अगस्त 2024 में हुए तख्तापलट और हिंसक आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेने वाली पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वतन वापसी की चर्चाओं के बीच ढाका से बड़ी खबर आ रही है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि शेख हसीना के मुल्क लौटते ही उनके साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और उन्हें आत्मसमर्पण करने का अवसर भी नहीं दिया जाएगा।
गृहमंत्री बोले— ‘सरेंडर की कोई गुंजाइश नहीं, सिर्फ गिरफ्तारी होगी’
‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बुधवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि शेख हसीना के लिए सरेंडर करने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। अवामी लीग की नेता जैसे ही बांग्लादेश की धरती पर कदम रखेंगी, उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि प्रशासन पूरी तरह से कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेगा। इसके साथ ही विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने भी दोहराया कि कानून अपना काम करेगा और शेख हसीना को सीधे जेल जाना होगा।
मौत की सजा पा चुकी हैं शेख हसीना, सरकार का कड़ा रुख
आपको बता दें कि पिछले वर्ष (नवंबर 2025) ढाका की एक विशेष अदालत ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई बर्बर कार्रवाई को ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ मानते हुए शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई थी।
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प्रधानमंत्री के सूचना और रणनीति मामलों के सलाहकार जाहिद उर रहमान ने कहा है कि देश की जनता चाहती है कि हसीना को मिली मौत की सजा बरकरार रहे और उस पर अमल किया जाए।
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उन्होंने यह भी कहा कि सरकार न्याय सुनिश्चित करने के लिए हसीना की वापसी की घोषणा का स्वागत करती है, भले ही वह अपने बचाव के लिए दुनिया के सबसे बेहतरीन वकील क्यों न ले आएं।
‘अगर मौत आती है, तो अपनी ही धरती पर आए…’— शेख हसीना
इससे पहले रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने दिसंबर 2026 के आसपास अपनी पार्टी (अवामी लीग) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था, “वहां पहुंचते ही वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं और मार भी सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद मुझे जाना होगा। मेरी पार्टी के लोग दमन का सामना कर रहे हैं। अगर मौत आनी ही है, तो मैं चाहती हूँ कि वह मेरी अपनी मातृभूमि की धरती पर आए।”
भारत का रुख: प्रत्यर्पण एक कानूनी प्रक्रिया है
शेख हसीना की वापसी की खबरों और बांग्लादेश द्वारा लगातार की जा रही प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग के बीच भारत सरकार ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले पर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रत्यर्पण से जुड़ा कोई भी विषय पूरी तरह से एक कानूनी मामला होता है और अंतरराष्ट्रीय नियमों व कानूनों के आधार पर ही इससे निपटा जाएगा।
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