठक
भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को कोलकाता में होने वाली नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना जा सकता है।
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प्रस्ताव: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, शुभेंदु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं।
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घोषणा: अमित शाह औपचारिक रूप से उनके नाम का ऐलान कर सकते हैं।
‘भूमिपुत्र’ ही संभालेगा बंगाल की कमान
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर अमित शाह ने बार-बार यह संकेत दिया था कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कोई बाहरी नहीं, बल्कि इसी मिट्टी का लाल होगा। शुभेंदु अधिकारी, जो तृणमूल कांग्रेस के पुराने सिपहसालार रहे हैं और अब भाजपा के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे हैं, इस खांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं।
ममता बनर्जी को दो बार दी मात: अधिकारी का बढ़ता कद
शुभेंदु अधिकारी की दावेदारी इसलिए भी मजबूत है क्योंकि उन्होंने ममता बनर्जी को उनके सबसे सुरक्षित किलों में पटखनी दी है:
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नंदीग्राम (2021): पहली बार ममता बनर्जी को बेहद कड़े मुकाबले में हराकर अधिकारी ने सबको चौंका दिया था।
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भवानीपुर (2026): इस बार ममता के अपने गढ़ में जाकर शुभेंदु ने करीब 15,000 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
हालांकि ममता बनर्जी और टीएमसी ने चुनाव आयोग पर साजिश के आरोप लगाए हैं, लेकिन 20 राउंड की काउंटिंग के बाद अधिकारी की जीत ने बंगाल की राजनीति की दिशा बदल दी है।
नई सरकार का संकल्प: ‘विकसित और सुरक्षित बंगाल’
जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की जनता का आभार जताते हुए कहा कि भाजपा एक विकसित, समृद्ध और सुरक्षित पश्चिम बंगाल के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई सरकार का प्राथमिक लक्ष्य जनसेवा और समावेशी विकास होगा।
बता दें कि भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर टीएमसी के 15 साल के शासन को खत्म किया है। अब 9 मई को रवींद्र जयंती के अवसर पर शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं।
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